06/09/2026
ग्वालियर जिले में कृषि, उद्यानिकी और पशुपालन क्षेत्र में किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में ठोस पहल
प्राकृतिक खेती, फसल विविधीकरण और नस्ल सुधार सहित कई योजनाओं से मिल रहा किसानों को लाभ
ग्वालियर जिले में उन्नत खेती के साथ-साथ उद्यानिकी व पशुपालन को बढ़ावा देकर प्रदेश सरकार की मंशा के अनुरूप किसानों की आय बढ़ाने के लिये विभागीय योजनाओं को प्रभावी ढंग से मूर्तरूप दिया जा रहा है। प्राकृतिक व जैविक खेती व फसल विविधीकरण को दिया गया बढ़ावा धरातल पर मूर्तरूप ले रहा है। साथ ही उद्यानिकी फसलों के रकबे में विस्तार तथा पशुपालन में नस्ल सुधार जैसे नवाचारों से किसानों को आर्थिक लाभ मिल रहा है।
कृषि क्षेत्र में नवाचार
जिले में कुल 214000 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि है, जिसमें खरीफ सीजन में धान, ज्वार, बाजरा, तिल तथा रबी सीजन में गेंहू, सरसों, चना, मसूर जैसी फसलें ली जा रही हैं। नवाचार के तहत 50 हेक्टेयर में फलदार, सब्जी व अन्य पौधों की नर्सरी तैयार की जा रही है, जिसमें 3 लाख पौधों का उत्पादन कर विभिन्न विभागों व कार्यक्रमों के जरिए रोपण कराया जा रहा है। फसल विविधीकरण के तहत खरीफ-2026 में 6759 हेक्टेयर में तिल की बोवनी की गई है।
प्राकृतिक खेती के तहत 25 क्लस्टरों में 17 बायो रिसर्च सेंटरों के माध्यम से 3125 किसानों की 1250 हेक्टेयर भूमि पर प्राकृतिक व जैविक खेती की जा रही है। वहीं परम्परागत कृषि विकास योजना के तहत 2000 हेक्टेयर रकबे में 1799 किसानों का जैविक खेती के लिये पंजीयन प्रमाणीकरण संस्था के माध्यम से कराया गया है। इन किसानों को प्रतिवर्ष 5000 रुपये प्रति हेवटेयर के मान से कुल एक करोड़ रुपये की राशि सीधे डीबीटी के माध्यम से प्रोत्साहन स्वरूप उपलब्ध कराई गई है।
1,15,371 ई-टोकनों के माध्यम से 58,160 किसानों को खाद उपलब्ध कराया
खरीफ-2026 में ई-विकास प्रणाली के तहत 1,15,371 ई-टोकनों के माध्यम से 58,160 किसानों को 32,945 मैट्रिक टन रासायनिक उर्वरकों का वितरण सहकारी समितियों, मार्कफेड इत्यादि संस्थाओं के माध्यम से सफलतापूर्वक किया गया है।
उद्यानिकी में तेज विस्तार, आलू-फूलों की खेती में बदल रही तकदीर
प्रदेश में कृषि क्षेत्र का लगभग 9.1 प्रतिसत हिस्सा उद्यानिकी फसलों के अंतर्गत है, जबकि ग्वालियर जिले में यह आंकड़ा बढ़कर करीब 17 प्रतिशत हो गया है। इस वर्ष इसे 20 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। देश-प्रदेश में आलू उत्पादन के लिए भी ग्वालियर जिले की विशेष पहचान है। ग्वालियर में केन्द्रीय आलू अनुसंधान केन्द्र कार्यरत है। जिले में 4650 हेक्टेयर में आलू तथा 218 हेक्टेयर में फूलों की खेती हो रही है। देश की राजधानी दिल्ली मंडी ग्वालियर के नजदीक होने से फूलों व विदेशी सब्जियों की खेती की प्रबल संभावनाओं को देखते हुए विगत तीन वर्षों में 1250 हेक्टेयर क्षेत्र का विस्तार हुआ है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि हुई है।
जिले में अमरूद 504 हेक्टेयर, नींबू 432 हेक्टेयर, मटर 2558 हेक्टेयर तथा टमाटर का रकबा 1277 हेक्टेयर है। ग्वालियर जिले में कुल कृषि फसल उत्पादन 3786 करोड़ रुपये का होता है, जिसमें उद्यानिकी फसलों का योगदान 1393 करोड़ रुपये है, जो कुल कृषि आय का 36.79 प्रतिशत है।
पीएमएफएमई योजना के क्रियान्वयन में ग्वालियर प्रदेश के अग्रणी जिलों में
प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) के तहत 569 खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना के साथ ग्वालियर जिला मध्यप्रदेश में तीसरे स्थान पर है। इन इकाईयों से जिले के करीब 3000 लोगों को रोजगार मिल रहा है।
देश की राजधानी में भी मिला सम्मान
शासकीय पौधशाला ग्वालियर को हाईटेक स्वरूप में विकसित किया गया है। जिससे पौधशाला की आय दोगुनी हो गई है। दिल्ली में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय कृषि उद्यानिकी एक्सपो 2026 में ग्वालियर जिले को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रथम स्थान मिला है। इसके अलावा प्रदेश का पहला फ्लोरीकल्चर गार्डन लगभग 100 बीघा भूमि में मुरार क्षेत्र के खुरेरी जहांगीरपुर में स्थापित किया जा रहा है।
पशुपालन में नस्ल सुधार पर जोर, घर-घर जाकर पशुओं का उपचार
पशुपालकों को घर पहुंचकर चिकित्सा सुविधा देने के लिए जिले में 6 मोबाइल वेटरिनरी यूनिट संचालित हैं, जिनके माधाम से वर्ष 2026-27 में अब तक 4288 पशुओं का उपचार किया जा चुका है। राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत गाय-भैंसों में एफएमडी का निःशुल्क टीकाकरण किया जा रहा है। जुलाई 2026 से शुरू हुए 8वें चरण में 3,20,500 के लक्ष्य के विरुद्ध अब तक 2,10,524 पशुओं का टीकाकरण पूरा हो चुका है।
पशुपालकों की आय बढ़ाने के लिए सेक्स सोर्टेड सीमन व कृत्रिम गर्भाधान जैसी आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है। वर्ष 2026-27 में 9000 सेक्स सोर्टेड सीमन के लक्ष्य के विरुद्ध 728 की उपलब्धि हासिल हुई है, जबकि 85968 कृत्रिम गर्भाधान के लक्ष्य के विरुद्ध 11997 की उपलब्धि प्राप्त हो चुकी है।
डॉ. भीमराव अम्बेडकर कामधेनु पोजना के अंतर्गत बड़े डेयरी फार्म की प्रोत्साहन दिया जा रहा है, जिसमें 25 गायों की यूनिट के लिए 36 लाख रुपये तथा 25 भैंसों की यूनिट के लिए 42 लाख रुपये तक की परियोजना का प्रावधान है। जिले में अब तक इस योजना के तहत 90 आवेदन ऑनलाइन पोर्टल पर प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 30 प्रकरणों को शासन स्तर से स्वीकृति मिल चुकी है।
Collector Office Gwalior
CM Madhya Pradesh