27/08/2026
माननीय ए.बालकृष्णन जी
(3 मई 1938 – 27 अगस्त 2026)
विवेकानन्द शिला स्मारक एवं विवेकानन्द केन्द्र के अध्यक्ष, जीवनव्रती कार्यकर्ता मा. बालकृष्णन जी ने आज प्रातः लगभग 12:05 बजे अपना पार्थिव शरीर त्याग दिया।
मा. बालकृष्णन जी का जन्म 3 मई 1938 को केरल राज्य में हुआ था। भारतीय वायुसेना में कुछ समय सेवा देने के पश्चात, मा. एकनाथजी के उस आह्वान—
“पवित्रता और उत्साह से ओतप्रोत युवा स्त्री-पुरुष भारत के कोने-कोने में जाकर हिन्दुत्व का संदेश प्रसारित करें”—
से प्रेरित होकर वे वर्ष 1973 में विवेकानन्द केन्द्र के प्रथम जीवनव्रती कार्यकर्ता के रूप में स्वयं को राष्ट्र कार्य हेतु समर्पित किया ।
प्रशिक्षण पूर्ण होने के पश्चात मा. एकनाथजी ने उन्हें अरुणाचल प्रदेश भेजा। 1962 के भारत-चीन युद्ध की विभीषिका से उबर रहे उस क्षेत्र में उन्होंने शिक्षा के माध्यम से मनुष्य निर्माण एवं राष्ट्र पुनर्निर्माण के उस महान कार्य को आगे बढ़ाया, जो विवेकानन्द केन्द्र का मूल उद्देश्य है।
अरुणाचल प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में उनके अग्रणी एवं अनुकरणीय योगदान के लिए राज्य सरकार ने वर्ष 2014 में उन्हें राज्य पुरस्कार से सम्मानित किया।
आपका सम्पूर्ण जीवन एक ऐसे कर्मयोगी का प्रेरक उदाहरण है, जिन्होंने मा. एकनाथजी के उस स्वप्न को साकार करने के लिए स्वयं को पूर्णतः भारत माता की सेवा में समर्पित कर दिया कि विवेकानन्द केन्द्र केवल एक संस्था नहीं, बल्कि एक जीवंत स्मारक बने।
विनम्र श्रद्धांजलि! 🙏
ॐ शान्तिः! शान्तिः!! शान्तिः!!!