06/05/2021
📢 जब *Titanic* समुद्र में डूब रहा था तो उसके आसपास तीन ऐसे जहाज़ मौजूद थे जो Titanic के यात्रियों को बचा सकते थे।
सबसे निकट जो जहाज़ उपस्थित था उसका नाम *SAMPSON* था तथा वह दुर्घटना के समय Titanic से मात्र सात मील की दूरी पर था।
SAMPSON के captain ने न केवल Titanic की ओर से fire किए गए सफेद शोले (जो कि बेहद खतरे की हालत में हवा में fire किये जाते हैं।) देखे थे, बल्कि उसके यात्रियों के चिल्लाने की आवाज़ को भी सुना भी था। परन्तु SAMSON के लोग गैर कानूनी तौर पर बेशकीमती समुद्री जीवों का शिकार कर रहे थे तथा नहीं चाहते थे कि पकड़े जाएं, वे अपने जहाज़ को दूसरी तरफ़ मोड़कर चले गए।
*यह जहाज़ हममें से उन लोगों की तरह है जो अपने पापपूर्ण जीवन में इतने मग्न हो जाते हैं कि उनके भीतर से मानवता ही समाप्त हो जाती है।*
दूसरा जहाज़ *CALIFORNIA* था, जो दुर्घटना के समय Titanic से चौदह मील दूर था। उस जहाज़ के captain ने भी Titanic की ओर से निकल रहे सफेद शोले अपनी आँखों से देखे थे। पर चूँकि Titanic उस समय बर्फ़ की चट्टानों से घिरा हुआ था तथा उसे उन चट्टानों के चक्कर काटकर जाना पड़ता, इसलिए वह captain सुबह होने की प्रतीक्षा करने लगा। तथा जब सुबह वह Titanic की location पर पहुँचा तब तक Titanic को captain *Edward Smith* तथा 1569 यात्रियों समेत समुद्र की तह में डूबे हुए चार घण्टे व्यतीत हो चुके थे।
*यह जहाज़ हम लोगों मे से उनकी तरह है जो किसी की सहायता करने के लिए अपनी सुविधा देखते हैं। तथा यदि अपनी परिस्थिति ठीक न हों तो अपना कर्तव्य भूल जाते हैं।*
तीसरा जहाज़ *CARPATHIA* था जो Titanic से 68 मील दूर था, उस जहाज़ के captain ने radio पर Titanic के यात्रियों की चीख-पुकार सुनी। जबकि उसका जहाज़ दूसरी तरफ़ जा रहा था फिर भी उसने तुरन्त अपने जहाज़ को मोड़ा तथा बर्फ़ की चट्टानों व खतरनाक़ मौसम की चिन्ता किए बिना सहायता के लिए full speed से चल दिया। यद्यपि वह दूर होने के कारण Titanic के डूबने के दो घण्टे बाद location पर पहुँच सका परन्तु यही वह जहाज़ था, जिसने lifeboats की सहायता से Titanic के बाकी 710 यात्रियों को जीवित बचाया था तथा उन्हें सुरक्षित न्यूयार्क पहुँचा दिया था।
उस जहाज़ के captain *आर्थो रोसट्रन* को ब्रिटेन की तारीख के चन्द बहादुर कैप्टनों में शुमार किया जाता है तथा उनको कई सामाजिक एवं सरकारी पुरस्कार भी प्रदान किये गये थे।
*हमारे जीवन में सदैव कठिनाइयाँ रहती हैं, चुनौतियाँ रहती हैं परन्तु जो इन कठिनाईयों तथा चुनौतियों का सामना करते हुए भी मानवता के लिए कुछ कर जाए वही सच्चा मनुष्य है।*
आज की परिस्थिति में जिस किसी ने भी अपनी सामर्थ्य अनुसार किसी की सहायता की है, समझो उसने विश्व रूपी के डूबने से पहले जीवन बचाने का पुण्य प्राप्त किया है। अभी संकट दूर नहीं हुआ है। अभी भी बहुत कुछ किया जा सकता है। आइये, मिलजुलकर इस कठिन घड़ी में एक दूसरे की सहायता करें।
*महामुद्रा तिरोहित* 🌏