17/09/2022
सुप्रभात मित्रों,
नए युग के पैगम्बर, दक्षिण पूर्व एशिया के सुकरात ,समाज सुधार आंदोलन के जनक तथा अज्ञान, अंधविश्वास, निरर्थक रिवाजो और निराधार अचारों के कट्टर शत्रु का आज १४३वा जन्म दिन है ।
नए युग के इस पैगम्बर को UNESCO द्वारा २७जून,१९७०को उपरोक्त विशेषणों से विभूषित किया गया था । कौन था वह सख्श जिसे अंतर राष्ट्रीय संस्था यूनेस्को ने एशिया का सुकरात कहा था । उत्तरभारत में उस विभूति को बहुत कम लोग जानते होंगे और यदि वह जानते भी होंगे तो उन्होंने उसके कृतित्व व्यक्तित्व को अपने जीवन मै उस तरह से अंगीकार नहीं किया होगा जिस तरह से वह तमिल लैंड के पिछड़े दलित लोगों के मन मस्तिष्क मै आज तक जमे हुए हैं ।
उनका नाम है इ वी रामस्वामी नायकर, जिनका जन्म तमिलनाडु के इरोड नगर में १७सितम्बर,१८७९ को हुआ था।
चलने फिरने में अपनी असमर्थता के बावजूद भी पेरियार अपनी मृत्यु से एक सप्ताह पहले तक सम्मेलनों में भाग लेते रहे । २५दिसम्बर, १९७३को उनका प्रनांत वेल्लोर क्रिश्चियन अस्पताल में प्रातःकाल मै हुआ था और९५_९६साल की उम्र में उन्होंने tamilvasiyon से विदा ली , २५तारीख को जब उनका शव मद्रास पहुंचा तो घंटों से लोग तीन मील की कतार में खड़े होकर अपने जन नायक को श्रद्धांजलि देने खड़े थे ।
आइए ऐसी विलक्षण प्रतिभा, तर्क मूर्ति बुद्धवाद के धनी मानवता के महान सेवक के बारे में कुछ और जानने की कोशिश करे यह जानते हुए कि हम समुद्र में से ली गई अंजुली भर भी नहीं जान पाएंगे , उनकी सेवाओं का ग्राफ ७५वर्षो में फैलता है , ९५साल में से इस महान विभूति ने दलित पिछड़े वर्गों के बीच आत्म सम्मान , शिक्षा जागरण, महिला विकास वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने, तमिल लैंड को सामाजिक, आर्थिक सांस्कृतिक रूप से सुदृढ करने में लगाए ।
वह सभी तरह से आधुनिक युग के मनीषी , जैसा उचित देखते महसूस करते वा विचार व्यक्त करते ।वह कहते थे कि यदि लोगो के बीच anushasan हो तो सिनेमा आवश्यक नहीं, वकील के पेशे को समाप्त करने से न्याय और ईमानदारी बढ़ेगी,, ईमानदारी की जरूरत वहां है जहां बे इमानी हैं। उनका drastikon वास्तव मै ही बहुत मानव वादी था। ऐसे महान मनीषी को शत शत नमन।