¶¶¶ जय दादी सत्ती माँ ¶¶¶

¶¶¶ जय दादी सत्ती माँ  ¶¶¶ Owner :- Jds Ankt Nagar

17/10/2017

सभी भक्तों को धनतेरस और दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं ।

https://youtu.be/wt_QGUDOLR8plz share nd subcribe mazedar video h dosto mere bhai ki jarur dekho agar maza aaye to share...
17/08/2017

https://youtu.be/wt_QGUDOLR8

plz share nd subcribe

mazedar video h dosto mere bhai ki jarur dekho agar maza aaye to share jarur karna 🤣🤣🤣

https://youtu.be/lTWCbcr1O4s by Jds Ankit Naagar
04/08/2017

https://youtu.be/lTWCbcr1O4s by Jds Ankit Naagar

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23/04/2017

Jai dadi satti maa

17/04/2017

जय दादी सत्ती माँ

01/10/2015

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No pain no gain

22/07/2015

एक फ़क़ीर था। उसके दोनों बाज़ू नहीं थे। उस बाग़ में मच्छर भी बहुत होते थे। मैंने कई बार देखा उस फ़क़ीर को। आवाज़ देकर , ...
30/04/2015

एक फ़क़ीर था। उसके दोनों बाज़ू नहीं थे। उस बाग़ में मच्छर भी बहुत होते थे। मैंने कई बार देखा उस फ़क़ीर को। आवाज़ देकर , माथा झुकाकर वह पैसा माँगता था। एक बार मैंने उस फ़क़ीर से पूछा - " पैसे तो माँग लेते हो , रोटी कैसे खाते हो ? "

उसने बताया - " जब शाम उतर आती है तो उस नानबाई को पुकारता हूँ , ' ओ जुम्मा ! आके पैसे ले जा , रोटियाँ दे जा। ' वह भीख के पैसे उठा ले जाता है , रोटियाँ दे जाता है। "

मैंने पूछा - " खाते कैसे हो बिना हाथों के ? "

वह बोला - " खुद तो खा नहीं सकता। आने-जानेवालों को आवाज़ देता हूँ ' ओ जानेवालों ! प्रभु तुम्हारे हाथ बनाए रखे , मेरे ऊपर दया करो ! रोटी खिला दो मुझे , मेरे हाथ नहीं हैं। ' हर कोई तो सुनता नहीं , लेकिन किसी-किसी को तरस आ जाता है। वह प्रभु का प्यारा मेरे पास आ बैठता है। ग्रास तोड़कर मेरे मुँह में डालता जाता है , मैं खा लेता हूँ। "
सुनकर मेरा दिल भर आया। मैंने पूछ लिया - " पानी कैसे पीते हो ? "

उसने बताया - " इस घड़े को टांग के सहारे झुका देता हूँ तो प्याला भर जाता है। तब पशुओं की तरह झुककर पानी पी लेता हूँ। "

मैंने कहा - " यहाँ मच्छर बहुत हैं। यदि मच्छर लड़ जाए तो क्या करते हो ? "

वह बोला - " तब शरीर को ज़मीन पर रगड़ता हूँ। पानी से निकली मछली की तरह लोटता और तड़पता हूँ। "

हाय ! केवल दो हाथ न होने से कितनी दुर्गति होती है !

अरे , इस शरीर की निंदा मत करो ! यह तो अनमोल रत्न है ! शरीर का हर अंग इतना कीमती है कि संसार का कोई भी खज़ाना उसका मोल नहीं चुका सकता। परन्तु यह भी तो सोचो कि यह शरीर मिला किस लिए है ? इसका हर अंग उपयोगी है। इनका उपयोग करो !

स्मरण रहे कि ये आँखे पापों को ढूँढने के लिए नहीं मिलीं।

कान निंदा सुनने के लिए नहीं मिले।

हाथ दूसरों का गला दबाने के लिए नहीं मिले।

यह मन भी अहंकार में डूबने या मोह-माया में फसने को नहीं मिला।

ये आँख सच्चे सतगुरु की खोज के लिये मिली है जो हमें परमात्मा के बताये मार्ग पर चलने सिखाये।

ये हाथ प्राणी मात्र की सेवा करने को मिले हैं

Jai dadi satti maa ...!!Aap k bhakton ki seva main .......
16/12/2014

Jai dadi satti maa ...!!
Aap k bhakton ki seva main .......

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