Oblivion of Bihar - बिहार की गुमनामी

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BIRTH PLACE OF AMRAPALI आज वैशाली की प्रसिद्ध राजनर्तकी और अपूर्व सुन्दरी ‘अम्बपाली’ के गाँव ‘अम्बारा’ हैं। अम्बपाली बुद...
18/11/2022

BIRTH PLACE OF AMRAPALI

आज वैशाली की प्रसिद्ध राजनर्तकी और अपूर्व सुन्दरी ‘अम्बपाली’ के गाँव ‘अम्बारा’ हैं। अम्बपाली बुद्धकाल की एक ऐतिहासिक पात्र है और उसकी जन्मस्थली ‘अम्बारा’ गाँव भी। ‘अम्बपाली’ का वह ‘आम्रवन’ अब भी बचा हुआ है, जिसे अम्बपाली ने बुद्ध को दान दिया था। इस आम्रवन में बुद्ध ने अपने शिष्यों के साथ कई वर्षावास गुजारे थे। मुजफ्फरपुर-छपरा मुख्य मार्ग से सटा हुआ यह आम्रवन एक पुष्करणी (तालाब) से शुरू होता है। इस तालाब की स्थिति अच्छी नहीं है। फिर भी देश-विदेश के बौद्ध भिक्षु जब यहाँ आते हैं, तो इसके जल से अभिषेक करते हैं। सम्भव है उस समय यह मार्ग दूसरी जगह से जाता हो और तालाब बगीचे के बीच में रहा हो। बीसियों एकड़ का यह आम्रवन अतिक्रमण का शिकार होकर अब मात्र दो-तीन एकड़ का ही रह गया है। इसी आम्रवन के सामने अम्बारा चौक पर सडक के उस पार एक सरकारी प्राथमिक स्कूल है। लोग उसी को अम्बपाली का घर बताते हैं। वहाँ मुख्यद्वार पर बुद्ध की एक छोटी-सी मूर्ति लगी हुई है और उसके नीचे एक पुराने शिलापट्ट पर अँग्रेजी में लिखा हुआ है-Birth Place of Amarpali

लोग बताते है कि बहुत पहले वहाँ आम्रपाली की एक प्रतिमा भी स्थापित थी, जो अब नहीं है। अभी हाल-हाल तक स्कूल के सामने के मुख्य मार्ग पर बिहार सरकार का एक बड़ा-सा साईन बोर्ड लगा था, जिसके ऊपरी हिस्से के एक किनारे पर बुद्ध और दूसरे किनारे पर आम्रपाली की तस्वीरें बनी थी। उसके नीचे आम्रपाली और बुद्ध के ऐतिहासिक विवरण थे, जो अब भी है। किन्तु रख-रखाव के अभाव में वह बोर्ड जड़ से उखड़ गया और उसे स्कूल के अन्दर चहारदीवारी से सटाकर खड़ा कर दिया गया। वहाँ उग आये खर-पतवार और धूल-कीचड़ के बीच आज भी उसकी लिखावट पढ़ी जा सकती है, जिसमें आम्रपाली के जन्मस्थान का वर्णन है।
पुराने लोग बताते हैं कि यह स्थान स्तूपनुमा एक ऊँचा टीला और ईंट का खंडहर था, जो दूर-दूर तक फैला था। धीरे-धीरे लोग उसे काटते गये और उस लावारिश जमीन को हड़पते चले गये। 1960-65 के आस-पास जब यह सरकारी स्कूल बना, उस समय भी यह जमीन लगभग 30 डिसमिल थी। किन्तु आज यह दो-तीन डिसमिल ही रह गयी है। यहाँ से होकर एक लम्बी-चौड़ी सुरंग वैशाली गढ़ तक जाती थी, जिसके अवशेष अब भी जहाँ-तहाँ देखे जा सकते हैं। वैशाली गढ़ की दूरी यहाँ से लगभग 5-6 किमी है। अम्बपाली भीड़ से बचने के लिए इसी सुरंग से होकर वैशाली दरबार में जाती थी।
इससे दक्षिण-पूरब सुरंग के रास्ते पर अम्बारा नाम का एक और गाँव है, जिसे ‘अम्बारा चौबे’ कहते हैं। इस गाँव के लोगों का दावा है कि ‘आम्रपाली’ का जन्म इसी गाँव में हुआ था। प्रमाण में वे सुरंग के रास्ते का एक ऊँचा स्थान दिखाते हैं, जो कभी ऊँचा टीला था। ‘‘अम्बारा चौबे’ एक भूमिहार बहुल गाँव है, जबकि ‘अम्बारा तेजसिंह’ राजपूत बहुल। यहाँ ब्राह्मण और दलित-पिछ्ड़ी जातियों की संख्या भी कम नहीं है। पहले इस पंचायत का नाम आम्रपाली के नाम पर ‘आम्रपाली’ था, किन्तु वर्ष 2000-01 के परिसीमन में यह पंचायत दो भागों में बँट गया- ‘अम्बारा तेजसिंह’ और ‘मड़वा पाकड़’। पर पुराने दस्तावेज में इसका नाम ‘आम्रपाली’ ही है। इनमें आसपास के कई गाँव मिले हुए हैं, जिसमें एक प्रमुख गाँव है पास का ‘रेवा वसंतपुर’।
‘रेवा वसंतपुर’ के एक टोले में ‘डोम’ लोगों का घर है। इनके कुछ घर ‘मड़वा पाकड़’ में भी हैं। ‘अम्बारा तेजसिंह’ के सवर्ण खासकर राजपूत लोग ‘अम्बपाली’ के अस्तित्व के प्रति उतने उत्साहित और संवेदनशील नहीं हैं। उनका कहना है- ‘रही होगी कोई नीच जाति की नर्तकी।‘ किन्तु दलित-पिछड़े लोग उसे अपनी विरासत मानते हैं। अधिकांश लोग ‘अम्बपाली’ को ‘डोम’ जाति की कन्या बताते हैं। कुछ लोग जोर देकर बताते है कि ‘अम्बपाली’ डोम जाति की ही थी। हमलोग बाबा-दादा के ज़माने से सुनते आये हैं। ऐसे लोगों में पास के स्कूल के शिक्षक राणा कुणाल, चन्द्रिका प्रसाद, कपिलदेव राम, सहदेव राम, दिलीप साह आदि लोग हैं। इसके प्रमाण में वे लोग बताते हैं कि यहाँ के डोम लोग अब भी सुन्दर होते हैं। पुराने ज़माने में नाचना-गाना उनका पेशा रहा होगा, जो अब नहीं है। वे पास के गाँव ‘रेवा वसंतपुर’ के डोम 'सिक्की मल्ली' के परिवार के बारे में बताते हैं, जिसके खानदान-दर-खानदान गोरे और सुन्दर रहे हैं। आज भी उनके परिवार के सभी सदस्य वैसे ही गोरे और सुन्दर हैं।
‘अम्बपाली’ उसी के खानदान की थी। उस पंचायत की मुखिया बेबी कुमारी के पति सुरेश शर्मा, वयोवृद्ध अवकाश प्राप्त शिक्षक योगेन्द्र प्रसाद सिंह, अवधेश ठाकुर, कपिलदेव ठाकुर आदि लोग भी इस संभावना से इनकार नहीं करते। मैंने सिक्की मल्ली के घर पर जाकर देखा और सचमुच वैसा ही पाया। सिक्की मल्ली के बेटे-बेटी-पोती-पतोहू की तस्वीर नीचे दी जा रही है। इसका कोई ऐतिहासिक प्रमाण तो उपलब्ध नहीं है, पर बुद्ध द्वारा चांडाल कन्या प्रकृति को बौद्ध धर्म में दीक्षित कर शिष्या बनाने का इतिहास है। प्रकृति पहले बुद्ध के प्रमुख शिष्य आनन्द पर अनुरक्त थी। किन्तु बुद्ध द्वारा मोह की निस्सारता समझाने पर वह बुद्ध की शिष्या बन गयी।
भारत में ऐसा पहली बार हुआ कि सैकड़ों स्त्रियों ने बौद्धधर्म अपनाकर संन्यास ग्रहण कर लिया। और यह सब बुद्ध के सामने हुआ। यह परम्परा बुद्ध के बाद भी जारी रही। इसके प्रमाण तुर्कों के आगमन के पूर्व बारहवीं-तेरहवीं शताब्दी तक मिल जाते हैं, “क्योंकि भारत से बौद्धधर्म का लोप तेरहवीं-चौदहवीं शताब्दी में हुआ.” (‘बुद्धचर्य्या’, राहुल सांकृत्यायन, भूमिका) बौद्धग्रन्थ ‘थेरीगाथा’ में केवल 73 प्रमुख स्त्रियों के ही नाम, वक्तव्य और उनकी कवितायें मिलती हैं। बौद्ध धर्म में दीक्षित स्त्रियों को ‘थेरी’ कहते थे। इन प्रमुख थेरियों में वैशाली की राजनर्तकी या गणिका ‘अम्बपाली’ का भी नाम है।
Amrapali was the most beautiful woman of her time. The description of her beauty is found in Pali texts. Amrapali was so beautiful that every man in the city wanted to marry her.

धुआ कुंड सासाराम शहर में स्थित झरनों की एक जोड़ी है। इन दो झरनों का उपयोग पनबिजली स्रोत के रूप में किया गया है, जिसमें 5...
05/07/2021

धुआ कुंड सासाराम शहर में स्थित झरनों की एक जोड़ी है। इन दो झरनों का उपयोग पनबिजली स्रोत के रूप में किया गया है, जिसमें 50-100 मेगावाट बिजली पैदा करने की क्षमता है।

    पहाड़ियों के बीचोंबीच बसा कैमूर का तेलहारा कुण्ड भारत के कैमूर जिले में भबुआ-औधोरा रोड पर स्थित एक झरने का नाम  है । ...
08/07/2020

पहाड़ियों के बीचोंबीच बसा कैमूर का तेलहारा कुण्ड भारत के कैमूर जिले में भबुआ-औधोरा रोड पर स्थित एक झरने का नाम है । यह गिरावट दुर्गावती नदी के निकट रोहतास स्तर पर स्थित है। यह दुर्गावती स्टोर वेंचर से कुछ किलोमीटर की दूरी पर है । यह कुंड भभुआ कैमूर जिला मुख्यालय से 32 किमी और मोहनिया से 47 किमी की दूरी पर है।

हम गर्मिओ में घूमने क लिए जयादा तर लोग बिहार छोड़. कर केम्पटी फॉल मंसूरी जाते है। क्यों ? हमारे पास बिहार में चारों ओर जंगल से घिरे इस पहाड़ी पर झरने की सुंदरता का आनंद उठाने के लिए सबकुछ है। दिसंबर से जनवरी के महीने में यहां की रौनक देखी जाती है। लेकिन इनकी खामोश का हमें पता नहीं चलता इसके पीछे कही न कही हमारी बिहार सरकार की कमी रही होगी। बिहार टूरिज्म को क्योँ नहीं बढ़ावा दिया गया। मंसूरी के पास है जो हमारे तेलहार वाटर फॉल के सामने कुछ भी नहीं है फिर भी वह लाखो लोग अपनी छुट्टिया एन्जॉय करने जाते है और इस से वहाँ के गवर्नमेंट को करोड़ो रुपया का इनकम होता है। जब हमारे पास उनसे अच्छा वाटर फॉल है फिर भी हम एक रुपया भी ट्रूरिस्ट से क्योँ नहीं कमा सकते ? सरकार को यहां सुरक्षा के साथ-साथ सुविधाओं में भी इजाफ़ा करना चाहिए। #

गोरौल चीनी मिल, वैशाली, बिहार के सबसे बड़े चीनी मिलों मे एक, 1949 में स्थापित, हज़ारों रोज़गार, हज़ारों खुशहाल गन्ना किस...
08/07/2020

गोरौल चीनी मिल, वैशाली, बिहार के सबसे बड़े चीनी मिलों मे एक, 1949 में स्थापित, हज़ारों रोज़गार, हज़ारों खुशहाल गन्ना किसान, उत्तर बिहार की शान, 1992 में बंद, किसान बर्बाद, मज़दूर तबाह, करोड़ों बकाया, आत्महत्याएं, अरबों की मशीन-ज़मीन बर्बाद, चोरी-अतिक्रमण...सब नाश! यही बिहार का औद्योगिक इतिहास है! मिल का विनाश वह सत्य बताता है जो हम सुनना नहीं चाहते। बिहार में सभी तथाकथित नेताओं की प्रतिभा को समाकलन कर दिया जाय और 100 साल भी दिया जाय तो इनसे नहीं होगा। क्योंकि इनको करना नहीं आता। और जैसा डॉ. राजेन्द्र प्रसाद कहते थे कि जो सिद्धांत में सही नहीं वह व्यवहार में कभी नहीं हो पाएगा। यह बात अब ज़मीन पर जनता को भी पता है और वे बदलाव को तैयार हैं।एक समय था जब गोरौल चीनी मिल अपनी बुलन्दी पर था पर पता नहीं उसे किसकी नजर लग गई। हजारों लोगों को रोजगार देने वाली यह मिल आज खंडहर बन चुकी है। चीनी मिल की कीमती मशीनों और पार्ट-पुर्जे पर चोरों की नजर है। पिछले कई सालों के दौरान लाखों रुपए के कीमती सामान चुरा लिए गए। स्थानीय लोगों और चीनी मिल परिसर में रहने वाले कुछ लोगों की सतर्कता से कई बार चोर पकड़े भी गए लेकिन चोरी बदस्तूर जारी है।

#गोरौल_चीनी_मिल

बिहार के हर जिले या शहर में ऐसे लघु और मझोले उद्योग मिल हीं जाएंगे जो काल के गाल में समाते जा रहे हैं। उद्यमिता एवं आर्थ...
01/07/2020

बिहार के हर जिले या शहर में ऐसे लघु और मझोले उद्योग मिल हीं जाएंगे जो काल के गाल में समाते जा रहे हैं। उद्यमिता एवं आर्थिक विकास के बीच की कड़ी कौशल विकास होती है। हो सकता है योजनाएं अच्छी बनी हो कागजो पर, नामकरण भी अच्छा हुआ हो..स्टार्टअप,स्टैंडअप,मुद्रा,इनोवेशन आदि आदि परन्तु प्रश्न क्रियान्वयन का है।

Morton Toffee Factory, Marhowrah , Bihar

कैमूर में तेलहाड़ तो नवादा में ककोलत का अद्भुत वॉटरफॉल!अरब सागर के उस पार तो कृत्रिम झरने और बादल बनाकर ग्लोबल सिटी दुबई...
01/07/2020

कैमूर में तेलहाड़ तो नवादा में ककोलत का अद्भुत वॉटरफॉल!

अरब सागर के उस पार तो कृत्रिम झरने और बादल बनाकर ग्लोबल सिटी दुबई में सपने बिकते हैं और यहाँ नवादा में प्रकृति के वरदान पर बिहार में नक़ली नेताओं का ‘स्पेशल स्टेटस’ का विलाप है:

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