26/06/2024
हेलेन केलर का जन्म | Helen Keller Born
Helen Keller का जन्म 27 जून 1880 को टस्कम्बिया,अलाबामा, संयुक्त राज्य अमेरिका में हुआ था।
Helen Keller का पूरा नाम हेलेन ऐडम्स केलर था।
Helen Keller के पिता का नाम आर्थर एच. केलर था और मां का नाम कैथरीन एडम्स केलर था।
Helen Keller के पिता सेना में अधिकारी के रूप में कार्यरत थे।
जब Helen Keller का जन्म हुआ तब वह बिल्कुल स्वस्थ थी। समय बीतता गया और लगभग 19 महीनों के बाद हेलेन केलर बीमार हो गई, उन्हें तेज बुखार ने जकड़ लिया।
काफी मुश्किलों के बाद तीन से चार दिन में हेलन केलर का बुखार उतर गया। उन्हें ऐसा बुखार था कि ज्यादातर मामलों में ऐसे रोगी की मृत्यु हो जाती थी लेकिन Helen Keller बच गई।
कुछ समय बाद पता चला कि उस बीमारी के कारण Helen Keller अपनी सुनने, बोलने और देखने की शक्ति खो चुकी हैं। अब हेलन केलर के माता-पिता के सामने एक चुनौती थी कि उनको शिक्षा कैसे दी जाएगी, कौन ऐसा शिक्षक होगा जो हेलन केलर को अच्छी शिक्षा दे पाएगा और हेलन केलर उसे समझ पाए।
यह चुनौती इसलिए थी कि Helen Keller सामान्य बच्चों से अलग थी क्योंकि अब वह बोलने सुनने और देखने में असमर्थ थी।
जिसके कारण Helen Keller दूसरे बच्चों के साथ बैठ कर पढ़ नहीं सकती थी, उनके साथ खेल नहीं सकती थी और उनसे बातें नहीं कर सकती थी।
लेकिन हेलेन केलर के माता-पिता यह जानते थे कि उनकी पुत्री में इन सभी मुश्किलों का सामना करने की हिम्मत है।
हेलन केलर की मां ने उन्हें कई डॉक्टरों को दिखाया लेकिन इससे कोई भी लाभ नहीं हुआ फिर कुछ समय बाद, एक दिन Helen Keller की मां की मुलाकात डॉ. माइकल अनेग्रस से हुई। और डॉक्टर माइकल अनेग्रस ने उन्हें एक कुशल अध्यापिका से मिलाया और फिर Helen Keller के माता पिता की चुनौती जो उनके लिए एक शिक्षक ढूंढने की थी वह खत्म हो गई।
Helen Keller के माता-पिता के कई प्रयासों के बाद अंत में उन्हें Helen Keller के लिए एक अध्यापिका मिल गई जिनका नाम “एनि सुलिव्हान” था।
एनि हेलन केलर को पढ़ाने के लिए उनके घर पहुंची, उस समय Helen Keller बहुत क्रोधित और जिद्दी लड़की थी लेकिन एनि उसे समझती थी और वह जानती थी कि वह जिस परिस्थिति में है उसका ऐसा करना भी एक प्रकार से सही है।
एनि Helen Keller को उनके माता-पिता से दूर ले जाना चाहती थी और इसी विषय में एनि ने Helen Keller के माता पिता से बात करी और उन्हें समझाया कि उसे असहाय और लाचार ना समझे और उसे सीखने के लिए मेरे साथ छोड़ दे।
Helen Keller के माता पिता ने एनि की बात समझी और Helen Keller को परिवार से दूर ले जाने की मंजूरी दे दी।
हेलेन केलर की शिक्षा | Helen Keller’s Education
एनि ने Helen Keller को अनेक तरीकों से शिक्षा दी। Helen Keller को सिखाने के लिए एनि ने मैनुअली अल्फाबेट (manually alphabet) यानी एनि ने अपने हाथ पर पानी का संकेत बनाया फिर उसका हाथ पानी के नीचे ले गई। इसी प्रकार एनि ने हेलन केलर को पूर्ण वाक्य में बात करने योग्य बना दिया।
इन सबके बाद एनि ने Helen Keller के माता-पिता से बात की और उन्हें यह सुझाव दिया कि अब हेलन केलर को नेत्रहीनों के पार्किंन इंस्टिट्यूट में भेज दिया जाए और उन्हें इस शिक्षा से भी अवगत कराया जाए।
एनि का सुझाव सुनने के बाद Helen Keller के माता-पिता ने उन्हें वहां भेज दिया। Helen Keller ने वहां 6 साल तक ब्रेल लिपि सीखी।
Helen Keller अब एक बुद्धिमान युवती बन गई थी हेलन केलर में सीखने और काम करने की जिज्ञासा उत्पन्न हुई। 12 वर्ष की उम्र में वह बोलने लग गई थी।
हेलन केलर में अब सोचने और समझने का एक विशेष गुण उत्पन्न हो चुका था। अब उन्होंने अपने जीवन के लिए अपना लक्ष्य निर्धारित कर लिया था। हेलन केलर ने न्यूयॉर्क के राइट – हमसन स्कूल फॉर डीप में संकेत भाषा सीखी।
सन् 1904 में Helen Keller ने रेडक्लिफ कॉलेज से स्नातक की उपाधि हासिल की। हेलन केलर यहां सामान्य छात्रों के साथ पढ़ती थी यहां पढ़ते पढ़ते ही उनमें लिखने का शौख बढ़ने लगा और वह लिखने लगी।
Helen Keller ने अनेक भाषाएं भी सीखी। जैसे— फ्रेंच, अंग्रेजी, लैटिन, ग्रीक और जर्मन।
अब धीरे-धीरे हेलन केलर की रूचि लिखने में और ज्यादा गहरी होती गई और हेलन केलर ने ब्रेल लिपि में अनेक पुस्तकें लिखी और कई पुस्तकों का अनुवाद भी किया। हेलन केलर ने एक पुस्तक लिखी जिसका नाम “The Story Of My Life” था इनकी यह पुस्तक इतनी प्रसिद्ध और चर्चित रही की उन्होंने उस पुस्तक की आय से एक घर खरीद लिया।
हेलन केलर के संघर्षों का दौर
अपने जीवन में हेलन केलर ने संघर्षों का ऐसा दौर पार किया था जो असहनीय था हेलन केलर ने यह समझ लिया था कि अगर संघर्ष किया जाए तो कोई भी कार्य ऐसा नहीं है जिसे हम कर नहीं सकते। इसी सोच के दम पर हेलेन केलर Helen Keller ने समाज के हित के लिए अनेक कदम उठाएं और वह लोगों को जागरूक करने के लिए निकल पड़ी।
उन्होंने पूरे देश में घूम कर लोगों को अपनी कहानी बताई ताकि वे भी दुखों से लड़ने की प्रेरणा पा सकें उन्होंने महिलाओं के समान अधिकारों के लिए भी आवाज उठाई।
हेलन केलर ने यह सिद्ध कर दिखाया था कि शरीर की अपंगता किसी व्यक्ति को पढ़ने-लिखने, बोलने और खेलने में बाधा उत्पन्न नहीं कर सकती। आलस्य और निराशा के कारण ही कोई व्यक्ति आगे नहीं बढ़ पाता है।
हर एक व्यक्ति जीवन में परिश्रम, लगन और साहस से सफलता प्राप्त कर सकता है।
अब Helen Keller अमेरिकी लेखक थी और उसके साथ शिक्षक और राजनीतिक कार्यकर्ता भी थी।
पुरस्कार एवं सम्मान | Awards and Honors
हेलेन केलर को सन् 1936 में थियोडोर रूजवेल्ट विशिष्ट सेवा पदक से सम्मानित किया गया।
सन् 1964 में उन्हें राष्ट्रपति स्वतंत्रता पदक से सम्मानित किया गया।
सन् 1965 में उन्हें वीमन हॉल ऑफ फेम में चुना गया।
उन्हें स्कॉटलैंड की ग्लासगो यूनिवर्सिटी और जर्मनी की बर्लिन यूनिवर्सिटी और उसके साथ ही भारत के दिल्ली विश्वविद्यालय से मानद डॉक्टरेट की उपाधि भी दी गई।