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 #संक्रांति_का_गणित?मकर संक्रांति वह समय है जब सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इसी दिन से सूर्य क...
15/01/2026

#संक्रांति_का_गणित?
मकर संक्रांति वह समय है जब सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इसी दिन से सूर्य का 'उत्तरायण' सफर शुरू होता है। खगोल विज्ञान के अनुसार, सूर्य देव के राशि परिवर्तन में हर साल 20 मिनट का अंतर होता है। इस तरह अगले तीन साल में सूर्य देव के राशि परिवर्तन पर 1 घंटे का अंतर हो जाता है। ज्योतिष गणना से इस प्रकार 72 साल में संक्रांति तिथि पर एक दिन का अंतर हो जाता है। इसके लिए 72 वर्षों के बाद संक्रांति तिथि एक दिन आगे खिसक जाती है।

12/01/2025

विवेकानंद ने कहा था-
एक #हिंदू_का_धर्मान्तरण एक शत्रु का बढ़ना है1
जो वीतरागी हो, संसार से मुक्त हो, उसके नाम में 'वीर' शब्द जोड़ना कुछ अटपटा लग सकता है। स्वामी विवेकानंद और स्वामी श्रद्धानंद ऐसे दो संन्यासी हुए जिन्हें 'वीर' कहा गया है। क्योंकि उन्हें अपने समय में सन्नाटे की कायरता ओढ़े समाज को झकझोर कर जगाने की निर्भीकता दिखायी और हिन्दू धर्म तथा उसके अनुयायियों की रक्षा की।

हिन्दू धर्म के प्रति क्षमा-भाव रखना गुलाम मानसिकता की देन है। इस देश में लोकतंत्र, संविधान एवं कानून का राज्य, जो सभी नागरिकों को- मत, आस्था, सम्प्रदाय से ऊपर उठकर समान अधिकार देता है, इस कारण चल रहा क्योंकि हिन्दू अभी भी यहां बहुसंख्यक हैं। यदि हिन्दू अल्पसंख्यक होंगे तो हाल वही होगा जो हम पड़ोसी- दो देशों में देखते हैं- जहां अल्पसंख्यकों को पूर्ण नागरिक हक नहीं मिलते।

स्वामी विवेकानंद ने इस बात को पहचाना था और कहा था- एक हिन्दू का धर्मान्तरण केवल एक हिंदू का कम होना नहीं, बल्कि एक शत्रु का बढ़ना है। कश्मीर में हम यही देखते हैं। वहां के मुसलमान, जो कुछ संख्या में अखबारों में विज्ञापन छपवाते कि हिन्दुस्तान के अनपढ़, जाहिल, जादूगरों और सांप-संपेरों के देश को 'सभ्य' बनाने तथा बाइबिल का उपदेश देने के लिए दान दीजिए।



स्वामी विवेकानंद इस क्रूर मजहबी आक्रमण के विरुद्ध निर्भीकता से खड़े हुए और उन्होंने अपने तर्कपूर्ण भाषणों से पश्चिमी समाज को बताया कि पश्चिम के लोगों को यदि कोई मनुष्यता का पाठ पढ़ा सकता है और उनके जीवन में शांति, परोपकार, सद्भाव तथा दूसरे मत के प्रति आदर की भावना ला सकता है तो वह है भारत का हिन्दू धर्म और दर्शन।



स्वामी विवेकानंद के इन शक्तिशाली विचारों का आज भी देश के युवाओं पर गहरा असर है। इसका एक उदाहरण कर्नाटक की सांस्कृतिक राजधानी बेलगावी में प्रदेश के प्रसिद्ध लेखक चक्रवर्ती सुलीबेले द्वारा आयोजित विवेकानंद-निवेदिता साहित्य सम्मेलन है जिसमें हजारों युवाओं ने दो दिन विवेकानंद साहित्य तथा उसके प्रभाव के विभिन्न पक्षों पर चर्चा की। धर्म को राष्ट्रहित से जोड़े बिना राष्ट्रधर्म नहीं बनता। केवल साधना वैसे ही स्वार्थ-साधना बन जाती है जैसे सड़क-पानी-बिजली मात्र को राष्ट्रीयता मानना। दोनों तत्वों का समन्वय राष्ट्रहित एवं राष्ट्रीयता को सार्थक करता है।



स्वामी विवेकानंद ने राष्ट्रहित को ही राष्ट्र-साधना माना और उद्योग एवं कृषि अनुसंधान भी धर्म के दायरे में लाए। विश्व में महापुरुषों की जयंती, पुण्यतिथियां मनाई जाती हैं- समझ में आता है। पर क्या किसी ने किसी भाषण की जयंती- साल दर साल मनाने का चलन देखा है? और अब, जब उस भाषण की 133वीं जयंती दुनिया के विभिन्न हिस्सों में मनाई जा रही हो तो उसी से कल्पना की जा सकती है कि जिस महापुरुष ने वह भाषण दिया था, उनका व्यक्तित्व कैसा रहा होगा। ऐसे थे स्वामी विवेकानंद।



सिर्फ 30 वर्ष की आयु में, बिना साधन, बिना परिचय वे अमेरिका के शिकागो नगर पहुंचे। बहुत दिक्कतें हुईं। दो महीने समुद्री यात्रा के बाद पहुंचे तो सर्दी में पहनने के कपड़े नहीं थे। कार्ड बोर्ड के बक्से में घुसकर रात बितायी। पर उन पर ठाकुर का आशीर्वाद था। रामकृष्ण परमहंस उनके गुरु थे। शिकागो धर्म संसद में बोलना था- पर उसके लिए आवश्यक अनुमति नहीं। पर निश्चय सत्य हो निष्ठा अचल हो तो ईश्वर मदद करता है। कल्पना करिए- सात हजार बुद्धिजीवियों से भरा सभागार। विश्व के महान धर्मों के विख्यात प्रतिनिधि विद्वान मंच पर वक्ता के नाते विराजमान। उनके मुख्य हिन्दू धर्म, दर्शन, वेदांत पर बोलने के लिए 30 वर्षीय युवा संन्यासी।

कितने नर्वस होंगे वे। सरस्वती को मनसा प्रणाम कर उन्होंने पहला वाक्य ही बोला- 'अमेरिका के भाइयों और बहनों- इस एक सम्बोधन से ही सभा में बैठे लोग इतने रोमांचित हो गए कि दो मिनट तक तालियां बजती रहीं- दो मिनट तक। और तालियों की गड़गड़ाहट बंद होने के बाद उन्होंने, भारत, हिन्दू धर्म और भारतीय जन के मन में बसी सहिष्णुता, उदारता, सर्व धर्म समभाव का जो अद्भुत वर्णन किया- केवल सात मिनट में उन्होंने सात युगों का सार बता दिया। विश्व की भारत के प्रति दृष्टि ही बदल गयी।



भारत को जो विदेशी संपेरों, गंवारों, और जादूगरों के तमाशों का देश मानकर तरस खाते थे, हीनता से देखते थे, हमें हीदन और पैगन का देश कहत थे उन्हें लगा कि भारत से उन्हें मनुष्यता सीखनी है, सहिष्णुता सीखनी है, पृथ्वी को बेहतर बनाने वाली उदारता सीखनी है।



यह उद्बोधन भारत की सुप्त आत्मा को जागृत कर गया, धर्म को राष्ट्र के साथ जोड़ गया, विश्व को भारत के प्रति नवीन सभ्य दृष्टि दे गया।



स्वामी विवेकानंद ने गर्व एवं अभियान के साथ हिन्दू धर्म की महानता और गौरव का जो परिचय अमेरिका के सुसंस्कृत समाज को दिया, वह युग परिवर्तनकारी था, अमेरिका में उन्होंने कहा कि मैं यहां आपका धर्म परिवर्तन करने नहीं आया हूं- बल्कि मेथोडिस्ट को बेहतर मेथोडिस्ट, प्रेस्बीटेरियन को बेहतर प्रेस्बीटेरियन बनाने आया हूं- उस सत्य का दर्शन कराने जो सत्य आपके भीतर विद्यमान है।



यह है भारत का विश्व को संदेश। हम किसी को पापी नहीं मानते, बल्कि सबको अमृत का पुत्र और पुत्री मानते हैं। सबमें उस एक सत्य एक ईश्वर का दर्शन करते हैं जो विभिन्न रूपों और नामों से जाना जाता है।



हिंसा, विद्वेष, कलुष, प्रतिशोध से भरे इस विश्व को भारत का सही उत्तर मन का मार्ग समाधान दे सकता है।



वे कुरीतियों, अंधविश्वास तथा मनुष्य के मनुष्य के प्रति भेदभाव पर कठोरतम प्रहार करते थे। उनका स्वदेश मंत्र घर-घर में, हर विद्यालय और संस्थान में रखने, पढ़ने और मनन के योग्य है जिसमें उन्होंने कहा- कि मत भूलो कि दरिद्र, मेहतर, अज्ञानी तुम्हारे रक्त, तुम्हारे भाई हैं- गर्व से बोलो कि मैं भारत वासी हूं और प्रत्येक भारतवासी मेरा भाई है। कितने शक्तिशाली शब्द- कैसा था वो संन्यासी जो सारे भारत को जोड़ गया।



वे कहते थे हर भारतीय स्त्री पुरुष को धनी होना चाहिए। उद्योग लगाओ, उद्योगी बनो- उनका आह्वान था। एक बार वे एक्सप्रेस नामक जहाज में बैठ जापान जा रहे थे। साथ में संयोग से जमशेद जी टाटा भी थे। बातचीत में पता चला वे जापान से माचिस के आयात हेतु जा रहे हैं- स्वामी जी ने कहा- एक पतली सी लकड़ी का बक्सा, बारीक लकड़ियों की तीलियों पर लगा बारूदी मसाला- क्या हम भारत में यह भी नहीं बना सकते? जो भी उद्योग लगाना हो, भारत में ही लगाओ। जमशेद जी टाटा ने उनकी प्रेरणा से भारत में टाटा स्टील का उद्योग लगाया। स्वामी जी ने अल्मोड़ा में भारत का प्रथम कृषि अनुसंधन संस्थान स्थापित करवाया- कृषि वैज्ञानिक प्रो. बोशी सेन ने 4 जुलाई 1924 को कोलकाता में पहले यह संस्थान खोला और नाम रखा विवेकानंद लेबोरेटरी। उसे 1936 में अल्मोड़ा स्थानांतरित किया जो 1959 में उत्तर प्रदेश सरकार को दिया गया तथा 1 अक्टूबर 1974 को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, भारत सरकार (ICAR) ने इसे अपने अंतर्गत लेकर उसका नाम विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान रखा।



संन्यासी का अर्थ स्वामी विवेकानंद ने समझाया।

28/08/2024

मंथन स्कूल, ग्रेटर नोएडा वेस्ट में आयोजित राज्य स्तरीय अबेकस प्रतियोगिता ने युवा प्रतिभाओं की असाधारण गणना क्षमता को उजागर किया। मेघा खुराना द्वारा मंथन स्कूल, ग्रेटर नोएडा वेस्ट में करवाया गया स्मार्ट किड अबेकस (Smart Kid Abacus) प्रतियोगिता में नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद के लगभग 150 छात्रों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। बच्चों ने महज 5 मिनट से भी कम समय में 100 जटिल गणितीय प्रश्नों को हल कर सभी को चौंका दिया। यह प्रदर्शन न केवल उनकी गणितीय कुशलता का प्रमाण था, बल्कि तनाव में काम करने की क्षमता का भी परिचायक था।

विभिन्न श्रेणियों में प्रतिभागियों ने अपना लोहा मनवाया। ग्रेटर नोएडा की प्रज्ञा परिचेता ने श्रेणी A1 में, फलक अग्रवाल ने A4 में, अमोघ ने B1 में, निष्ठा सिन्हा ने B3 में, और आध्या शर्मा ने श्रेणी C में प्रथम स्थान हासिल किया। इसके अलावा, अवि शर्मा और आबिर मुखर्जी ने क्रमशः B4 और B3 श्रेणियों में द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त किए। प्रतियोगिता में केवल शीर्ष स्थान प्राप्त करने वालों को ही नहीं, बल्कि अन्य प्रतिभाशाली बच्चों को भी सम्मानित किया गया। हंसी मनचंदानी, मिश्का अरोड़ा, मृत्युंजय चाहर, दिशा गुप्ता और अर्नव अग्रवाल को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहन पुरस्कार दिए गए।

27/08/2024

#विज्ञान_सिर्फ_फिजिक्स_केमिस्ट्री_और_बायोलॉजी तक सीमित नहीं है. यह बहुत व्यापक विषय है. इसमें कई चीजों की पढ़ाई होती है. अंतरिक्ष में क्या हो रहा है, जीव-जंतु की क्या खासियतें होती हैं, कोई बीमारी कहां से आई, संस्कृति की उत्पत्ति कहां से हुई जैसी अनेक चीजें विज्ञान का ही हिस्सा हैं. अगर आपकी भी साइंस में खास रुचि है और 12वीं के बाद भी इसी की पढ़ाई करना चाहते हैं तो जानिए साइंस की विभिन्न ब्रांचेस में क्या पढ़ाया जाता है.
विज्ञान की शाखाएं

1- न्यूमिस्मैटिक (Numismatic) – सिक्कों का अध्ययन

2- एकोस्टिक्स (Acoustics) – ध्वनि विज्ञान (Science of Sound)

3- एन्टोमोलॉजी (Entomology) – कीट-पतंग संबंधी विज्ञान

4- ओरनिथोलॉजी
(Ornithology) – पक्षी विज्ञान

5- सेरीकल्चर (Sericulture) – रेशम कीट पालन का अध्ययन (study of silkworm rearing)

6- एपीकल्चर (Apiculture) – मधुमक्खी पालन (Bee keeping)

7- हॉर्टीकल्चर (Horticulture) – फलों का उत्पादन

8- फिशरीज साइंस (Fisheries Science) – मत्स्य पालन का अध्ययन

9- माइकोलॉजी (Mycology) – कवकों का अध्ययन (Study of Fungi)

10- फाइकोलॉजी (Phycology) – शैवालों का अध्ययन (Study of Algae. इसे Algology भी कहते हैं.

11- एंथोलॉजी (Anthology) – पुष्पों का अध्ययन (Study of Flowers)

12- पोमोलॉजी (Pomology) – फलों का अध्ययन

13. इक्थियोलॉजी (Ichthyology) – मछलियों का अध्ययन

14- डेंड्रोलॉजी (Dendrology) – वृक्षों और झाड़ियों का अध्ययन

15- ओफियोलॉजी (Ophiology) – सांपों का अध्ययन
16- सॉरोलॉजी (Saurology) – छिपकलियों का अध्ययन

17- सिल्विकल्चर (Silviculture) – काष्ठी पेड़ों का संवर्धन (Cultivation of timber trees)

18- अरबोरिकल्चर (Arboriculture) – वृक्ष उत्पादन संबंधी विज्ञान

19- #आर्कियोलॉजी (Archaelogy) – पुरातत्व संबंधित विज्ञान की शाखा

20- ऑर्थोपेडिक्स (Orthopedics) – अस्थि उपचार का अध्ययन (Bone healing study)

21. इकोलॉजी (Ecology) – जीव व पर्यावरण के बीच पारस्परिक संबंधों का अध्ययन

22- #एथनोलॉजी (Ethnology) – विभिन्न संस्कृतियों का तुलनात्मक अध्ययन

23- #एथनोग्राफी (Ethnography)- किसी विशिष्ट संस्कृति का अध्ययन

24- एग्रोस्टोलॉजी (Agrostology) – घास का अध्ययन

25- एपिग्राफी (Epigraphy) – शिलालेख संबंधी ज्ञान का अध्ययन

26- एस्ट्रोनॉमी (Astronomy) – खगोलीय पिंडों का अध्ययन

27- ओरोलॉजी (Orology) – पर्वतों का अध्ययन

28- ऑप्टिक्स (Optics) – प्रकाश के प्रकार व गुणों का अध्ययन

29- सामाजिक विज्ञान (Social Science)

30- #कार्डियोलॉजी (Cardiology) – हृदय और हृदय प्रणाली के विकारों से संबंधित विज्ञान

27/08/2024

फॉर्मूले से भरी इस मैथ्स पर लिखी शायरी का वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया यूजर्स को खूब पसंद आ रही है, जिस पर वो खूब मौज ल...

शिवकर बापूजी तलपदे एक भारतीय महान विद्वान थे। उन्होंने 1894 में उन्होने मानवरहित विमान का निर्माण किया था वे मुम्बई के न...
23/05/2024

शिवकर बापूजी तलपदे एक भारतीय महान विद्वान थे। उन्होंने 1894 में उन्होने मानवरहित विमान का निर्माण किया था वे मुम्बई के निवासी थे तथा संस्कृत साहित्य एवं चित्रकला के अध्येता थे।
जीवन परिचय उनका जन्म ई. 1864में मुंबई, महाराष्ट्र में हुआ था। ‘जे.जे. स्कूल ऑफ़ आर्ट, मुंबई’ से अध्ययन समाप्त कर वे वहीं शिक्षक नियुक्त हुये। उनके विद्यार्थी काल में गुरू श्री चिरंजीलाल वर्मा से वेद में वर्णित विद्याओं की जानकारी उन्हें मिली। उन्होंने स्वामी दयानन्द सरस्वती कृत ‘ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका’ एवं ‘ऋग्वेद एवं यजुर्वेद भाष्य’ एवं महर्षि भारद्वाज की 'विमान संहिता' का अध्ययन कर प्राचीन भारतीय विमानविद्या पर कार्य करने का निर्णय लिया। इसके लिए उन्होंने संस्कृत सीखकर वैदिक विमानविद्या पर अनुसंधान आरम्भ किया।
शिवकर ने ई. 1922 में एक प्रयोगशाला स्थापित किया और वेदमन्त्रों के आधार पर आधुनिक काल में पहला वैदिक विमान का मॉडल निर्माण किया। इसका परीक्षण सन् 1895 ई. में मुंबई के चौपाटी समुद्र तट पर किया गया था। ऐसा पढनेको मिलता है। परन्तु उपलब्ध प्रमाणों के अनुसार विमान उड़ाने के पहला प्रयास सन् 1894 से सन् 1917 ई. के मध्य में हुआ था। यह कार्य बेंगलुरु के पंडित सुब्राय र. 17 सितम्बर 1917 को उनका स्वर्गवास हुआ एवं ‘मरुत्सखा’ विमान निर्माण का कार्य अधूरा रह गया। मराठी भाषा मे विकिपीडिया मे अलग बात रखी है,वह भी अध्ययन करें।शिवकर बापूजी तलपदे(919-1949) एक शोधकर्ता और संस्कृत ग्रंथों के शौकीन पाठक थे। उन्होंने पहले विमान को उड़ाने का प्रयास किया। विमान का नाम मरुतसखा था।
तलपड़े, जो मुंबई में रहते हैं, को संस्कृत और वेदों के एक विशेषज्ञ पंडित सुबराय शास्त्री का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। एयरोनॉटिक्स ने, विद्वानों द्वारा लिखित, विमान को उड़ान भरने के लिए प्रेरित किया।
इस ऐतिहासिक क्षण के गवाह थे महादेव गोविंद रानडे और तीसरे सयाजीराव गायकवाड़। केसरी अखबार भी इस बात का उल्लेख करता है।
प्रयोग के बाद, विमान को तलपड़े के घर पर रखा गया था? इसके विपरीत, अमेरिकी सेना ने राइट भाइयों को $ 5 देकर उनके प्रयोग में मदद की।
तालापद के काम के आधार पर, फिल्म प्रसारित की गई। फिल्म में तलपदे के चरित्र को बहुत ही गलत तरीके से दर्शाया गया है। इसपर बॉम्बे हाईकोर्ट में एक याचिका भी दायर की गई थी। शिवकर बापूजी तलपड़े द्वारा लिखित प्राचीन विमानन की पुस्तक भी वर्तमान में दुर्लभ है।

22/12/2023

महान भारतीय गणितज्ञ श्रीनिवास राजानुजन की जयंती को हम हर साल राष्ट्रीय गणित दिवस (National Mathematics Day) के तौर पर मनाते हैं। राजानुजन के गणित में किए गए महान योगदानों को समर्पित भारतीय गणित दिवस को हर साल मनाए जाने की घोषणा भारत सरकार ने 26 फरवरी 2012 को की थी। इसके बाद हर साल 22 दिसंबर को उनकी जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय गणित दिवस मनाया जाता है।
भारतीय गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन की जीवन कई आश्चर्यों से भरा हुआ है। रामानुजन ने गणित विषय की कोई औपचारिक पढ़ाई किए बिना ही कई गणितीय सिद्धांतों (Mathematical Theorems) का प्रतिपादन किया। रामानुजन ने मैथमेटिकल एनालिसिस, इंफाइनट सीरीज, फ्रैक्शन, नंबर थ्योरी, आदि जैसे गणित के कठिनतम क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिए हैं।

02/09/2023
चंद्रयान-3 चाँद पर खोजबीन करने के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा भेजा गया तीसरा भारतीय चंद्र मिशन है।इ...
23/08/2023

चंद्रयान-3 चाँद पर खोजबीन करने के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा भेजा गया तीसरा भारतीय चंद्र मिशन है।इसमें चंद्रयान-2 के समान एक लैंडर और एक रोवर है, लेकिन इसमें ऑर्बिटर नहीं है।
यह मिशन चंद्रयान-2 की अगली कड़ी है, क्योंकि पिछला मिशन सफलता पूर्वक चाँद की कक्षा में प्रवेश करने के बाद अंतिम समय में मार्गदर्शन सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी के कारण सॉफ्ट लैंडिंग में विफल हो गया था, सॉफ्ट लैंडिंग का पुनः सफल प्रयास करने हेतु इस नए चंद्र मिशन को प्रस्तावित किया गया था।

चंद्रयान-3 का लॉन्च सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (शार), श्रीहरिकोटा से 14 जुलाई, 2023 शुक्रवार को भारतीय समय अनुसार दोपहर 2:35 बजे हुआ था। यह यान चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास की सतह पर 23 अगस्त 2023 को भारतीय समय अनुसार सायं 06:04 बजे के आसपास सफलतापूर्वक उतर चुका है। इसी के साथ भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफलतापूर्वक अंतरिक्ष यान उतारने वाला पहला और चंद्रमा पर उतरने वाला चौथा देश बन गया।
चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग की काबिलियत प्रदर्शित करने के लिए चंद्रयान कार्यक्रम के दूसरे चरण में, इसरो ने एक ऑर्बिटर, एक लैंडर और एक रोवर से युक्त लॉन्च वाहन मार्क -3 (एलवीएम 3) नामक लॉन्च वाहन पर चंद्रयान-2 लॉन्च किया।प्रज्ञान रोवर को तैनात करने के लिए लैंडर को सितंबर, 2019 को चंद्र सतह पर टचडाउन करना था। इससे पहले चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर एक मिशन पर जापान के साथ सहयोग के बारे में रिपोर्टें सामने आई थीं, जहां भारत लैंडर प्रदान करता जबकि जापान लॉन्चर और रोवर दोनों प्रदान करने वाला था। मिशन में साइट सैंपलिंग और चाँद पर रात के समय सर्वाइव करने की टेक्नोलॉजी शामिल करने की भी संभावनाएँ थीं।
विक्रम लैंडर की बाद की विफलता के कारण 2025 के लिए जापान के साथ साझेदारी में प्रस्तावित चंद्र ध्रुवीय खोजबीन मिशन (LUPEX) के लिए आवश्यक लैंडिंग क्षमताओं को प्रदर्शित करने के लिए एक और मिशन (चंद्रयान-3) करने का प्रस्ताव दिया गया। मिशन के महत्वपूर्ण फ्लाइट ऑपरेशन के दौरान, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) द्वारा संचालित यूरोपीय अंतरिक्ष ट्रैकिंग (एस्ट्रैक) एक अनुबंध के अंतर्गत इस मिशन को सपोर्ट प्रदान करेगी। चंद्रयान-3 को 14 जुलाई 2023 शुक्रवार को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से दोपहर 2:35 मिनट पर लॉन्च किया गया।

महान गणितज्ञ 0 की खोज करने वाले आर्यभट्ट जी की जयंती पर शत शत नमन
14/04/2023

महान गणितज्ञ 0 की खोज करने वाले आर्यभट्ट जी की जयंती पर शत शत नमन

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