05/02/2025
रहें न रहें हम, महका करेंगे.....
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फिर भारत भूमि पर ही जन्म लेना आई...और हमारी आने वाली पीढ़ियों को एक और याद दे जाना..!
रहें ना रहें हम, महका करेंगे बन के कली, बन के सबा, बाग़े वफ़ा में ...
रहें ना रहें हम...
मौसम कोई हो इस चमन में रंग बनके रहेंगे हम खिरामां
चाहत की खुशबू, यूँ ही ज़ुल्फ़ों से उड़ेगी, खिज़ा हों या बहारां
यूँ ही झूमते, यूँ ही झूमते और खिलते रहेंगे
बन के कली, बन के सबा, बाग़े वफ़ा में ...
रहें ना रहें हम...
खोये हम ऐसे क्या है मिलना क्या बिछड़ना नहीं है याद हमको
गुंचे में दिल के जब से आये सिर्फ़ दिल की ज़मीं है याद हमको
इसी सरज़मीं, इसी सरज़मीं पे हम तो रहेंगे,
बन के कली, बन के सबा, बाग़े वफ़ा में ...
रहें ना रहें हम...
जब हम न होंगे तब हमारी खाक पे तुम रुकोगे चलते, चलते
अश्कों से भीगी चांदनी में इक सदा सी सुनोगे चलते, चलते
वहीं पे कहीं, वहीं पे कहीं हम तुमसे मिलेंगे
बन के कली, बन के सबा, बाग़े वफ़ा में ...
रहें ना रहें हम...
रहें ना रहें हम, महका करेंगे बन के कली, बन के सबा, बाग़े वफ़ा में ...
रहें ना रहें हम...
Prashant Dwivedi