24/12/2025
दयार-ए-इल्म — जहाँ इल्म की रोशनी से ज़ेहनों के चिराग़ रोशन होते हैं
दयार-ए-इल्म सिर्फ़ एक लाइब्रेरी नहीं, बल्कि इल्म की वो सरज़मीन है जिसको हमने 2019 में सोचा था और इसी ख़ूबसूरत सोच के साथ और अच्छी नियत के साथ काम करने के ठाना था और अल्हमदुलिल्लाह तबरेज़ साहब का साथ मिला और वक़्त, मेहनत और सब्र के लंबे सफ़र के बाद यह ख़्वाब 24 दिसंबर 2023 को मुकम्मल हुआ। यहाँ किताबें सिर्फ़ अलमारियों में सजी नहीं, बल्कि ज़ेहनों को रोशन करने और सोच को नई उड़ान देने का ज़रिया बनीं। दयार-ए-इल्म ने बहुत कम वक़्त में तलबा और नौजवानों के दिलों में इल्म की मोहब्बत पैदा की है। यह सिर्फ़ एक इमारत नहीं, बल्कि आने वाली नस्लों के लिए इल्म, तहज़ीब और रहनुमाई का एक रौशन मीनार है।पूरे गाँव के लोगों का ज़िंदगी भर के किए शुक्रगुज़ार रहूँगा ,आप हम और सब लोगों की मेहनत से ये लाइब्रेरी अपने वजूद में आई उसिया के सभी लागों को मेरा सलाम ।
उट्ठो मेरी दुनिया के ग़रीबों को जगा दो
ख़ाक-ए-उमरा के दर-ओ-दीवार हिला दो
अल्लामा इक़बाल
Photography by Md Jawed Ali