20/08/2025
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🐾 सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मेरी यह भावना सही लगे तो शेयर करना 🐾
सदियों से इंसान और कुत्तों का रिश्ता विश्वास और साथ का रहा है।
कभी वफ़ादारी की मिसाल बने, कभी रात-दिन पहरेदारी कर इंसान की रक्षा की।
गली-मोहल्लों में यही मासूम कुत्ते बच्चों के साथी बने, कई बार तो भूखे रहकर भी इंसानों के टुकड़ों पर जिए।
फिर अब अचानक ऐसा क्या हो गया कि वही वफ़ादार दोस्त खतरा बन गए?
👉 अगर खतरा है तो वह सबसे ज़्यादा महंगे हाईब्रीड कुत्तों से है, जो नेताओं और रसूखदारों के घरों में पलते हैं।
लेकिन वहाँ कोई हाथ नहीं डालता।
हटाए जाएंगे तो केवल वही मासूम गली के कुत्ते, जिनका कोई मालिक नहीं, जिनकी कोई पैरवी करने वाला नहीं।
क्या इंसाफ़ अब सिर्फ़ अमीरों की चौखट तक सीमित रह गया है?
क्या गरीबों के साथी, मोहल्लों की पहचान, हमारी सड़कों के रक्षक इन मासूम जानवरों का कोई अस्तित्व ही नहीं?
आज फैसला देखकर ऐसा लगता है मानो अमीरों के कुत्ते "पालतू" हैं और गरीबों के कुत्ते "मुसीबत"।
जबकि सच यह है कि गली के यही कुत्ते सदियों से हमारे साथी रहे हैं, और रहेंगे।
⚖️ इंसाफ़ अगर होना है, तो बराबरी से हो।
क्योंकि जानवर का कसूर अमीरी-गरीबी देखकर तय नहीं किया जा सकता।