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02/04/2026

‘पोषण ट्रैकर’ डिजिटल एप्लिकेशन को आंगनवाड़ी केंद्रों (एडब्ल्यूसी), आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं (एडब्ल्यूडब्ल्यू) और लाभार्थियों की सभी गतिविधियों की निगरानी और ट्रैकिंग के लिए एक सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी आधारित शासन उपकरण के रूप में शुरू किया गया है। इससे आंगनवाड़ी सेवाओं के लिए लगभग वास्तविक समय में डेटा संग्रहण मुमकिन हो गया है। योजना के तहत प्रदान किए जाने वाले लाभों (पूरक पोषण) की वास्तविक/इच्छित लाभार्थी तक पहुंच, लाभों के दोहराव और गड़बड़ी के जोखिम को दूर करने और योजना को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए, मंत्रालय ने अगस्त 2024 में चेहरा पहचान प्रणाली (एफआरएस) शुरू की। एफआरएस को 6 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों, यानी आंध्र प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, ओडिशा, उत्तर प्रदेश और चंडीगढ़ में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया गया था। इसके बाद, एफआरएस को दिसंबर 2024 में अखिल भारतीय स्तर पर लागू किया गया, जिसमें एफआरएस के बिना भी पूरक पोषण वितरित करने का विकल्प शामिल है। एफआरएस के लिए लाभार्थियों को जोड़ने की पूरी प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से की जा रही है। चेहरे की पहचान प्रणाली (एफआरएस) यह सुनिश्चित कर रही है कि लाभ केवल आवेदन में पंजीकृत लक्षित लाभार्थियों को ही मिले।

इसके अलावा, मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 के तहत पंजीकृत 6 वर्ष तक के बच्चों के लिए ई-केवाईसी/एफआरएस कराना ज़रुरी नहीं है। बच्चों की ओर से माता, पिता या कोई भी अभिभावक, ई-केवाईसी/एफआरएस कराकर टीएचआर प्राप्त कर सकते हैं। एफआरएस एक ऐसी तकनीक है, जिसके लिए आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को कोई अतिरिक्त उपकरण/डिवाइस देने की ज़रुरत नहीं है। इसे मौजूदा पोषण ट्रैकर एप्लिकेशन में एक सुविधा के रूप में शामिल किया गया है। इसके अलावा, आधार आधारित ट्रैकिंग से लाभार्थियों की सही पहचान सुनिश्चित हुई है और डेटा लीक को रोकने में मदद मिल रही है।

लाभार्थियों के बायोमेट्रिक विवरणों के संग्रह की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं (एडब्ल्यूडब्ल्यू) के ज़रिए नामांकन से पहले विशेष सहमति ली जाती है। निजी डेटा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है, यह केवल सत्यापन उद्देश्यों के लिए अधिकृत कर्मियों के लिए ही उपलब्ध है। दुरुपयोग को रोकने के लिए पहुंच भूमिका-आधारित है, लॉग की जाती है और निगरानी की जाती है। एफआरएस शुरू करने से पहले डेटा गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए अतिरिक्त उपाय इस प्रकार हैं:

1. चेहरे की पुष्टि से संबंधित सभी अनुरोध और प्रतिक्रियाएँ ट्रांसमिशन के दौरान एन्क्रिप्टेड होती हैं, जिससे डेटा को अवरोधन या छेड़छाड़ से सुरक्षित रखा जाता है।

2. मोबाइल एप्लिकेशन का आंतरिक डेटाबेस एन्क्रिप्टेड है, जिससे ऐप के के तहत जमा की गई संवेदनशील जानकारी को बाहर पहुंचने से रोका जा सकता है।

3. सुरक्षित प्रोसेसिंग और ट्रांसमिशन के लिए ऐप के भीतर चेहरे की छवियों को बेस64 एन्कोडेड प्रारूप में संसाधित किया जाता है।

4. आंगनवाड़ी कार्यकर्ता (एडब्ल्यूडब्ल्यू) को चेहरे के मिलान के लिए उपलब्ध कराई गई व्यक्तिगत तस्वीरों की प्रतिलिपि नहीं बनाई जा सकती।

5. डिवाइस पर कोई भी छवि या डेटा स्थायी रूप से संग्रहित नहीं किया जाता है। एहतियात के तौर पर, एडब्ल्यूडब्ल्यू के एप्लिकेशन से लॉग आउट करने पर सभी कैश्ड या अस्थायी डेटा स्वचालित रूप से मिटा दिया जाता है।

6. वार्षिक सुरक्षा ऑडिट का अनुपालन हर साल किया जाता है, 2025 के लिए सुरक्षा ऑडिट अक्टूबर 2025 तक सर्ट-इन पैनल में शामिल एजेंसी के ज़रिए पूरा कर लिया गया है।



पोषण ट्रैकर एप्लिकेशन के एफआरएस डेटा के अनुसार, फरवरी 2026 में एफआरएस के माध्यम से टीएचआर वितरण के लिए कुल 4,77,88,108 पात्र लाभार्थियों की पहचान की गई थी। इनमें से 97.01% लाभार्थियों के लिए ई-केवाईसी और फेस मैचिंग सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी है।

राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रभाग (एनईजीडी) द्वारा राज्य समन्वयकों के ज़रिए आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को एफआरएस पर नियमित प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। प्रशिक्षण वीडियो भी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ साझा किए जाते हैं, ताकि उनका प्रशिक्षण बेहतर हो सके। इसके अलावा, पोषण भी पढ़ाई भी (पीबीपीबी) योजना के तहत, सावित्रीबाई फुले राष्ट्रीय महिला एवं बाल विकास संस्थान (एसपीएनआईडब्ल्यूसीडी, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय) द्वारा राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स (एसएलएमटी) को प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जो बाद में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को जमीनी स्तर पर प्रशिक्षित करते हैं। 18.03.2026 तक, पहले चरण में 41645 राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स (एसएलएमटी) और दूसरे चरण में 3901 एसएलएमटी को प्रशिक्षित किया जा चुका है। ब्लॉक और जिला समन्वयक पोषण ट्रैकर के प्रभावी उपयोग और तकनीकी समस्याओं के समाधान के लिए आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और और पर्यवेक्षकों को जमीनी स्तर पर सहायता प्रदान करते हैं।

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