05/12/2020
भारत में आजकल लगातार ऐसे आंदोलन देखने में आ रहे हैं जहाँ किराए के लोगों से बड़े बड़े आंदोलन करके दंगे करवाए जाते हैं।
महिलाएं हो या पुरुष, युवा लड़के लड़कियां सब उपलब्ध हैं।
दंगे करवाने वाला माहौल पैदा कर दिया जाता है और फिर होता है सरकारी, गैर सरकारी संपत्तियों का नुकसान, जिसमें केवल थोड़ा नुकसान नहीं बल्कि संपत्ति जलाना राष्ट्रीय अधिकार बन गया है।
कुछ दिनों पहले एक ऐसी रिपोर्ट आयी –
नागरिकता संशोधन कानून( CAA) के खिलाफ देश की राजधानी दिल्ली में हुई हिंसा पर बड़ा खुलासा हुआ है।
दिल्ली पुलिस खुलासा दिल्ली दंगो के सबसे बड़े मास्टरमाइंड उमर खालिद और पथराव करने वाली महिलाओं से जुड़ा है।
दिल्ली पुलिस स्पैशल सेल की चार्ज शीट में खुलासा हुआ है कि दिल्ली दंगो में करीब 300 बंगाली भाषा बोलने वाली महिलाओं का इस्तेमाल किया गया था जिन्हें दिल्ली के जहांगीरपुरी से जाफराबाद में CAA के विरुद्ध प्रदर्शन करने के लिए बुलाया गया था।
इन महिलाओं को बस का किराया दिल्ली दंगो की योजना बनाने वाली गैंग ने दिया गया था।
दिल्ली दंगों के दौरान बंगाली बोलने वाली इन महिलाओं को 7 बसों में बैठाकर जहांगीरपुरी से जाफराबाद लाया गया था।
दिल्ली पुलिस की चार्जशीट के मुताबिक 23 फरवरी को पहले इन्हें बसों से शाहीन बाग में प्रदर्शन साइट पर ले जाया गया था, वहाँ इन महिलाओं को खाना भी खिलाया गया था।
इसके बाद इन्हें जाफराबाद प्रदर्शन साइट पर ले जाया गया था।
बता दें कि इन्हीं महिलाओं में से ज्यादातर ने एंटी CAA प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस पर पथराव किया।
इनमें से अधिकतर महिलाएं बुर्के में थीं।
इन्हीं महिलाओं के ग्रुप ने दिल्ली पुलिस के DCP अमित शर्मा, ACP अनुज और हेड कांस्टेबल रतन लाल पर भी हमला किया।
अब दिल्ली पुलिस ने इन 300 महिलाओं में से ज्यादातर की पहचान कर ली है।
पुलिस इनके खिलाफ जल्द बड़ी कार्रवाई करेगी।
अब ऐसी ही कुछ बातें दिल्ली के निकट किसान आंदोलन को लेकर आ रही है।
आंदोलन के पीछे अंतरराष्ट्रीय साजिश का संदेह बेवजह नहीं है। जिस तरह इसमें इस्लामी संगठन पीएफआई , खालिस्तानी, नक्सलवाद समर्थक संगठनों की सक्रियता दिखाई दे रही है वह किसी बड़ी साजिश की तरफ इशारा कर रही है।
ये सच में किसान हैं क्या?
क्योंकि इनमें से बहुत सारे लोग, सैकड़ों लोगों की मौत के जिम्मेदार आतंकवादी भिंडरावाले के फोटो के साथ प्रदर्शन कर रहे हैं।
किसान आंदोलन में शामिल लोगों का जो रवैया है, वह चौंकाने वाला है।
उनके तेवरों में देश विरोध साफ तौर पर दिखाई दे रहा है.
कुछ खालिस्तानी आतंकी किसान हैं जो खुलेआम टीवी पर कैमरे पर बोल रहे थे कि उधम सिंह ने विदेश जाकर गोरों को ठोका तो दिल्ली तो यहीं है, इंदिरा को ठोका मोदी को भी ठोक देंगे।
"कनाडा की धरती पर जाकर ठोक सकते हैं, दिल्ली क्या चीज़ है... इंदिरा ठोक दी... मोदी....
"हमने तो इंदिरा गाँधी को ठोक दिया था, मोदी किस खेत की मूली है!
मोदी तेरी कब्र खुदेगी, आज नहीं तो कल खुदेगी" "खट्टर तेरी कब्र खुदेगी, आज नहीं तो कल खुदेगी!
इस तथाकथित किसान आंदोलन के प्रदर्शनकारी क्या कह रहे हैं – ''हम भारत माता की जय नहीं बोलेंगे। हम नारे इस्लाम के, सिख धर्म के और ईसाई धर्म के लगाएंगे।
भारत माता की जय मोदी बोलेगा, भागवत बोलेगा।''
एक सिक्ख प्रदर्शनकारी कहता है कि "इमरान हमारा भाई है, दुश्मन दिल्ली में बैठा है।"
इसके साथ "यूनाइटेड अगेंस्ट हेट" नाम का यह मजहबी कट्टरपंथियों का जिहादी संगठन किसानों की मदद के नाम पर सामने आया है।
CAA विरोध और किसान आंदोलन की समानताएं देखने को मिल रही हैं जिसमे विदेशी फंडिंग, विदेशी सहायता देखने को मिल रही है।
भारत में किसान को अन्नदाता कहा जाता है और किसान को यदि वास्तव में किसान बिल से समस्या है तो वो कभी भी देश विरोधी नारे नहीं लगाएंगे।
देश के सभी नागरिक देश की खुशहाली, विकास का सोचते हैं न कि देश की बर्बादी का।
समस्याओं का हल बातचीत से निकलता है तोड़फोड़ व देश विरोधी गतिविधियों से नहीं... इसलिए पंजाब, राजस्थान राज्यों के साथ देश के सभी राज्यों के किसानों को देखना चाहिए कि उनकी आड़ में कोई राष्ट्रविरोधी ताकतें तो सक्रिय नहीं हो रही हैं।...
क्योंकि पिछले कुछ समय से देश में देश विरोधी घटनाएं बहुत सामने आ रही हैं जो देश के दुश्मनों द्वारा यानि विदेशों से प्रयोजित हो रहीं हैं।
बाकी निवेदन एक ही कि ढोंगियों के चक्कर मे वास्तविक किसानों को और खालिस्तानियों के चक्कर में सिक्खों को न गरियाईये।
शरद सिंह जी की कलम से