10/10/2026
आईआईएम बोधगया के चार शिक्षाविद विश्व के शीर्ष 2% वैज्ञानिकों में शामिल, बिहार का बढ़ाया मान
गया। भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) बोधगया ने अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक जगत में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की है। संस्थान के चार शिक्षाविदों डॉ. अविरल कुमार तिवारी, डॉ. रोहित अग्रवाल, डॉ. रघुनाथन कृष्णकुमार और डॉ. सुनील तिवारी को विश्व के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों की प्रतिष्ठित सूची में जगह मिली है। इन शिक्षाविदों की उपलब्धि से संस्थान की प्रतिष्ठा बढ़ने के साथ-साथ बिहार का गौरव भी बढ़ा है।
यह उपलब्धि आईआईएम बोधगया में हो रहे गुणवत्तापूर्ण शोध और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसके बढ़ते प्रभाव को दर्शाती है। चार अलग-अलग शोध क्षेत्रों में इन शिक्षाविदों की पहचान इस बात का प्रमाण है कि संस्थान के शोधकर्ता ज्ञान-विज्ञान के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
स्टैनफोर्ड और एल्सेवियर की प्रतिष्ठित सूची में मिली जगह
विश्व के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों की यह सूची स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं और एल्सेवियर के सहयोग से तैयार किए जाने वाले डेटाबेस पर आधारित है। इसमें वैज्ञानिकों के शोध कार्यों और उनके अकादमिक प्रभाव का मूल्यांकन विभिन्न मानकों के आधार पर किया जाता है।
इस मूल्यांकन में शोध-पत्रों को मिलने वाले उद्धरण (Citations), एच-इंडेक्स, सह-लेखकों के साथ किए गए शोध का प्रभाव और कुल उद्धरण जैसे मानकों को ध्यान में रखा जाता है। इस डेटाबेस में वैज्ञानिकों के संपूर्ण अकादमिक करियर के साथ-साथ किसी विशेष वर्ष में उनके शोध के प्रभाव का भी अलग-अलग आकलन किया जाता है। इसके लिए स्कोपस (Scopus) के शोध संबंधी आंकड़ों का उपयोग किया जाता है।
अलग-अलग शोध क्षेत्रों में शिक्षाविदों की उपलब्धि
डॉ. अविरल कुमार तिवारी: अर्थशास्त्र के क्षेत्र में 47वां स्थान
डॉ. अविरल कुमार तिवारी ने अर्थशास्त्र एवं व्यवसाय के अंतर्गत अर्थशास्त्र के क्षेत्र में विश्व स्तर पर 47वां स्थान हासिल किया है। ऊर्जा अर्थशास्त्र, पर्यावरणीय अर्थशास्त्र, समष्टि अर्थशास्त्र और आर्थिक विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर उनके शोध कार्यों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। उनके शोध क्षेत्र वर्तमान आर्थिक चुनौतियों और विकास से जुड़े विषयों के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
डॉ. रोहित अग्रवाल: व्यवसाय एवं प्रबंधन में 437वां स्थान
डॉ. रोहित अग्रवाल ने व्यवसाय एवं प्रबंधन के क्षेत्र में विश्व स्तर पर 437वां स्थान प्राप्त किया है। व्यवसाय, सतत विकास, प्रौद्योगिकी और प्रबंधन से संबंधित उनके शोध कार्यों को इस प्रतिष्ठित सूची में शामिल किया गया है। उनके शोध क्षेत्र आधुनिक व्यावसायिक गतिविधियों, प्रबंधन की बदलती चुनौतियों और टिकाऊ विकास की अवधारणाओं से जुड़े हैं।
डॉ. सुनील तिवारी: पर्यावरण विज्ञान में 947वां स्थान
डॉ. सुनील तिवारी ने पर्यावरण विज्ञान के क्षेत्र में विश्व स्तर पर 947वां स्थान प्राप्त कर अपनी अकादमिक पहचान मजबूत की है। पर्यावरण से संबंधित उनके शोध कार्यों को इस सूची में स्थान मिला है। पर्यावरण संरक्षण और उससे जुड़े वैज्ञानिक अध्ययन आज वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण विषय हैं।
डॉ. रघुनाथन कृष्णकुमार: एआई और इमेज प्रोसेसिंग में 5810वां स्थान
डॉ. रघुनाथन कृष्णकुमार ने एआई और इमेज प्रोसेसिंग के क्षेत्र में विश्व स्तर पर 5810वां स्थान हासिल किया है। डिसीजन साइंसेज, सॉफ्ट कंप्यूटिंग और मल्टी-क्राइटेरिया डिसीजन मेकिंग से संबंधित उनके शोध कार्यों को इस सूची में जगह मिली है। ये क्षेत्र कृत्रिम बुद्धिमत्ता, तकनीकी विश्लेषण और जटिल परिस्थितियों में बेहतर निर्णय लेने की प्रक्रियाओं से जुड़े हैं।
शोध और नवाचार के क्षेत्र में बढ़ती पहचान
आईआईएम बोधगया के चार शिक्षाविदों का इस प्रतिष्ठित सूची में शामिल होना संस्थान की शोध क्षमता, अकादमिक गुणवत्ता और विभिन्न विषयों में हो रहे अनुसंधान की व्यापकता को रेखांकित करता है। अर्थशास्त्र, प्रबंधन, पर्यावरण विज्ञान और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में मिली यह उपलब्धि संस्थान की बहुआयामी शोध गतिविधियों को भी सामने लाती है।
आज के दौर में किसी शैक्षणिक संस्थान की पहचान केवल उसके शिक्षण कार्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके शोध की गुणवत्ता, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसके प्रभाव और समाज के लिए उपयोगी ज्ञान के सृजन से भी तय होती है। ऐसे में आईआईएम बोधगया के चार शिक्षाविदों की यह उपलब्धि संस्थान के लिए विशेष महत्व रखती है।
यह सफलता न केवल आईआईएम बोधगया की शैक्षणिक प्रतिष्ठा को मजबूत करती है, बल्कि बिहार में उच्च शिक्षा, शोध और नवाचार की संभावनाओं को भी उजागर करती है। चारों शिक्षाविदों का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान हासिल करना राज्य के शैक्षणिक विकास के लिए एक सकारात्मक उपलब्धि है।