18/09/2020
यदुवंश के संस्थापक महाराज यदु के वंशजों को क्यों कहा जाता है गोप?जानिए कहा है असली यदुवंशी गोप--चंद्रवंशी चक्रवर्ती सम्राट महाराजा ययाति के जेष्ठ पुत्र यदु के वंशजो को यादव या यदुवंशी कहा जाता है।
जब महाराज यदु ने विशाल सर्प का दमन किया तो अभीर अतार्थ अहीर कहलाए,प्राचीन काल में जिसके पास सबसे ज्यादा गौ धन होता था उनका राज्य को समृद्ध माना जाता था महाराज यदु के पास दस लाख गाय थी,ऋग्वेद के 10 मंडल के 62 वे अध्याय में 10 वे श्लोक में यदु महाराज को "गोप" कहा गया है।इसके साथ ही अन्य पुराणों में भी इनके वंशजो को गोप ही कहा गया है, जैसे की भागवत पुराण में महाराज वासुदेव और महाराज नंद को गोप कहा गया है,तथा राधा रानी के पिता वृषभानु गोप से ले कर सभी मथुरा ब्रज वासी को भी गोप कहा गया है और महाभारत में नारायणी सेना के सभी यादवो को गोप कहा गया है।यादवो की कुलदेवी और नंद बाबा की बेटी माँ विंध्यावासिनी भी गोपी(अहीरानी) थी
गोप शब्द का अर्थ होता है राजा या कहे तो इलाके का ठाकुर,मुखिया,चौधरी।गोप का एक अर्थ अधिक गौ धन वाला या गौ रक्षक भी होता
#गर्गसंहिता में #गर्ग_ऋषि लिखते हैं:-
'परा न विदिता भूवि गोप जात:'
अर्थ:- #गोप(यादव) जाति से बढ़कर #पृथ्वी पर कोई पैदा हुआ ही नहीं।हिन्दू जाति में #अहीर एक ऐसी जाति है,जिसमें आज भी आर्यों का पवित्र खून प्रवाहित होता है ।
यादव गोप अहीर गोपाल जैसे शब्दों को एक दूसरे का पर्यावाची कहा जाता है। वैसे तो गोप सभी यदुवंशियो की पदवी है पर सरकारी दस्तावेजो के अनुसार बिहार बंगाल के #कृष्णोत(वृष्णिवंशी), #मधुरौत(मधुवंशी), #भोजवंशी और #सदगोप गोत्र के यदुवंशी अभीरों को गोप कहा गया है और यह यादव बड़े पैमाने पर बिहार बंगाल में जमींदार और रियासतदार रहे है,और इन यदुवंशी क्षत्रियो के पास हजारो साल पुराने यदुवंशी क्षत्रिय,अभीर गोप होने के दस्तवजे है।
गोप यादव बड़े पैमाने पर जमींदार रियास्तदार रहे है,शरिर से भी काफ बलिष्ठत होते है कुश्ती और तलवार बाजी का जबरदस्त शौक होता इन्हें,पुराने समय में इनके सबसे कुशल योद्धा में से एक माना जाता और वैदिक क्षत्रिय का दर्जा प्राप्त था।
दानासुर का अंत कर नेपाल में भगवान श्री कृष्ण ने यदुवँश की पताका स्थापित की थी और अपने ही एक पुत्र और नारायणी सेना के यादवो को नेपाल में बसा दिया था,जिन्होंनो नेपाल अभीर राजवँश की स्थापना की इसी राजवँश में आगे चलकर जन्म हुआ आभिरपति महाराजा भक्तमान सिंह गुप्त(गोप) का, जिन्होंने सर्वप्रथम सिंह औ गुप्त (गोप) उपाधि धारण की,गुप्त शब्द गोप शब्द को ही नेपाली भाषा में कहते है,अगर आप इतिहास के अच्छे जानकार है तो आपको यह अछे से मालुम होगा पुरे भारत पर राज करने वाले गुप्त राजवँश भी वृष्णि वंशी गोप यादव थे जी हां नेपाल के ही राजा आभिरपति महाराजा भक्तमान सिंह गुप्त(गोप) के वंशज बिहार जा कर बस गए थे और गुप्तवंश की नींव डाली थी,यदुकूल शिरोमणि वीर अहीर लोरीक देव की जीवनी में भी समुद्रगुप्त को अहीर जाती का होने वर्णन है,अगर आप उत्तर भारत से है तो आपने यदुवँश शिरोमणि वीर अहिर लोरीक का नाम जरूर सुना होगा, वीर लोरीक देव भोजवंशी यादव थे जो बाद में वीर लोरीक देव के वंशज ही यूपी के बलिया से माइग्रेट कर बिहार में बस गए,बंगाल ग्रेजेटियर में बिहार में भोजवँशी यादवो का होने का वर्णन है पर समय के साथ वीर लोरीक देव के वंशज भोजवंशी यादव कृष्णोत (वृष्णि) और मधुरौत (मधु) गोत्र के यादवो में विलय हो गए।
बंगाल के Durgapur Midnapore Bardhawan और birbhum के जिलो को गोप भूमि या गोपगढ़ के नाम से भी जाना जाता है,जहाँ गोप यादवो के नारजोल,गुस्खरा,दुर्गापुर जैसे बड़े बड़े राजवँश रहे है जिनका धाक आज भी उन इलाके में कायम है,दुर्गापुर के ही सदगोप यादव महाराजा हरिवंश नारायण यदुवंशी ने बंगाल में अंग्रेजो के खिलाफ युद्धघोष का ऐलान किया था और वीरगती को युद्ध करते वे प्राप्त हो गए थे,बिहार की बात करे तो मधेपुरा,मधुबनी पूर्णिया के इलाको को यादव लैंड या गोप भूमि के नाम से जाना जाता है जहाँ नजरगंज,मुरहो,रानीपट्टी जैसे मधुवंशी गोप यादवो के रजवाड़े रहे है।महाराज मधु यादव के वंशज होने के कारण यह मधुरौत या मथुरौत कहलाए, देश के सबसे बड़े यादव राजवँश में से एक नजरगंज रियासत भी इनकी देन है जहाँ महाराजा मोहन लाल यादव जैसे वीरो ने जन्म लिया,नजरगंज राजवँश की धाक पुरे देश में थी इस राजवँश के राजा चौधरी पृथ्वी लाल चंद्र यादव ने देश के लिए अनेको trophies जीते,और all इंडिया यादव महासभा का आयोजन करवाया,इस राजवँश के पास दार्जिलिंग में में फ्लॉवर जैसे बड़े होटल रिजॉर्ट है तथा विदेशों में भी इनके कई आलिशान होटल है।
इनके अलावा बिहार में गोप यादवो के परसादी,गोलकपुर,हाथी जमींदारी,लंगोई,बेलवरगंज,खुशरहुपुर इत्यादि जैसे बड़े बड़े जमींदारी और रियासते रहे है,बांका के जमींदार अमर शहीद चौधरी महेन्द्र गोप का नाम तो अंग्रेजो के संसद में गूंजा था जिन्होंनो बांका बिहार में अंग्रेजो के विरुद्ध क्रान्ति की बिगुल बजाई थी और 5 सालो तक अंग्रेजो को भाड़ी टक्कर दी और कई हजारो अंग्रेजी सैनिको को मौत के घाट उतार दिया था।दानापुर(बिहार) रेजिमेंन्ट में भी सबसे ज्यादा गोप यादव ही भर्ती होते थे जिंहोने विश्व युद्ध और कारगिल जैसे खतरनाक युद्ध लड़े,दानापुर रेजिमेंन्ट में ही कृष्णोत गोत्रीय यादव जमींदार और सेनापति कुंवर रंजीत सिंह यादव ने क्रन्तिकारी बाबु कुँवर सिंह की सेना का नेतृत्व किया था और बाबू कुंवर सिंह के मृतुयु के बाद भी संघर्ष जारी रखा परन्तु क्षल से अंग्रेजो ने इन्हें बंदी बना लिया था और काला पानी की सजा दी थी।
सन 1911 में यदुवंशी क्षत्रिय समाज को संगठित करने के लिए बिहार के मधुरौत और कृष्णोत गोत्र के यदुवंशी क्षत्रीय जमींदारों ने राजा रास बिहारी मंडल,दामोदर राय,स्वयंवबर दास जी रईस एवं अन्य यदुवंशी ज़मीदारों के संग मिलकर और नज़रगंज प्रिंसली स्टेट पूर्णीया के यदुवंशी महाराजा चौधरी पृथ्वी लाल चंद्र यादव और रेवाड़ी नरेश राजा राव बलबीर सिंह बहादुर के कुशर नेतृत्व में बिहार में "क्षत्रिय यदुवंशी गोप महासभा" का गठन किया फिर सन 1925 में पूर्णिया और रेवाड़ी में all india yadav mahasabha का आयोजन भी करवाया।
राजनीती की बात करे तो गोप यादव राजनीती में अवल है,परसादी स्टेट के कृष्णोत गोत्रीय यादव जमींदार दरोगा प्रसाद राय और मुरहो स्टेट के मधुवंशी यादव जमींदार बाबु बीपी मंडल जी बिहार के मुख्य मंत्री रहे है,आपको बता दे की ओबीसी समाज को उसका हक मुरहो स्टेट के क्षत्रिय गोप यादव जमींदार बाबु बीपी मंडल यादव ही दिलवाए थे।बंगाल में सदगोप यादवो की भी राजनीतिक पकड़ अच्छी है। फिल्म इंडस्ट्री में अच्छी पकड़ है,भोजपुरी अभिनेता और मनेर बिहार के हाथी जमींदारी के कृष्णोत गोत्रीय यादव राय साहब कुणाल सिंह यादव जी को भोजपुरी जगत का अमिताभ बच्चन कहा जाता है जो आजकल यदुकुल शिरोमणि वीर लोरीक देव महान की जीवनी पर फिल्म यदुवंशम द गॉर्ड ऑफ़ यूनिवर्स पर काम कर रहे है जो पुरे भारत में रिलीज की जाएगी,इस फिल्म का ट्रेलर साल के आखिरी महीने तक आने की उम्मीदें है।इन यदुवंशियो के नाम पर बड़े बड़े तीर्थ स्थल भी है भारत में जैदी गोपेश्वर महादेव,गोपपुरी इत्यादि।
तो मित्रो ऐसा रहा है रुतबा चंद्रवंशी क्षत्रित गोप अभीर यादवो का मित्रो आजकल गुजरात के भेड़ बकरी वाले गड़ेरिये और भीमते चिमटे भी फेसबुक पर गोप अभिर यादव लिखकर यादव बनने का नाकाम कोसिस कर रहे है पर इनको पता नहीं यादव बनने के लिए यदुवँश में अहीरानी के कोख से जन्म लेना पड़ता है बलिदान देना पड़ता है न की इतिहास चुराने से यादव बन जाओगे हे यदुवंशियो इन इतिहास चोरो से सावधान रहें और इनका अच्छे से इलाज करे।
जय माँ विंध्यावासिनी
जय यदुवंशम जय जगतगुरु कृष्णम
© - राय कृष्णा यदुवंशी व टीम यदुवंशी साम्राज्य