टीम तीलू रौतेली

टीम तीलू रौतेली जय पहाड़वाद, जय देवभूमी उत्तराखण्ड।�?

प्रिय चौबट्टाखाल के कांग्रेस समर्थकों,पिछले कुछ दिन आप सबके लिए भारी-उतार चढाव, दिमागी रूप से बेहद कठिन और इमोशनल रहे है...
30/01/2022

प्रिय चौबट्टाखाल के कांग्रेस समर्थकों,

पिछले कुछ दिन आप सबके लिए भारी-उतार चढाव, दिमागी रूप से बेहद कठिन और इमोशनल रहे हैं.
कई लोग इस बात से गुस्से में होंगे कि X को टिकट मिला Y को नहीं, लेकिन जैसे आपको पता है हज़ारों कार्यकर्ताओं में से किसी एक को ही टिकट मिलनी है और उसका चुनाव करना बड़ा कठिन प्रोसेस होता है चाहे पार्टी कोई भी हो।
इसलिए टिकट किसी को भी मिला हो पर पार्टी का समर्थन आपका पहला कर्तव्य होना चाहिए यही एक सच्चे कार्यकर्ता की निशानी है।
मुझे पता है ग्राउंड लेवल पर हज़ारों कार्यकर्ता विगत कई महीनों, कुछ लोग वर्षों से बहुत ज़ोर-शोर से पार्टी के लिए प्रचार-प्रसार कर रहे थे और उम्मीद करते थे कि लोकल को टिकट मिले लेकिन ऐसा कई बार होता है कि हमारे अपेक्षा के अनुरूप रिजल्ट नहीं आता है।
क्योंकि अब तो उम्मीदवार तो लगभग तय है इसलिए आप सबको पहले की भांति एक साथ और एक स्वर में कांग्रेस पार्टी की मज़बूती के लिये कदम बढ़ाने चाहिए। कई लोगों ने अपने पदों से इस्तीफे भी दिए हैं लेकिन एक बार सोचें इन इस्तीफों से, विरोध से किसको फायदा होने वाला है, आखिर कई महीनों की मेहनत आपके किस काम की जब ठीक चुनाव प्रचार ख़त्म होने के 12 दिनों पहले आप लोगों का आपस में विरोध है.
जिस विधायक को आप सबने चौबट्टाखाल से हटाने के लिए इतने सालों से मेहनत कर रहे हैं तो आपके आपसी विरोध का सीधा फायदा तो उसी मौजूदा विधायक और पार्टी को होगा।
पिक्चर को थोड़ा बड़ा करके देखिये आपकी भावनाओं का सम्मान है, मैं ये अपील करना चाहता हूं, आपका मुक़ाबला विरोधी दल से है अपने आपस में नहीं, पार्टी को मज़बूत करना आप जैसे युवा कार्यकर्ताओं के हाथों में है. सोचिये उस निचले तबके के कार्यकर्ता में जोश तभी भर पाएंगे जब आप चौबट्टाखाल की सीट पर कब्ज़ा करेंगे और इसका असर सिर्फ यहां नहीं आस-पास की विधानसभाओं पर भी होगा।
कहीं ऐसा न हो कि कांग्रेस को सिर्फ एक सीट की दरकार थी बहुमत हासिल करने की और बदकिस्मती से हमारे आपस की लड़ाई की वजह से वो सीट हमारी ही रही जिसे हम दिलवा नहीं पाए कांग्रेस को।
इसलिए आपसी मतभेद को भुलाकर सब लोग एक होकर मुक़ाबला करें, चुनाव प्रचार में अब भी यहां से 12 दिनों में आप सबकुछ बदल सकते हैं, आपसी विरोध से आप सिर्फ अपने राजनैतिक विरोधी को ही मज़बूत करेंगे और इस बार अगर आपको विफलता मिलती है तो इसका असर आगामी चुनावों पर भी होगा ये सही समय है लोकल मुद्दों को घर-घर लेकर जाएं गरीब, बेरोज़गार और वंचित समाज की आवाज़ बनें।
अपने वादों से उनको अवगत कराएं और पूरा करने का रोडमैप भी समझाएं, सोशल मीडिया पर भी जहां संभव हो प्रचार-प्रसार करें। ये शायद सबसे अच्छा मौका है आपके पास इस सीट को कांग्रेस की झोली में डालने का, दलहित से बढ़कर कुछ नहीं है, पार्टी मज़बूत होगी तो हर एक कार्यकर्ता मज़बूत होगा। अगर आप सब लोग कांग्रेस में विश्वास करते हैं तो आपका विश्वास सिर्फ एक पद या टिकट ना मिलने से ख़त्म नहीं होना चाहिए, और अगर ऐसा होता है तो समझिए वाकई में वो विश्वास कभी था ही नहीं।
आप सिर्फ अपने क्षेत्र और वहां की समस्याओं के बारे में सोचें, अगर आप सब कार्यकर्ता एक होंगे तो पार्टी को फिर से मज़बूती मिलेगी और मुझे पता है हम सबके बड़े भाई राजपाल बिष्ट का भी यही सपना है कि चौबट्टाखाल सीट पर सिर्फ और सिर्फ कांग्रेस पार्टी विजयी होनी चाहिए। इसलिए जरूरी है कि आपस में सबका एक होकर पार्टी और उम्मीदवार के लिए हर संभव प्रयास करना, तभी सफलता हाथ लगेगी और हम सब एक होकर उसका जश्न मनाते हुए जनता की सेवा में लगेंगे।

साथ में आपको एक और बात बता दूं कि मैं केंद्रीय लेवल पर बीजेपी समर्थक रहा हूं लेकिन राज्य लेवल पर बीजेपी को भारी भरकम बहुमत होने के बावजूद इनका एक भी काम न करने की वजह से मैं यहां इनका घोर आलोचक भी हूं।
मैं ये चाहता हूं मेरे चौबट्टाखाल क्षेत्र में वो पार्टी जीते जिसके कार्यकर्ता ग्राउंड लेवल पर सबसे ज्यादा मेहनत करते दिखे हों और लोगों की बातों को सुनते दिखें हों और विधायक ऐसा हो जो क्षेत्र की जनता के लिए हर समय उपलब्ध हो।

जय हो, विजय हो, जय उत्तराखंड, जय भारत।

साभार: भाई

 #उत्तराखंड_मांगे_भू_कानून  #कृषि_बागवानी  #मूलनिवास_1950
03/12/2021

#उत्तराखंड_मांगे_भू_कानून
#कृषि_बागवानी
#मूलनिवास_1950

 #उत्तराखंड_मांगे_भू_कानून  #भू_कानून_पर_हल्ला_बोल  #उत्तराखंड_मांगे_सख्त_भू_कानून
02/12/2021

#उत्तराखंड_मांगे_भू_कानून
#भू_कानून_पर_हल्ला_बोल
#उत्तराखंड_मांगे_सख्त_भू_कानून

04/11/2021

शुभम् करोति कल्याणम्,
अरोग्यम् धन संपदा,
शत्रु-बुद्धि विनाशायः,
दीपः ज्योति नमोस्तुते !!!

देवभूमि उत्तराखंड के पहाड़ों में आज भी परंपरागत और रीति रिवाजों से बग्वाल(पहाड़ी दिवाली) मनाते है।

सुबह सबसे पहले घर को सजाया जाता है। घर की देल्ही के गणेश जी की पूजा होती है। घरों में स्वाले भूडे पकोड़े आदि पकवान बनते है। पालतू जानवरों गाय बछड़ों बैलों की पूजा की जाती है।
उसके बाद उनके लिए तैयार किया गया भात झंगोरा बाडी और जौ के लड्डू तैयार कर सबको परात और थाली में सजाया जाता है।
फिर उनको बग्वाली के फूलों(चौलाई के फूलों) से सजाया जाता है।
जानवरों के पैर धोकर धूप दिया जलाकर उनकी आरती की जाती है। और टीका लगाने के बाद सींगो पर तेल लगाया जाता है।
फिर थाली परात में सजाया गया अन्न उन्हें खिलाया जाता है।

रात को सब लोग भैलो खेलते है।
भैलो का मतलब एक रस्सी से है जो पेड़ों की छाल से बनाई जाती है। बग्वाल के दिन लोग रस्सी के दोनों कोनों में आग लगाते है फिर रस्सी को घुमाते हुए भैलो खेलते है।

आप सभ्यूं थै बग्वाळी की हार्दिक बधैं एवम ढेरों शुभकामनाएं।🙏🏻💐❤️🎉🥳

Credit:


#शुभ_दीपावली

20/09/2021

#उत्तराखंड : त्रिवेन्द्र सिंह रावत और पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज का गृह क्षेत्र चौबट्टाखाल जब बुनियादी सुविधाओ के लिये तरस रहा हो तो बाकी प्रदेश के बारे में क्या कहा जाय? आलम ये है कि चौन्दकोट क्षेत्र के एकमात्र सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में भी बुनियादों सुविधाओं का टोटा पड़ा हुआ है.

पोखड़ा और एकेश्वर ब्लॉक के एक मात्र सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र,जिसमें सबसे छोटी मूलभूत जरूरत आवश्यकता “पानी” भी नही हैं,तो बाकी सुविधाओं के बारे में सोचना ही बेकार है,इस सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में आये दिन प्रसव के केस आते रहते हैं ,लेकिन पानी न होने की वजह से डॉक्टरों को केस पौड़ी या कोटद्वार रेफर करने पड़ते हैं,क्योंकि बिना पानी के साफ सफाई से प्रसव कराना सम्भव नहीं है.

इस सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में प्राथमिक जाँच के लिए लैब भी नहीं हैं,जिसमें गर्भवती महिलाओ के ख़ून की जांच की जाये,हालांकि सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के भवन के निर्माण पर करोड़ो रुपये का व्यय किये गये हैं लेकिन बुनियादी सुविधाओं के अभाव में ये सब बेकार है,चौन्दकोट युवा संगठन के अध्यक्ष विकास पांथरी ने कहा है कि यदि स्थानीय जनप्रतिनिधि और स्वास्थ्य महकमा इस और जल्द ध्यान नहीं देता तो वो आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। (JULY, 2019)

आवारा पशुओं का अड्डा बने पौड़ी जिले के रिखणीखाल स्थिति सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पर इस विकासखंड मुख्यालय के आसपास के 79 गांव निर्भर हैं। पलायन के बावजूद फिलहाल इन गांवों में करीब 17 हजार लोग रह रहे हैं। सीएचसी में कुल 3 डॉक्टर, एक फार्मासिस्ट, दो स्टाफ नर्स और सफाई कर्मचारी नियुक्त हैं। वे भी अपनी ड्यूटी के प्रति कितने सजग हैं, अस्पताल की स्थिति देखकर पता चल रहा है। कुल मिलाकर इस सीएचसी में मामूली बुखार की दवा को छोड़कर कोई स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध नहीं है। छोटी-छोटी बीमारियों के इलाज के लिए भी इस क्षेत्र के लोगों को 85 किमी दूर कोटद्वार जाना पड़ता है।

मैटरनिटी सुविधाओं की बात करें तो पूरे राज्य में हालात बदतर हैं। बदरीनाथ केदारनाथ घाटी के लोगों को मैटरनिटी सुविधा श्रीनगर आकर ही उपलब्ध हो पाती है। यहां भी हालत ये है कि प्रसव के बाद यदि बच्चे को किसी तरह की समस्या हुई तो बाल रोग विशेषज्ञ न होने के कारण देहरादून भागना पड़ता है। कुमाऊं क्षेत्र में यह सुविधा हल्द्वानी में ही उपलब्ध हो पाती है। सुदूर गांवों से श्रीनगर, देहरादून, हल्द्वानी और कोटद्वार की दूरी 300 किमी तक है। इनमें कुछ ऐसे गांव भी हैं, जिनसे मोटर मार्ग तक पहुंचने के लिए 40 से 50 किमी पैदल चलना पड़ता है।

Address

Chaubattakhal, Pauri Garhwal
Garhwal

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when टीम तीलू रौतेली posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share