Arya Veer Dal Gangapur City

Arya Veer Dal Gangapur City आर्य वीर दल आर्य समाज की युवा इकाई हैं I

आर्य वीर दल - एक संक्षिप्त परिचय

बुनियाद

अंधेरे के सदियों के बाद, महर्षि दयानंद सरस्वती द्वारा आर्य समाज का गठन किया गया था करने के लिए अपने धर्म के बारे में आर्यन रेस के बीच हो गलतफहमी के खिलाफ युद्ध आरंभ और वैदिक अवधारणाओं को पुनर्जीवित. सत्य का यह लाइट और प्रबुद्ध मजबूत दुनिया भर में सभी आर्यन रेस, इन धमकियों के सामने हार्ड रॉक खड़े. लेकिन कुछ तर्कहीन जो लोग ईर्ष्या और आर्य समाज की इस वृद्धि

का डर रहे थे, इस महान आंदोलन को रोकने के लिए योजना बना रही शुरू कर दिया. स्वामी दयानंद सरस्वती के बाद, वे एक प्रमुख आर्य समाज नेताओं को मारने का अभियान शुरू कर दिया. पंडित लेखराम और स्वामी श्रदनन्द कि बेरहमी से हत्या की गई. आर्य समाज श्रमिक और आर्य समाज के गुण भी हमला किया गया जा रहा है. 23 दिसंबर १,९२६ स्वामी श्रदनन्द की हत्या के बाद पहला आर्य महसम्मेलन 1927 में आयोजित किया गया था महात्मा हंसराज की अध्यक्षता में. यह सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया, आर्य महसम्मेलन में, कि एक विशेष समर्पित बल गठित करने के क्रम में आर्य समाज गुण, कार्य और नेताओं के लिए सुरक्षा कवर प्रदान. इसके बाद, आर्य रक्षा समिति महान स्वतंत्रता सेनानी महात्मा नारायण स्वामी की अध्यक्षता में गठन किया गया था. ARS यह लक्ष्य के रूप में Rs.50000 के धन इकट्ठा करने के लिए और के साथ एक वर्ष में देश भर से 10000 समर्पित युवाओं का चयन करा था. यह महात्मा नारायण स्वामी द्वारा एक समय सीमा के रूप में महसूस किया गया, इसलिए वह इस प्रयोजन के लिए अटूट काम करना शुरू किया और परिणाम हमारे लिए वहां गया था के रूप में हम साथ बहुत कुछ महीनों में 12000 समर्पित युवाओं और अपेक्षित पैसा, समय सीमा से पहले ज्यादा (व्यवस्था ). चयनित युवाओं को एक नया नाम सर्व्देशिक आर्य वीर दल सर्व्देशिक आर्य प्रतिनिधि सभा द्वारा 26 जनवरी, 1929 से संगठन के सदस्य के रूप में प्रसिद्ध थे. सर्व्देशिक आर्य प्रतिनिधि सभा विधिवत एक नए युवा संगठन का गठन 26 जनवरी, 1929 दिनांक और नाम "सर्व्देशिक आर्य वीर दल" सभी लक्ष्यों की उपलब्धि के बाद अर्थात्. शिव्चंद जी अपनी पहली संचालक (राष्ट्रपति) के रूप में नियुक्त किया गया था. मतलब उस समय में, महशय राजपाल भी लाहौर में हत्या कर दी गई. इन नई परिस्थितियों के तहत महात्मा नारायण स्वामी आदेश जारी करने के लिए गठन के लिए प्रत्येक और हर आर्य समाज परिसर में एक आर्य वीर दल शाखा (यूनिट). उचित सुरक्षा सहायता का एक परिणाम के के रूप में, आर्य नेताओं पर हमले रुक मिलता है. आर्य समाज कार्य का आयोजन किया, संयुक्त राष्ट्र के बीच में ही रोकते हुए जा रहे थे. आर्य के प्रभाव को देखकर दल वीर, सर्व्देशिक आर्य प्रतिनिधि सभा विधिवत घोषणा की आर्य 1936 में अपनी यूथ विंग के रूप दल वीर. और अत्यधिक साहसी श्री. ओमप्रकाश त्यागी अपनी प्रधान संचालक (राष्ट्रपति) के रूप में 1940 में नियुक्त किया गया था.

04/01/2026

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जिला आर्य वीर दल गंगापुर सिटी द्वारा आयोजित गैर आवासीय आर्य वीरांगना प्रशिक्षण शिविर में अपनी बहन, बेटियों को भेजे। आर्य...
17/12/2025

जिला आर्य वीर दल गंगापुर सिटी द्वारा आयोजित गैर आवासीय आर्य वीरांगना प्रशिक्षण शिविर में अपनी बहन, बेटियों को भेजे।
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03/08/2025
11/10/2024

भव्य व्यायाम प्रदर्शन - ट्रेलर
वीर पर्व 2k24
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प्रारंभ हो चुका है स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आर्य समाज गंगापुर सिटी में एक शाम शहीदों के नाम कार्यक्रम। अधिक से अधिक सं...
15/08/2024

प्रारंभ हो चुका है स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आर्य समाज गंगापुर सिटी में एक शाम शहीदों के नाम कार्यक्रम। अधिक से अधिक संख्या में पधारे।

यजुर्वेद पारायण महायज्ञ के चतुर्थ दिवस की प्रातः बेला के छायाचित्र
15/08/2024

यजुर्वेद पारायण महायज्ञ के चतुर्थ दिवस की प्रातः बेला के छायाचित्र

14/08/2024

आर्य समाज, गंगापुर सिटी में चल रहे यजुर्वेद पारायण महायज्ञ में होशंगाबाद से पधारे आचार्य योगेंद्र जी याज्ञिक के सान्निध्य में यजमान दे रहे है यजुर्वेद के मंत्रों से आहुतियां। वेदपाठी विकास जी और कपिल जी कर रहे है सस्वर यजुर्वेद के मंत्रों का पाठ। मेरठ से पधारे भजनोपदेशक कुलदीप जी आर्य श्रोताओं को मधुर भजनों और गीतों से कर रहे है सराबोर। कार्यक्रम में अधिक से अधिक पधारकर अनुगृहीत करें।

अभिषेक बंसल
मंत्री, आर्य समाज,
गंगापुर सिटी।

यजुर्वेद पारायण महायज्ञ के द्वितीय दिवस का प्रथम सत्र आरंभ। आचार्य योगेंद्र जी याज्ञिक के सान्निध्य में वेदपाठी  विकास ज...
13/08/2024

यजुर्वेद पारायण महायज्ञ के द्वितीय दिवस का प्रथम सत्र आरंभ। आचार्य योगेंद्र जी याज्ञिक के सान्निध्य में वेदपाठी विकास जी एवं कपिल जी कर रहे है यजुर्वेद का पाठ।

12/08/2024

यजुर्वेद पारायण महायज्ञ में मेरठ से पधारे भजनोपदेशक कुलदीप जी आर्य के भजनों के साथ प्रथम दिवस का तृतीय सत्र का आरंभ।

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आर्य वीर दल - एक संक्षिप्त परिचय

पंडित लेखराम, महाशय राजपाल, स्वामी श्रद्धानन्द आदि अनेक वैदिक विद्वानों व संन्यासियों की कुछ व्यक्तियों के मतान्धता में आकर निर्मम हत्या के उपरान्त, आर्य जगत् को आर्य नेताओं, वैदिक विद्वानों, सामाजिक उत्सवों, राष्ट्र व समाज की सुरक्षा हेतु एक विशेष समर्पित दल की आवश्यकता सर्वत्र महसूस हुई। 1927 में हुये प्रथम आर्य महासम्मेलन में महात्मा नारायण स्वामी एवं महात्मा हंसराज जी की अध्यक्षता में फ्आर्य रक्षा समितिय् का गठन किया गया। जिसके मन्त्री पद का कार्यभार पंडित इन्द्र विद्यावाचस्पति जी को दिया गया। समिति का कार्य था कि वह देश भर में भ्रमण कर 10 हजार ऐसे स्वयंसेवकों का चयन करे, जो धर्मरक्षा एवं राष्ट्ररक्षा के लिये प्राण तक अर्पण करने में सदा उद्यत हों और रक्षा निधि के लिये 50 हजार रुपये एकत्र करे। आर्यों के भारी उत्साह के फलस्वरूप बहुत कम समय में ही 12 हजार स्वयंसेवक व लक्षित धन एकत्र हो गया।

समिति ने स्वयंसेवकों के दल का नाम फ्आर्य वीर दलय् रखा और 26 जनवरी 1929 को सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा ने इसका संविधान बनाकर फ्आर्य वीर दलय् की विधिवत् स्थापना कर दी।

श्री पं. शिवचन्द्र जी इसके प्रथम संचालक नियुक्त किये गये। अल्पकाल में ही आर्य वीर दल ने पूरे भारत में प्रशंसनीय कार्य किये। जिसके फलस्वरूप आर्य नेताओं व विद्वानों पर होने वाले आक्रमणों पर अंकुश लगा व आर्यों की शोभायात्र, नगर कीर्तन और उत्सव निर्विघ्न सम्पन्न होने लगे