02/10/2025
#नाहनु_उल_मुसलमीन_कुल्लू_नस_सलाउद्दीन.
तर्जुमा
ुस्लमान_के_बेटे_है_और_हम_सब_के_अंदर_
#सलाउद्दीन_अय्यूबी_है...
आज 2 ऑक्टोबर उम्मते मुस्लिमां के लिए एक ऐतिहासिक दिन है, आज ही के दीन सलाउद्दीन अयूबी ने 12000 हजार के लश्कर के साथ 4,00,000 लाख के लश्कर को धूल चटाई और बैतूल मुक्कदस को फ़तह किया और लोगों को ज़ुल्म सितम से आज़ादी दिलाई। आईये, सुल्तान सलाउद्दीन अय्यूबी की फ़तह से पहेले के हालात का मुशयदा करें जिनमे तीन पहेलु हमे बहौत कुछ सिखाते हैं।
सबसे पहले, उम्माह में काफ़ी इत्तेलाफ़ था। इब्न अथर बताते हैं कि उस वक़्त, ख़िलाफ़त काफ़ी कमज़ोर थी और छोटे छोटे मुस्लिम हुक्मरां अपनी खुदमुख्तार रियासत का दावा कर रहे थे। ख़लीफ़ा का हुक्म सिर्फ बग़दाद तक ही महदूद हो रहे गया था, जिसके वज़ह से उम्मते -ए- मुस्लिमा में इत्तेहाद नही रहा, आज भी ये इत्तेलाफ़ हमारे सामने आने वाली चुनौतियों से मिलता-जुलता है।
लेकिन उम्मते-ए- मुस्लिमा पहले भी ऐसे मुश्किल हालातों से दो चार हो चुकी है, जिसके बाद बिल आखिर फ़तह हासिल हुई। हमें मुश्किल हालातों सब्र करना चाहिए और ना उम्मीद नहीं होना चाहिए जाब पूरी तरह नाउम्मीदी हो तो उठ खड़ा होना ही एक रास्ता है हालातों से लड़नेका अल्लाह जरूर मदत फरमाता हैं।
दूसरा, यह समझना ज़रूरी है कि हर कोई काबिलियत में मुक्कमल नही होता। इब्न अथर एक ऐसी ही वाखिये का ज़िक्र करते हैं जहाँ बड़े बड़े अलीम जो जंग की महारत राखते थे शुरू में जिहाद की तैयारी कर रहे थे, लेकिन अक्सरियत में फ्रांसीसी लश्कर की खबर सुनकर पीछे हट गए। ये अलीम अपने आपको को सही ठहराने के लिए बहाने ढूँढ़ते थे या शरियत हवाले को तोड़-मरोड़कर पेश करते थे। यह इस बात पर ज़ोर देता है कि किसी भी जानकर पर आँख मूँदकर बरोसा करना ज़रूरी नही, अपनी भी अक्ल इस्तेमाल में लाना जरूरी है, क्योंकि उन से भी गलतियाँ हो सकती हैं।
तीसरा, एक बार इंग्लैंड के राजा रिचर्ड दा लॉयन हार्ट ने मुसलमानों का किला जीत लिया तब सलाउद्दीन अय्यूबी ने उस किले को अपने मुजाहिद्दीनों के साथ आकर घेर लिया (मुहासरा) और क़िला फ़तेह करने के लिए जंग शुरू होगई, मुहासरा लंबे समय तक जारी रहा, इस दौरान इंग्लैंड का राजा रिचर्ड दा लॉयन हार्ट बीमार पड़ गया और क़िले के अंदर कोई अच्छा हकीम (वैध) नहीं था, और मुहासरे की वज़ह से कोई बाहर से मदत की उम्मीद भी नहीं थी, तब सलाउद्दीन अय्यूबी ने अपने सबसे अच्छे शाहीहकीम को दवाइयों के साथ इंग्लैंड के राजा रिचर्ड दा लॉयन हार्ट के पास उसका इलाज करने के लिए भेजा और उसका इलाज करवाया, और राजा रिचर्ड दा लॉयन हार्ट ठीक होने तक जंग रोकदी इस इंसानियत के बर्ताव और उनकी बहादुरी को देखकर फिलिस्तीन (सीरीया) में बच्चे आज भी उनके बहादुरी की शान में ये कहेते है। #नाहनु_उल_मुसलमीन_कुल्लू_नस_सलाउद्दीन.