13/04/2026
सुनी हुई बातें
आज एक छोटी बच्ची को अपनी माँ से कहते हुए सुना…
वो अपनी छोटी-सी गुड़िया हाथ में लिए माँ के पास आई और धीरे से बोली —
“मम्मी… आप मेरे साथ थोड़ी देर खेलोगी?”
माँ उस समय अपने फोन में कुछ देख रही थी।
बिना ऊपर देखे ही बोली —
“अभी नहीं बेटा, मम्मी को थोड़ा काम है।”
बच्ची कुछ पल वहीं खड़ी रही…
फिर धीरे से बोली —
“मम्मी, बस पाँच मिनट… मैं अपनी गुड़िया की शादी करा रही हूँ… आप उसकी मम्मी बन जाओ।”
माँ ने फिर वही जवाब दिया —
“अभी नहीं, बाद में खेलेंगे।”
बच्ची चुप हो गई…
वो धीरे-धीरे वापस अपने कमरे में चली गई।
थोड़ी देर बाद माँ पानी लेने उठी तो देखा…
वही छोटी बच्ची अपने खिलौनों के बीच अकेली बैठी थी और अपनी गुड़िया से बात कर रही थी।
वो कह रही थी —
“गुड़िया… तुम्हारी मम्मी भी क्या मेरी मम्मी जैसी हैं?
उनके पास भी तुम्हारे लिए समय नहीं होता?”
ये सुनकर माँ के कदम वहीं रुक गए…
उसे अचानक एहसास हुआ कि जिस फोन को वो बस “दो मिनट” के लिए देख रही थी,
उसी दो मिनट में उसकी बेटी उसे कितनी बार पुकार चुकी थी।
माँ ने तुरंत फोन एक तरफ रख दिया…
धीरे से अपनी बेटी के पास जाकर बैठ गई
और उसे प्यार से गले लगा लिया।
माँ बोली —
“चलो, आज मम्मी ही तुम्हारी गुड़िया की मम्मी बनती है।”
इतना सुनते ही बच्ची की आँखें चमक उठीं…
जैसे उसे दुनिया की सबसे बड़ी खुशी मिल गई हो।
उसी पल समझ आया…
बच्चों को महंगे खिलौने नहीं चाहिए होते,
उन्हें चाहिए बस अपने माता-पिता का थोड़ा सा समय और थोड़ा सा प्यार।
हम अक्सर सोचते हैं कि बच्चे बड़े हो जाएँगे तो समझ जाएँगे। लेकिन वो पल लौटकर कभी नहीं आते। जो समय हम आज नहीं दे पाए, वो कभी पूरा नहीं किया जा सकता।