15/07/2026
हुकूमत की बहरी दीवारों को हिलाने के लिए धमाकों की नहीं, सड़क पर बहते पसीने, आँखों के आँसू और भूखे पेट की चीख की ज़रूरत होती है!"
आज दिल्ली के जंतर-मंतर का मंज़र देखकर अगर किसी का दिल नहीं पसीजा, तो समझो उसकी इंसानियत मर चुकी है।
एक तरफ देश का वो तपस्वी सोनम वांगचुक, जो लद्दाख की बर्फीली वादियों को छोड़कर, अपने पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के अस्तित्व के लिए 18 दिनों से भूखा बैठा है। उसका शरीर भले ही कमजोर पड़ रहा हो, लेकिन आँखों का फौलादी जज्बा हुकूमत की चूलें हिला रहा है।
दूसरी तरफ, देश के करोड़ों युवाओं के सपनों का कत्लेआम करने वाले 'पेपर लीक' के खिलाफ 'कॉकरोच जनता पार्टी' के अध्यक्ष अभिजीत दीपके और देश के नौजवान सड़क पर अपना हक मांग रहे हैं। जो हाथ कल देश का भविष्य लिखने वाले थे, आज वो अपनी डिग्रियां और इंसाफ की तख्तियां लेकर सड़क पर बैठने को मजबूर हैं।
इस घोर अंधकार और सरकारी संवेदनहीनता के बीच, शोषितों और पीड़ितों की ढाल बनकर नगीना सांसद और आज़ाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भाई चंद्रशेखर आज़ाद जी जंतर-मंतर के इस ऐतिहासिक मोर्चे पर पहुंचे!
जब फौलाद से टकराई संवेदना...
जब चंद्रशेखर भाई ने कमजोर पड़ चुके सोनम वांगचुक जी को गले लगाया, तो वहाँ मौजूद हर आँख रो पड़ी। यह सिर्फ दो इंसानों का मिलना नहीं था, यह लद्दाख की वादियों का दर्द और देश के दलित-पिछड़े-वंचित समाज के संघर्ष का एक हो जाना था।
वहीं, पेपर लीक से टूट चुके छात्रों की पीड़ा को जब अभिजीत दीपके जी ने साझा किया, तो भाई चंद्रशेखर जी का गुस्सा और संवेदना दोनों उबल पड़े। एक सच्चा जननेता वही होता है जो सत्ता के गलियारों के ऐशो-आराम को लात मारकर, धूप में जलती सड़क पर अपने लोगों के आँसू पोंछने पहुँच जाता है।
भाई साहब ने भरी हुंकार के साथ दोनों आंदोलनों को आश्वस्त किया:
"यह सरकार बहरी हो सकती है, अंधी हो सकती है, लेकिन हम खामोश नहीं हो सकते। लद्दाख की मिट्टी को बेचना और हमारे गरीब-मजदूर बच्चों के सपनों का पेपर लीक के ज़रिए सौदा करना—हम बर्दाश्त नहीं करेंगे! जब तक मेरी रगों में खून का एक-एक कतरा है, मैं आपकी इस लड़ाई में आपके साथ कंधे से कंधा मिलाकर, सीना तानकर खड़ा हूँ!"
ये सिर्फ धरना नहीं, यह हुकूमत के कफन में आखिरी कील है!
सोनम वांगचुक जी का गिरता हुआ स्वास्थ्य और पेपर लीक से हताश होकर दम तोड़ते हमारे देश के होनहार छात्र... यह दोनों ही इस बात का सबूत हैं कि दिल्ली के तख्त पर बैठे हुक्मरानों को जनता के दर्द से कोई सरोकार नहीं है। लेकिन आज चंद्रशेखर आज़ाद जी की इस दहाड़ ने यह साफ कर दिया है कि युवाओं के भविष्य के साथ हो रहे इस खिलवाड़ और लद्दाख के अधिकारों की जंग को अब सड़क से उठाकर देश की सबसे बड़ी पंचायत (संसद) में घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया जाएगा।
सलाम है सोनम वांगचुक जी के इस आत्मबल और देशप्रेम को!
सलाम है अभिजीत दीपके जी और पेपर लीक के खिलाफ लड़ रहे युवाओं के इस फौलादी हौसले को!
और सलाम है हमारे जननायक भाई चंद्रशेखर आज़ाद जी के इस अटूट संघर्ष को!
Chandra Shekhar Aazad