Pradeep Upadhyay

Pradeep Upadhyay राष्ट्र सर्वोपरि ,प्रखर राष्ट्रवादी,
सदस्य प्रदेश कार्यसमिति सोशल मीडिया भाजपा राजस्थान
समाजसेवी,

16/03/2026

श्री भजन लाल शर्मा के कुशल नेतृत्व में वागड़ के प्रयोग को नया स्वरूप प्रदान होगा

08/03/2026

भारत विश्व विजेता

15/01/2026

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11/01/2026
05/08/2025

कांग्रेस का शेखचिल्ली रोज एक नया मुद्दा निकलता है फिर झूठा साबित हो जाता है अब तो हद करदी वो वो ट्रंप को सही कह रहा है उसे भारतीय इकोनॉमिस्ट पर भरोसा ही नहीं है

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03/09/2024

Namaskar 🙏🏻
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Thank you🪷🪷

03/09/2024

महाभारत युद्ध चल रहा था। अर्जुन के सारथी श्रीकृष्ण थे। जैसे ही अर्जुन का बाण छूटता, कर्ण का रथ कोसों दूर चला जाता। जब कर्ण का बाण छूटता तो अर्जुन का रथ सात कदम पीछे चला जाता।

श्रीकृष्ण ने अर्जुन के शौर्य की प्रशंसा के स्थान पर कर्ण के लिए हर बार कहा कि कितना वीर है यह कर्ण? जो उस रथ को सात कदम पीछे धकेल देता है।

अर्जुन बड़े परेशान हुए। असमंजस की स्थिति में पूछ बैठे कि हे वासुदेव! यह पक्षपात क्यों? मेरे पराक्रम की आप प्रशंसा करते नहीं एवं मात्र सात कदम पीछे धकेल देने वाले कर्ण को बारम्बार वाहवाही देते है।

श्रीकृष्ण बोले-अर्जुन तुम जानते नहीं। तुम्हारे रथ में महावीर हनुमान एवं स्वयं मैं वासुदेव कृष्ण विराजमान् हूँ। यदि हम दोनों न होते तो तुम्हारे रथ का अभी अस्तित्व भी नहीं होता। इस रथ को सात कदम भी पीछे हटा देना कर्ण के महाबली होने का परिचायक हैं। अर्जुन को यह सुनकर अपनी क्षुद्रता पर ग्लानि भी हुई।

प्रत्येक दिन अर्जुन जब युद्ध से लौटते श्रीकृष्ण पहले उतरते, फिर सारथी धर्म के नाते अर्जुन को उतारते।

अंतिम दिन वे बोले-"अर्जुन! तुम पहले उतरो रथ से व थोड़ी दूरी तक जाओ।"

भगवान के उतरते ही घोड़ा सहित रथ भस्म हो गया। अर्जुन आश्चर्यचकित थे।

भगवान बोले-"पार्थ! तुम्हारा रथ तो कभी का भस्म हो चुका था। भीष्म, कृपाचार्य, द्रोणाचार्य व कर्ण के दिव्यास्त्रों से यह कभी का नष्ट हो चुका था। मेरे-स्रष्टा के संकल्प ने इसे युद्ध समापन तक जीवित रखा था।"

“अपनी किसी भी प्रकार के विजय पर गर्वोन्नत अर्जुन समान व्यक्तियों के लिए इससे बढ़कर और क्या उपदेश हो सकता है कि सब कुछ ईश्वर का किया हुआ है, हम तो निमित्त मात्र है”

03/08/2024

अगर लोकडाउन की तरह ४-५ बाराती को लेकर शादी का रिवाज परमानेंट हो जाये तो बहुत सी बेटियों के बाप कर्जदार होने से बाख जाये

02/08/2024

हम ऐसे मूर्खताओं के काल में जी रहे हैं जहाँ तीन बच्चे की मृत्यु सड़क पर जमे जल के बेसमेंट में घुसने के कारण हो गई और बड़े-बड़े तथाकथित शिक्षक यह बता रहे हैं कि ऑनलाइन कोचिंग बहुत सही है!

कोचिंग के ऑनलाइन होने से क्या सड़क पर जल नहीं जमेगा? क्या कोचिंग के ऑनलाइन होने से बेसमेंट में खड़ी कार, या परिवार के बच्चों का जीवन जलजमाव वाले सड़क से जल के भीतर आने से संकट में नहीं पड़ेगा?

अवैध कोचिंग अवैध है। नालों की सफाई न करना भ्रष्टाचार है। सड़क पर जलजमाव सरकारी कर्मचारियों की उपेक्षा से उपजी समस्या है। बच्चों की मृत्यु का कारण ऑफ़लाइन कोचिंग नहीं, नगर निगम और सरकार द्वारा अपेक्षित कार्यों को न करना है।

दिल्ली राजधानी है, हर राष्ट्र या राज्य की राजधानी पर इतना ही स्ट्रेस रहता है। वो यह नहीं कहते कि राजधानी आना बंद कर दो, वो राजधानी के इन्फ्रास्ट्रक्चर को उत्तम बनाते हैं। दिल्ली में कितने पुस्तकालय अच्छी स्थिति में हैं? सरकारों ने कितने बनाए और मेंटेन किए हैं?

दिल्ली में लोग आते रहेंगे क्योंकि सारे अच्छे कॉलेज आपने कुछ विशेष स्थानों पर ही केन्द्रित कर रखे हैं। दिल्ली में लोगों का आना नहीं रुकेगा इसीलिए ढाँचों को सुधारिए, लोगों का आना मत रोकिए। हर राज्य अपना ढाँचा सुधारे, दिल्ली अपना।

दिल्ली में हॉस्टलों की बहुत आवश्यकता है। सरकार को कुछ स्थानों पर रेसिडेंशियल टावरों की तर्ज पर दस लाख बच्चों के लिए छात्रावास बनाना चाहिए। बीस मंजिला छात्रावास बना दीजिए सौ जगह। हर जगह दस हजार छात्र-छात्राओं के रहने-खाने की व्यवस्था।

पर ऐसा होगा नहीं। हैप्पी-लकी-मल्होत्रा-सिंह की रेंट इकॉनमी बर्बाद हो जाएगी जो वोट देते हैं। कोचिंग माफिया अलग बाँहें मरोड़ेगा। यह बात सत्य है कि आने वाले पाँच वर्षों में शिक्षा देने की सुविधा बिलकुल बदल चुकी होगी।

AI के माध्यम से आप विषय और शिक्षक चुन सकेंगे। वह शिक्षक एक डिजिटल अवतार मात्र होगा पर आपसे ऐसे बातें करेंगे जैसे पर्सनल ट्यूटर हो। या जो जाने-माने शिक्षक हैं वो रीयल टाइम में कई भाषाओं में AI के माध्यम से उपलब्ध होंगे। उन्हें केवल अपने स्वर का छोटा नमूना दे कर अपना डिजिटल अवतार चुनने की आवश्यकता है।

यदि आपको बिना बताए ऐसे वीडियो दे दिए जाएँ तो आज AI की शैशवावस्था में भी आप वास्तविक और डिजिटल में अंतर नहीं कर पाएँगे।

अंततः, समस्या सरकारी उपेक्षा है, ऑनलाइन या ऑफलाइन कोचिंग नहीं। लोग टैक्स देते हैं, तो अच्छी सुविधा की आशा भी करेंगे ही।

From Ajeet Bharti X

01/08/2024

सर्वोच्च न्यायालय ने SC/ST/OBC में जो उपसमूह बना कर आरक्षण देने का प्रावधान किया है, उस पर बोलते हुए एक बात बोली जो सबको जानना चाहिए:

‘दलित जातियाँ स्वयं में भी छूआछूत और भेदभाव करती हैं। एक जाति दूसरे के यहाँ विवाह नहीं करता, भोजन नहीं करता, जल नहीं ग्रहण करता।’

इस अवलोकन से यह तो स्पष्ट है कि इस सामाजिक न्याय के नाम पर कुछ ही जातियाँ लगातार लाभ लेती रहीं आरक्षण का, और बाकियों की स्थिति जस की तस बनी हुई है।

01/08/2024

SC/ST/OBC में बन सकेंगे जातियों के उपसमूह

सर्वोच्च न्यायालय के सात जजों की पीठ ने राज्यों को कहा है कि अब से SC, ST और OBC जाति/जनजाति समूहों में भी नए जाति उप-समूह बना कर उनके लिए आरक्षण निर्धारित कर सकती है।

तात्पर्य यह है कि यदि यादव या मीणा जाति/जनजाति का वर्चस्व, आँकड़ों के अनुसार अधिक है, और राज्य को लगता है कि अन्य जातियों को भी प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए, तो वो OBC में बिलकुल ही नकारी गई जातियों के उपसमूह बना कर उन्हें उसी 27% का एक हिस्सा आरक्षित कर के दे सकती है।

वैसे तो मैं जातिगत आरक्षण का पक्षधर नहीं हूँ, परंतु वास्तविकता वही है। अब इस निर्देश के उपरांत नई राजनीति आरंभ होगी और ‘दलितों के सवर्ण’, ‘ओबीसी के सवर्ण’ भी अब गिने जाएँगे।

इन जातियों का आरक्षण घटेगा और जो बिलकुल ही प्रतिनिधित्व नहीं पा रहीं, उन्हें अधिक अवसर मिलेगा। राजनीतिक रूप से जाति की राजनीति के ही कारण अस्तित्व में आई पार्टियों के लिए यह नई चुनौती होगी कि वो इस पर चुप बैठें या नए जाति समूह बनाएँ।

बड़ी पार्टियाँ, जातिगत राजनीति वाली पार्टियों को उकसा कर, उनके कुछ मतदाता समूह को उकसा कर इसका लाभ ले सकती है, जहाँ वो बिलकुल ही नकारी गई जातियों के लिए कुछ वर्षों का आरक्षण प्रस्तावित कर सकती है। ये रोटेशन पर भी किया जा सकता, मुझे ऐसा लगता है।

जिन्हें खेलना आता है, वो इस प्रावधान का अच्छा राजनीतिक लाभ ले सकते हैं। साथ ही, आपको कैबिनेट आदि में ऐसी जातियों को लुभाने के लिए सवर्णों के भाग के मंत्रालय दिए जा सकते हैं।

From Bharti On X

31/07/2024

जो व्यक्ति विपक्ष में हो कर, पूरी आक्रामकता के साथ, सरकार को ललकार कर कहता है कि वो पूरे राष्ट्र के हर व्यक्ति की जाति पूछ कर जातिगत जनगणना करवा कर रहेगा, उसके लिए विपक्ष में ही बैठ कर कानून पास करवा लेगा, उससे जाति पूछ दी गई तो पूरा तंत्र बिलबिला रहा है?

सड़क पर मोदी की जाति की बात कौन कर रहा था कि वो ओबीसी है या नहीं? तुम भी बताओ कि तुम्हारी जाति क्या है और जो है वो कैसे है, तुम्हारे पिता की जाति क्या है और कैसे है?

भाजपा को आज भी पूरे सदन में हर वक्ता के माध्यम से पूछना चाहिए कि जातगत जनगणना क्या बिना किसी की जाति पूछे ही हो जाएगी?

राहुल गाँधी से जाति प्रमाणपत्र माँगा जाए आज सदन में कि भैया, कौन जात हो? जब उनके लुटकुन बिलबिलाएँ तो याद दिलाओ की जब भारत के हर नागरिक के जाति को सार्वजनिक करने के लिए कानून लाने की बात हो रही है, तो आखिर राहुल गाँधी स्वयं की जाति क्यों नहीं बता पा रहे?

और वो बारहवीं पास अखिलेश? तू तो पत्रकारों से जाति पूछ कर बात करता है, तुझसे तो जाति पूछी भी नहीं, तू क्यों नाक सीधी करवाने के लिए रिंग में कूद रहा हो?

@highlight CP JoshiAjay VijayvergiaChandrashekharCol Rajyavardhan RathoreHirendra KaushikCol Rajyavardhan RathoreBJP RajasthanBJP4India

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