Adivasi Yuva Sangathan Dumka - A.Y.S

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गर्व से कहो हम आदिवासी हैं ✊समस्त आदिवासी भाइयों-बहनों को  #विश्व_आदिवासी_दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं ।
09/08/2022

गर्व से कहो हम आदिवासी हैं ✊

समस्त आदिवासी भाइयों-बहनों को #विश्व_आदिवासी_दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं ।

*हॉकी का प्रशिक्षण लेने के लिए गुमला की बेटी प्रियंका कुमारी जाएगी अमेरिका*गुमला जिलांतर्गत बिशुनपुर प्रखंड के सुदूरवर्त...
21/07/2020

*हॉकी का प्रशिक्षण लेने के लिए गुमला की बेटी प्रियंका कुमारी जाएगी अमेरिका*

गुमला जिलांतर्गत बिशुनपुर प्रखंड के सुदूरवर्ती आदिम जनजातीय बहुल क्षेत्र जमटी गाँव के गरीब परिवार की प्रियंका कुमारी का अमेरिका में अंतर्राष्ट्रीय हॉकी में खेलने एवं प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए चयन हुआ है। प्रियंका कुमारी हॉकी प्रशिक्षण एवं उसकी बारिकियां सीखने के लिए अप्रैल माह में अमेरिका के लिए रवाना होगी।

यूएस काउन्टसलेट कोलकाता, संयुक्त राज्य अमेरिका मिडिल वेरी कॉलेज एवं शक्ति वाहिनी संस्थान (एनजीओ) के संयुक्त तत्वावधान में महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राज्य स्तरीय हॉकी खेल का आयोजन सेरसा स्टेडियम हटिया में किया गया था। विदित हो कि 27 जनवरी से 01 फरवरी तक आयोजित ट्रायल में प्रियंका की प्रतिभा को देखते हुए अमेरिका से आए हॉकी कोच ने उसका चयन किया। चयन करने वाली टीम अमेरिका से आई थी। ज्ञातव्य हो कि चयन प्रतियोगिता में झारखंड से कुल 05 बालिकाओं का चयन किया गया था। जिसमें गुमला जिले की प्रियंका कुमारी एकमात्र हॉकी खिलाड़ी हैं।

बिशुनपुर अनुसूचित जनजाति टाना भगत आवासीय बालिका उच्च विद्यालय चापाटोली की कक्षा 08 में पढ़ने वाली प्रियंका कुमारी जमटी पिपरटोली के मजदूर कुलदेव टाना भगत की बेटी हैं। विगत पाँच वर्षों से पिता के लकवाग्रस्त होने के कारण उसके घर की आर्थिक स्थिति बेहद दयनीय है। प्रियंका की मां सुनीता देवी रेजा-कुली का काम कर परिवार का भरण पोषण करती हैं। बचपन से ही हॉकी खेल में रूझान रखने वाली प्रियंका कुमारी ने बताया कि वे हॉस्टेल में रहकर हॉकी खेलने की प्रैक्टिस किया करती थी।

अमेरिका जाने से पहले उपायुक्त शशि रंजन से आशीर्वाद लेने पहुंची प्रियंका को उपायुक्त ने शुभकामना देते हुए उसके उज्जवल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि गुमला जिले में प्रतिभा की कमी नहीं है, जरूरत है उन्हें तराशने की।

मौके पर शक्ति वाहिनी के प्रवक्ता रिशिकान्त ने कहा कि खेल के माध्यम से बच्चों के होने वाले पलायन पर रोक लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि हमारा मुख्य उद्देश्य है कि गुमला जिले के प्रत्येक परिवार के बच्चों के हाथों में हॉकी स्टिक हो।

Jay Johar Jay Adiwasiसाथियो भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है।          क्योंकि यंहा जो भी कानून बनते है,  वह सं...
20/07/2020

Jay Johar
Jay Adiwasi
साथियो भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है। क्योंकि यंहा जो भी कानून बनते है, वह संविधान आधारित बनते है ।
और यंहा संविधान सर्वोपरि है।
परन्तु विकास के मामले में पिछड़ा हुआ है।
शोषित वर्ग आजादी के बाद से आज तक शोषित ही है ।
विकास के नाम पर हर वर्ष करोड़ो रूपये खर्च करने के बाद भी पूर्णतः विकास नही हो पाया है ,
चिंताजनक पहलू है।
आदिवासी एवम दलित वर्ग की सारी योजनाये महज कागजी खानापूर्ति होकर रह गयी है।
दूसरी तरफ हम संवेधानिक अधिकारों की बात करे तो अधिकार केवल संविधान के पन्नो में सिमट गये है।धरातल पर अनुपालन नही हो पा रहा है।
सोचनीय बात यह है कि जब तक शोषित वर्ग का विकास नही होगा तब तक हम कैसे माने की भारत का विकास हो रहा है।
और तब तक विकास का सपना अधूरा ही रहेगा।आजादी के 72 वर्ष बाद भी आदिवासी मूलभूत समस्याओ से जूझ रहे है।
अधिकार सुरक्षित नही है।
जबकि कोई भी सरकार बनती है तो एजेंडा होता है कि अंतिम व्यक्ति का विकास कर उसे मुख्यधारा में शामिल करना।
पर वह अंतिम व्यक्ति और पिछड़ता हुआ नजर आता है ।।
शैक्षिक व राजनीतिक मजबूती के अभाव के कारण आदिवासी केवल वोटबैंक बनकर रह गया है।
इसके खिलाफ हमे एकजुट होकर आवाज उठानी पड़ेगी।
तभी हमारे आदिवासी समाज को संविधानिक अधिकार ,और हक मिलना सम्भव है ।
जय जोहार, जय आदिवासी ।।

वंशिका के माता पिता को हमारा सलाम लगभग २ वर्ष की वंशिका गुमला में अपने घर में बालकनी में खेल रही थी।  खेलने के क्रम में ...
20/07/2020

वंशिका के माता पिता को हमारा सलाम

लगभग २ वर्ष की वंशिका गुमला में अपने घर में बालकनी में खेल रही थी। खेलने के क्रम में वंशिका का संतुलन बिगड़ा और वो सीढ़ियों से गिर गयी। दुर्घटना होने पर वंशिका के पिता श्री च्रदंप्रकाश ने तुरंत बच्ची को गुमला के नर्सिंग होम में भर्ती कराया लेकिन वहां के डॉक्टरों ने तुरंत रांची आने की सलाह दी और ये लोग पहुंचे रांची चिल्ड्रन हॉस्पिटल जहाँ डॉक्टरों ने जवाब दे दिया। वंशिका इस दुनिया से जा चुकी थी। अस्पताल में जबतक कागज़ी कार्रवाई हो रही थी तबतक में वंशिका के माँ ने निर्णय लिया कि उनकी बच्ची तो चली गयी है लेकिन वे उसकी आँखों को दानकर किसी के जीवन में रौशनी लाएंगी।

इसके बाद वंशिका के माता पिता कश्यप आई हॉस्पिटल पहुंचे और उन्होंने वंशिका का नेत्रदान किया। अब वंशिका के आँखों से दो जीवन रोशन हो जायेंगे।

एक बार फिर सलाम वंशिका के माँ और पिता को।

09/04/2020

कहा गये कानुन कायदे

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08/04/2020

💐👍🙏 🙏
Apni Salary se Rs 2.OO.OOO fund ko Donate krne wali Desh ki Sebse Yuba Sangsadh Girl ji ko hum Savi doston k taraf se Dhanyabad 💐 💐

01/03/2020
जनगणना 2021 : ‘आदिवासी कॉलम नहीं ,तो जनगणना नहीं’ का नारा बुलंद करने दिल्ली में जुटेंगे आदिवासी!'सरना टुडे,दिल्ली: आगामी...
15/02/2020

जनगणना 2021 : ‘आदिवासी कॉलम नहीं ,तो जनगणना नहीं’ का नारा बुलंद करने दिल्ली में जुटेंगे आदिवासी!'
सरना टुडे,दिल्ली: आगामी 18 फरवरी को आदिवासी समुदाय के लोग दिल्ली के जंतर-मंतर पर जुटेंगे। उनकी मांग है कि जनगणना प्रपत्र में उनके लिए पृथक धर्म कॉलम हो। इसकी वजह यह कि वे स्वयं को हिंदू, मुस्लिम, सिक्ख, बौद्ध, जैन, ईसाई और पारसी नहीं मानते।
अगले वर्ष 2021 में होने वाली जनगणना के आलोक में देश के सभी राज्यों के आदिवासी अपने लिए धर्म कोड के रूप में आदिवासी की मांग को लेकर आगामी 18 फरवरी, 2020 को दिल्ली के जंतर-मंतर एवं सभी राज्यों के राजभवन के सामने एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन करेंगे।
बताते चलें कि अंग्रेजी शासन काल में आदिवासियों के लिए आदिवासी धर्म कोड था, जिसे आजादी के बाद 1951 में खत्म कर दिया गया। इसके साथ ही आदिवासियों पर हिंदू धर्म थोपने की प्रक्रिया शुरू हो गई। आदिवासी इसी का विरोध कर रह हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफेसर नीतिशा खलको के मुताबिक जनगणना प्रपत्र में आठ कॉलम हैं जिनका उपयोग धर्म की पहचान के लिए किया जाता रहा है। इनमें सात कॉलम हिंदू, सिक्ख, मुस्लिम, जैन, बौद्ध, ईसाई और पारसी के लिए है। जबकि आठवां कॉलम को अन्य शीर्षक दिया जाता है। दरअसल, इस काॅलम का उपयोग उनके लिए भी होता है जो स्वयं को नास्तिक मानते हैं। इसके अलावा इस कॉलम में उन सभी को शामिल किया जाता है जो न तो हिंदू हैं, न मुस्लिम, न सिक्ख, न बौद्ध, न ईसाई और न जैन व पारसी। इसलिए हमारी मांग है कि सरकार जनगणना प्रपत्र में एक कॉलम और जोड़े जिसमें सरना धर्म/आदिवासी धर्म का स्पष्ट उल्लेख हो।
निशिता ने बताया कि 25-26 अगस्त, 2019 को अंडमान निकोबार की राजधानी पोर्ट ब्लेयर में एक राष्ट्रीय स्तरीय सम्मेलन का आयोजन किया गया था। इसमें देश भर के आदिवासी समुदायों के प्रतिनिधि जुटे थे। इसी सम्मेलन में इस पर विचार किया गया कि जनगणना प्रपत्र में हमारे लिए धर्म का एक अलग कॉलम हो। चूंकि सांस्कृतिक व धार्मिक विविधता आदिवासी समुदायों में भी है, इसलिए सर्व सम्मति से यह तय किया गया कि धर्म कॉलम के रूप में आदिवासी शब्द का उल्लेख हो।
अरविंद उरांव के मुताबिक अब जनगणना का समय आ चुका है। इसलिए वे सभी आदिवासियों का आह्वान कर रहे हैं कि अब आर-पार की लड़ाई के लिए भारी से भारी संख्या में जंतर-मंतर में उपस्थित होकर अपने अस्तित्व,

लहराएगा तिरंगा अब सारे आस्मां पर, भारत का नाम होगा सब की जुबान पर, ले लेंगे उसकी जान या दे देंगे अपनी जान, कोई जो उठाएगा...
26/01/2020

लहराएगा तिरंगा अब सारे आस्मां पर, भारत का नाम होगा सब की जुबान पर, ले लेंगे उसकी जान या दे देंगे अपनी जान, कोई जो उठाएगा आँख हमारे हिंदुस्तान पर। गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनायें ।

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