Sanjeev Sherpur

Sanjeev Sherpur अहीर रेजिमेंट हक़ हमारा कंधे पे हो निशान हमारा

31/10/2023

अमित शाह तो कहते थे कि दुनिया में कोई भी बड़ा फैसला नरेन्द्र मोदी से पूछे बगैर नहीं होता, तो क्या क़तर में हमारे 8 पूर्व सैनिकों को मोदी से पूछकर फांसी सुनाई गई है?

आंखें खोलो भगतों. जिसे तुम विश्वगुरु समझते हो, वो 56 इंच का एक गुब्बारा है... अंदर केवल हवा भरी है, हवा 😂

30/10/2023

आंध्र प्रदेश के विजयनगरम में ट्रेन हादसे की खबर अत्यंत दुखद है।
इस हादसे में कई लोगों की मृत्यु के साथ लोगों के घायल होने की खबर है। मृतकों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना और घायलों के जल्द स्वास्थ्य लाभ की कामना करता हूँ।

 #बेघरयहां मत जाओ, वहां मत जाओ, इतनी देर क्यों कर दी! "उफ्फ" हर बात में रोक टोक, हर बात में नाराजगी।मैं भी गुस्से से खान...
29/10/2023

#बेघर

यहां मत जाओ, वहां मत जाओ, इतनी देर क्यों कर दी! "उफ्फ" हर बात में रोक टोक, हर बात में नाराजगी।
मैं भी गुस्से से खाना छोड़, घर से बाहर एक पार्क की तरफ बढ़ गया। मम्मी के लगातार फोन से परेशान होकर, मैंने अपना मोबाइल फोन ही स्विच ऑफ कर दिया। पार्क के गेट से लगे एक बेंच पर बैठने ही वाला था कि इस ठंड भरी रात में नज़र एक शख्स की तरफ गई। जो एक पतली सी चादर ओढ़े, बिल्कुल अकेला एक बैग लिए बैठा था। कुछ किताबें खोल, उस बेंच से लगे लाइट के नीचे,वो किताबों में नज़रें गढ़ाए हुए था। ये भी शायद मेरी ही तरह गुस्से में घर से आया हो। मैंने अपनी जैकेट की चेन बंद कर पॉकेट में हाथ डाला और वहीं पास में ही बैठ गया। रात के तकरीबन दस बजे होंगे। हम दोनों के सिवा यहां कोई तीसरा नज़र नहीं आ रहा था। इसलिए मेरी नज़र बार बार उसी पर जा रही थी। मगर उसने मुझे एक बार भी नहीं देखा।उसे देख ये महसूस हो रहा था कि उसे ठंड लग रही थी। उत्सुकतावश मैंने ही पूछ लिया
"तुम भी..घरवालों से नाराज हो..क्या..?"
उसने मेरी तरफ देखा..फिर कुछ सोचने लग गया
"मैं आप..ही से पूछ..रहा हूँ"
मैंने फिर से उससे पूछा। उसने पहली बार किताबों को छोड़ मेरी तरफ देख कर कहा
"नही भाई..मैं उनसे क्यूं नाराज होऊंगा,वो तो मुझसे मीलों दूर हैं"
"तो इतनी..रात को यूं यहां..?"
उसने बड़ी उदास होकर कहा
"यहां जिस कमरे में रहता था,उन्होंने अचानक वो खाली करा दिया, उनकी कोई दूर की रिश्तेदार आईं हैं, अब वहीं रहेंगी। एक कमरे की बात हुई है, पर वो परसों से मिलेगा.. कोई होटल ले नहीं सकता अभी..उतने पैसे.."
उसकी बातें खत्म भी नहीं हुई कि उसके मोबाइल पर किसी का कॉल आ गया
"हेल्लो माँ!.. हां माँ.. खाना खा लिया..अभी..अभी खाया माँ.. हां माँ ठीक से हूँ....पापा को बोलना..वो मेरे पैसे के लिए परेशान नहीं होंगे.मैं मैनेज कर लूंगा..नहीं माँ उतनी ठंड नहीं है यहां.. हां माँ मिल जाएगा.. हां माँ.. बाय.. माँ"
फोन रखते रखते उसकी आँखें भीग आईं थीं, उसे देख मैं आत्मग्लानि से भर अपने फोन को तुरंत ऑन किया। मम्मी का फोन अब भी आ रहा था
"हेल्लो, कहाँ है बेटे? कब से फोन कर रही हूँ...घर आ जा जल्दी..पापा ने भी अभी तक खाना नहीं खाया है"
"आ रहा हूँ..मम्मी, अच्छा सुनो..वो आगे वाला खाली पड़ा कमरा, दो दिनों के लिए किसी को मिल सकता है क्या?"
मैंने मम्मी से उस लड़के की पूरी बात बता दी। फोन पापा ने ले लिया
"ले आ उसे भी..और सुन..बात बात पर, घर छोड़ कर नहीं जाते"
पापा की आवाज में मेरे लिए जो दर्द था, उसने मेरी आँखों में भी आंसू ला दिए थे।
"हां पापा.."
मैं उस लड़के का बैग उठा, उसके साथ, घर की ओर चल पड़ा। घर क्या होता है, आज इस बेघर ने..मुझे समझा दिया है.!

29/10/2023

कमाल ये नहीं कि
वो 'झूठ' बोलता है!
कमाल ये है कि तुम अब भी
'ऐतबार' करते हो!! 😂😎😅

29/10/2023

काँग्रेस के समय रुपया गिरता था तो PM की इज़्ज़त गिरती थी, क्योंकि उनकी इज़्ज़त थी ।
अब रुपया गिर रहा है पर इज़्ज़त नही गिर रही हैं !अब इज़्ज़त है ही नही तो गिरेगी कहा से.?😂😂

28/10/2023

जब तक एक दूसरे की मदद करते रहेंगे, तब तक कोई भी नहीं गिरेगा चाहे व्यापार हो, परिवार हो या फिर समाज।
संजीव शेरपुर

27/10/2023

पोस्ट करना मेरा अधिकार है..पोस्ट पर कमेंटस और लाईक करना आपकी जिम्मेदारी है..
और जिम्मेदारी से भागना
कायरता है...!
😆😅

27/10/2023

*दैनिक साथी ब्रेकिंग*
*नायब सिंह सैनी को बनाया गया हरियाणा बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष*
*ओम प्रकाश धनखड़ को बीजेपी के राष्ट्रीय सचिव की जिम्मेदारी*

27/10/2023

गाजा में 7000 मनुष्यों की हत्या के बाद भी रक्तपात और हिंसा का दौर थमा नहीं। इन 7000 लोगों में से 3000 मासूम बच्चे थे।

कोई ऐसा अंतरराष्ट्रीय कानून नहीं, जिसे कुचला न गया हो। कोई ऐसी मर्यादा नहीं, जिसे तार-तार न किया गया हो। कोई ऐसा क़ायदा नहीं, जिसकी धज्जियाँ न उड़ी हों।

इंसानियत कब जागेगी? कितनी जानों के जाने के बाद। कितने बच्चों की बलि के बाद।

क्या मनुष्य होने की चेतना बची है? क्या वह कभी थी भी?

27/10/2023

सुख और दुख - जीवन के दो अटूट साथी हैं।जिन जिन परिस्थितियों से मनुष्य गुजरता है,वह अपनी भावनाओं को तदनुसार प्रकट करता रहता है।कभी स्वार्थवश अपनी असली प्रतिक्रियाओं को छुपा कर दिखावे का भी प्रदर्शन करता है ।कई बार मन करता है कि इस लम्बे जीवन के अरसे में ज़िन्दगी के किन किन हालातों से गुजरा हूँ ,उन सबको ब्यान करके मन हल्का करलूं,तब बहुत सारी बाधाएँ सामने आ जातीं हैं और कोई आहत न हो,यह सोच कर फिर रूक जाता हूँ ।कभी मौक़ा मिला,दिल के सारे अरमानआपसे साँझे करूँगा ।

27/10/2023

कोई भी मेरे पास फेसबुक रिक्वेस्ट भेजता है वह अपना फोटो अवश्य लगाएं अनलॉक किये बिना और बगेर फोटो कि रिक्वेस्ट मान्य नहीं है क्योंकि बहुत फर्जी आईडी बनी हुई है धन्यवाद।

26/10/2023

ऐसी क्या गलती हुई बाबा
जो इतने दुख लिख दिए नसीब मे

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