घर कि बातें

घर कि बातें खुश रहने के लिए लोगों के भावनाओं को सम?

17/03/2025

कुछ घरों मे ना पैसों की कमी होती है ना सुख सुविधाओ की।
कमाने वाले अच्छा कमा रहे होते हैं
मगर फिर भी उन घरों मे शांति नही रहती क्योंकि घर की मुर्ख औरतें बेवजह कलह करके उन घरों को नरक बनाए रखती है।

02/03/2025

महिलाओं से पूछा गया कि
आप अपनी ससुराल की समस्या पति से क्यों नहीं कहती 🤔
तब महिला ने बहुत सुंदर जबाब दिया कि, मलेरिया के बारे मे मच्छर से क्या बात करनी... 🤣🤣🤣

17/01/2025
एक कर्मचारी कम्पनी के सभी कामों से बचता था लेकिन बॉस को मक्खन लगाने में बड़ा माहिर था.....।वह बॉस के आदेश के अनुसार सभी क...
17/01/2025

एक कर्मचारी कम्पनी के सभी कामों से बचता था लेकिन बॉस को मक्खन लगाने में बड़ा माहिर था.....।

वह बॉस के आदेश के अनुसार सभी काम करता था। ऑफिशियल काम को छोड़ कर वह बॉस के सभी निजी काम जैसे उनके बेटे की कॉलेज फीस जमा करना, बेटी की डांस कॉस्ट्यूम खरीदना, उनकी कार की सर्विसिंग का काम, उनके बेटे का प्रोजेक्ट पूरा करना, यानी लगभग सब कुछ करता था इसलिए जाहिर था कि, वह बॉस का पसंदीदा था उसे सभी प्रोत्साहन और इन्क्रीमेंट समय से मिलता था और दूसरी तरफ बाक़ी कर्मचारी , ऑफ़िशियल काम पूरा करने पर भी बॉस की डाँट खाते रहते थे ।

एक दिन अचानक बॉस की मां के निधन की खबर मिली। सारे कर्मचारी बहुत उदास चेहरे के साथ उनके घर भागे जैसे उनकी ही माँ का देहांत हो गया हो.......

और हैरानी की बात यह थी कि ऐसे वक्त में वह बन्दा बॉस के घर के आस पास भी नहीं देखा गया, जिसके बारे में हर कोई कयास लगा रहा था......
कि वह अनुपस्थित कैसे..

अब अन्य कर्मचारियों ने माल्यार्पण से सुसज्जित वाहन की व्यवस्था की और बॉस की मां को श्मशान ले जाया गया...

लेकिन जब सब शवदाह गृह पहुंचे तो पहले से ही 16 शव बिजली से जलने के लिए कतार में थे। प्रत्येक शरीर को जलने में लगभग 1 घन्टा लग रहा था .... यानी कि कुल मिलाकर सूर्यास्त से पहले दाह संस्कार संभव नहीं था। बॉस का चेहरा लाल हो रखा था और बाक़ी सब भी परेशान थे......

अचानक कतार में पड़े 16 शव में से दूसरा शव उठ बैठा .......

उपस्थित सब लोग मारे डर के भाग खड़े हुए.....

बाद में पूर्ण आश्चर्य के साथ पता चला कि यह कोई शव नहीं था बल्कि वही बन्दा था.....

उसने तुरंत बॉस को बताया ...

श्रीमान, माफ़ी चाहूँगा सुबह से आपके घर नहीं आ पाया था क्योंकि जैसे ही आपकी माता जी के देहांत का समाचार सुना और देखा कि सब आपके घर की तरफ भाग रहे हैं तो ख्याल आया कि पहले यहां का भी इंतजाम देख लूँ और देखा तो पाया कि जब आप बॉडी लेकर आयेंगे तो शाम तक मुश्किल से नंबर आ पायेगा । आज तो बस आपके खातिर सुबह से ही आपकी माता जी का नंबर लगा दिया सर सुबह 8 बजे से ही लाश बनकर लेटा हुआ हूं यहाँ..

सब उसकी प्रतिबद्धता के स्तर को देखकर दंग रह गए। और बॉस कभी उसको बड़े प्यार से देखते और कभी बाक़ी कर्मचारियों को खा जाने वालीं निगाहों से.......!!


पुरुष की प्रतिष्ठा उसकी स्त्री तय करती है और स्त्री का सौंदर्य उसका पुरुष :- कुछ तस्वीरें बहुत सुन्दर होती हैं। इतनी सुन...
01/12/2024

पुरुष की प्रतिष्ठा उसकी स्त्री तय करती है और स्त्री का सौंदर्य उसका पुरुष :-

कुछ तस्वीरें बहुत सुन्दर होती हैं। इतनी सुन्दर कि उन पर मोटी किताब लिख दी जाय फिर भी बात खत्म न हो... इस तस्वीर को ही देखिये, जाने कितने अनसुलझे प्रश्नों के उत्तर हैं इस तस्वीर में.......

स्त्रियों के पांव बहुत सुन्दर होते हैं। इतने सुन्दर, कि सभ्यता उन पांवों की महावर वाली छाप अपने आँचल में सँजो कर रखती है। पुरुषों के पांव उतने सुन्दर नहीं होते...उभरी हुई नशें, निकली हुई हड्डियां, फ़टी हुई एड़ियां... ठीक वैसे ही, जैसे मोर के पांव सुन्दर नहीं होते......

मैं ठेंठ देहाती की तरह सोचता हूँ। एक आम देहाती पुरुष अपने पैरों को केवल इसलिए कुरूप बना लेता है, ताकि उसकी स्त्री अपने सुन्दर पैरों में मेहदी रचा सके। स्त्री के पांव में बिवाई न फटे, इसी का जतन करते करते उसके पांव में बिवाई फट जाती है.....

स्त्री नख से शिख तक सुन्दर होती है, पुरुष नहीं। पुरुष का सौंदर्य उसके चेहरे पर तब उभरता है जब वह अपने साहस के बल पर विपरीत परिस्थितियों को भी अनुकूल कर लेता है।

ईश्वर ने गढ़ते समय पुरुष और स्त्री की लंबाई में थोड़ा सा अंतर कर दिया। पुरुष लंबे हो गए, स्त्री छोटी गयी। इस अंतर को पाटने के दो ही तरीके हो सकते हैं। या तो स्त्री पांव उचका कर बड़ी हो जाय, या पुरुष माथा झुका कर छोटा हो जाय... बाबा लिखते हैं, जब राजा जनक के दरबार में स्वयम्बर के समय माता भगवान राम को वरमाला पहनाने आयीं, तो प्रभु उनसे ऊंचे निकले। माता को उचकना पड़ता, पर प्रभु ने स्वयं ही सर झुका लिया। दोनो बराबर हो गए... ....

वहीं से तो सीखते हैं हम सबकुछ... स्त्री पुरुष सम्बन्धों में यदि प्रेम है, समर्पण है, सम्मान है, तो बड़े से बड़े अंतर को भी थोड़ा सा उचक कर या सर नवा कर पाट दिया जा सकता है।

दरअसल सम्बन्धों में सत्ता देह के अनुपात की नहीं होती। दो व्यक्तियों के बीच बराबरी न सौंदर्य के आधार पर हो सकती है, न शारीरिक शक्ति के आधार पर... बस सम्वेदनाओं में समानता हो तो दोनों बराबर हो जाते हैं। सियाराम के सौंदर्य की बात तो कवियों की कल्पना से तय होती रही है, तत्व यह है कि वियोग के दिनों में वन वन भटक कर भी राम हर क्षण सीता के रहे, और स्वर्ण लंका की वाटिका में रह कर भी सीता हर क्षण बस राम की रहीं... दोनों की सम्वेदना समान थी, सो दोनो सदैव बराबर रहे......

गांव के बुजुर्ग कहते हैं, पुरुष की प्रतिष्ठा उसकी स्त्री तय करती है और स्त्री का सौंदर्य उसका पुरुष... दोनों के बीच समर्पण हो तभी उनका संसार सुन्दर होता है।

वैसे सौंदर्य की परिभाषा में तनिक ढील दें तो मनुष्य के सबसे सुंदर अंग उसके पांव ही होते हैं। इतने सुंदर, कि उन्हें पूजा जाता है।

🙏

डेढ़ महीना गांव में ठहर जाओ,तो गाँववाले बतियाएंगे "लगता है इसका नौकरी चला गया हैसुबह दौड़ने निकल जाओ तो फुसफुसाएंगे  “लग...
17/11/2024

डेढ़ महीना गांव में ठहर जाओ,तो गाँववाले बतियाएंगे "लगता है इसका नौकरी चला गया है
सुबह दौड़ने निकल जाओ तो फुसफुसाएंगे “लग रहा इसको शुगर हो गया है ...."
कम उम्र में ठीक ठाक कमाना शुरू कर दिये तो आधा गाँव मान लेगा कि बाहर में दू नंबरी काम करता है।
जल्दी शादी कर लिये तो “बाहर कुछ इंटरकास्ट चक्कर चल रहा होगा इसलिये बाप जल्दी कर दिये "।
शादी में देर हुईं तो_" ओकरे घरवा में बरम बा!....लइका मांगलिक है कवनो गरहदोष है, औकात से ढेर मांग रहे है "।
बिना दहेज़ का कर लिये तो “ लड़की प्रेगनेंट थी पहले से, इज़्ज़त बचाने के चक्कर में अरेंज में कन्वर्ट कर दिये लोग"।
खेत के तरफ झाँकने नही जाते तो “अबहिन बाप का पैसा है तनी"।
खेत गये तो “ देखे ना,अब चर्बी उतरने लगा है "।
मोटे होकर गांव आये तो कोई खलिहर ओपिनियन रखेगा “ बीयर पीता होगा "।
दुबले होकर आये तो “ लगता है गांजा चिलम पीता है टीबी हो गया "।
बाल बढ़ा के जाओ तो, लगता है, ई कोनो ड्रामा कंपनी में नचनिया का काम करता है....।
कुल मिलाकर गाँव में बहुत मनोरंजन है.....

इसलिये वहाँ से निकले लड़के की चमड़ी इतनी मोटी हो जाती है कि आप बाहर खडे होकर गरियाइये वो या तो कान में इयरफोन ठूंस कर सो जायेगा या फिर उठकर आपको लतिया देगा लेकिन डिप्रेशन में न जायेगा.......।
इस पर ज़ब गाँव से निकला लड़का बहुत उदास दिखे तो समझना कोई बड़ी त्रासदी है......

03/11/2024

जो माँ 25-30 साल तक घर की व्यवस्था अपने हिसाब से देखते और संभाले या रही हैं,उस घर की व्यवस्था को बहु कुछ ही महीनों में बदल देना चाहती हैं!सब्र रखिए सास को बहु से सास बनने में समय लग था

03/11/2024

आदमी जन्मजात गूँगा नहीं होता,माँ और पत्नी के बीच फस जाता है!

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