30/06/2022
#हूल_दिवस (30 जून)
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30 जून 1855 को क्रांतिकारी नेता सिद्धू मुर्मू एवं कान्हू मुर्मू के आह्वान पर राजमहल के भोगनाडीह में 20 हजार संतालों ने ब्रिटिश हुकूमत के अधीन महाजनी प्रथा और सरकार की बंदोबस्ती नीति के खिलाफ विद्रोह किया था।
इस विद्रोह का मूल कारण था आदिवासियों से 50 प्रतिशत से 500 प्रतिशत तक खेती-कर वसूल करना। इस अन्याय के खिलाफ जब भाई सिदो, कान्हु, चाँद, भैरव और बहनें फूलो झानो ने आवाज़ उठाई तो सैकड़ो लोगों ने इनका स्वागत किया और अपने परम्परागत अस्त्र तीर-धनुष के साथ भोगनाडीह गाँव में जमा होकर खुद को स्वतंत्र घोषित किया तथा स्थानीय जमींदार, पूँजीपतियों, सूदखोरों के खिलाफ जंग छेड़ने की शपथ ली। इसके लिए उनका एकमात्र नारा था - "जुमीदार, महाजन, पुलिस राजदेन आमला को गुजुकमाड़" अर्थात "जमींदार, महाजन, पुलिस और सरकारी अमलों का नाश हो।" यह क्रांति भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के उग्र क्रांतियों में से एक था, जिसमें सैकड़ो लोग शहीद हुए थे।
कहा जाता है कि सिदो मुर्मू को अंग्रेज़ पुलिस ने पकड़ लिया और कान्हु एक एनकाउंटर में मारा गया। तब से इस तिथि को क्रांति दिवस यानि ‘हूल दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।
हूल जोहार
🎤🎤_ Mr. Shashti Shah Parte_
_ Social Worker Of Dhanora Seoni Madhya Pradesh_
Mo.7067642449
#हूल_जोहार
🙏🙏जय सेवा🙏🙏
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