18/03/2023
हिटलर को चुनावी फंड चाहिए..
जर्मनी में लोकतंत्र था, विश्वयुद्ध और मंदी के बाद हालात सुधर रहे थे। लेकिन अब भी बेरोजगारी थी, गरीबी थी, दिक्कतें थीं।
इन सबका जादुई समाधान एक आदमी के पास था- एडोल्फ़ हिटलर !! चमत्कारी नेता...
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तो चुनाव सर पर थे और नाजियों के पास पैसे की कमी थी। पिछले चुनाव में ठीक ठाक सीटें आयी थी, लेकिन नाजी सत्ता से दूर थे। पार्टी के श्रीमान ॐ हरमन गोयरिंग, रैछस्टेग के स्पीकर थे, मने लोकसभाध्यक्ष थे।
बर्लिन के पॉश इलाके में उनका सरकारी पैलेस था। उसी जगह एक पार्टी हुई। जर्मनी के 25 बड़े उद्योगपति चाय पीने आये। तमाम पार्टी नेताओं से मिले। शैम्पेन पी, और फिर 90 मिनट तक हिटलर जी का भाषण सुना।
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हिटलर जी बोले- मितरों, जर्मनी खतरे में है। हमको जर्मनी को बचाना है। वो हम बचा लेंगे, तुम बस रोकड़ा गिनो। थोक के भाव मे हमारी जेब भरो।
लेकिन उद्योगपति को देश से क्या, वे नाक भौ सिकोड़कर सूरतें बनाते रहे।
अब हिटलर ने पैंतरा बदला, समझाया।
"देश मे जो लोकतंत्र है, उसमे आपके हितों की योजना नही बनती। कामगारों के घण्टे तय हैं, मिनिमम वेजेस तय है, हड़ताल का अधिकार है। बोनस देने पड़ते हैं, छुट्टी देनी पड़ती है। ये सब आपके लिए नुकसान का सौदा है"
"आपके सामने दो विकल्प हैं"
अब हिटलर बेहद गंभीर था, और माहौल भी। सब सुन रहे थे- "मौजूदा लोकतंत्र में हमारे सामने वामपन्थी हैं। अगर हम नही, तो वे सत्ता आएंगे। वे मजदूरों के हित की बात करेंगे, मौजूदा श्रम कानून कड़े होंगे। आपके हाथ पैर बंध जाएंगे। दूसरा विकल्प, मेरी नाजी पार्टी है। जो यूनियन खत्म करेगी"
"काम के घण्टे बढ़ाएगी, हड़ताल अवैध घोषित करेगी। नए ठेके आपको मिलेंगे। बिजली के, खदानों के, कारो के, कंज्यूमर गुड्स के, कृषि उत्पादों के, इंफ्रास्ट्रक्चर के ठेके आपके हाथ होंगे। बैंक खुले हाथ से ऋण देंगे"
"आपका विरोध, हमारा विरोध होगा। सरकार का, देश का विरोध होगा। आपको अपने हित चाहिए, तो आगे बढिये। खुले हाथ से नाजी दल को पैसे दीजिए। आपका एक एक पैसा, एक नया जर्मनी बनाएगा"
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हिटलर तीन मिलियन ड्यूश मार्क की मांग थी। चार दिन में पूरी हो गयी। चुनाव लड़ा गया, झूमकर। हिटलर ने पसर्नल प्लेन लिया, दिन में चार चार रैली की। रेडियो, सिनेमा, पोस्टर बाजी हर चीज में नाजी पार्टी मीलों आगे रही।
मगर बहुमत नही आया। वामपन्थी आगे थे। हिटलर ने तीसरे चौथे नम्बर की पार्टी से गठबंधन किया, मिलीजुली सरकार का चांसलर बना। अभी बहुमत साबित करना बाकी था।
फ्लोर टेस्ट के पहले संसद में आग लग गयी। वहीं एक वामपन्थी भी पकड़ लिया गया। उनकी पार्टी पर संसद जलाने का इल्जाम धर सारे सांसद जेल ठूंस दिए। कुछ देश से भाग गए। फ्लोर टेस्ट में कोई आया नही। हिटलर का बहुमत सिद्ध हो गया।
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जल्द ही इनेबलिंग एक्ट आया। इसका मतलब, हिटलर के कानूनों को संसद की अनुमति की जरूरत नही। असल मे संसद ने म्यूट होकर खुद ही ये पावर हिटलर जी के श्रीचरणों में रख दी।
अब हिटलर ने टैंक, तोप, शिप, जहाज, एयरपोर्ट, सड़क, शौचालय ( नही, शौचालय नही) के ठेके बांटे। वादे के मुताबिक, श्रमिको के अधिकार खत्म किये। काम के घण्टे 8 से बढ़ाकर 12 हो गए। यूनियन सब बैन हुई, हड़ताल देशद्रोह।
हिटलर के उद्योगपतियो मिला उम्मीद से दुगना। आखिर जितने ज्यूस थे, उन्हे छांटकर या तो गैस चेम्बर में भेज दिया जाता, अथवा स्लेव लेबर बनाकर फैक्टरी में।
मशहूर शिण्डलर्स लिस्ट वाला शिंडलर भी, स्लेव लेबर का प्रोफिटीयर था, एक्स-भक्त था।
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एक अच्छा उद्योगपति वो नही होता जो मेहनत, लगन, इनोवेशन से बिजनेस का प्रबंधन करे। वो होता है, जो ऐसे राजनेता को सही वक्त पर चन्दा दे, जो उनके फायदे के लिए देश और जनता को दांव पर लगाने को तैयार हो।
आप भी 1000-500 करोड़ रखते हैं। फोर्ब्स में आना चाहते हैं, तो आसपास तलाशिये। कि क्या किसी हिटलर को चुनावी फंड की जरूरत है??