26/06/2026
छत्रपति शाहू जी महाराज (राजर्षि शाहू महाराज) किन152वीं जयंती विशेष -
राजर्षि शाहू जी महाराज कोल्हापुर रियासत के प्रसिद्ध शासक, सामाजिक सुधारक और शिक्षाप्रेमी थे। उनका जन्म 26 जून 1874 को कागल (कोल्हापुर, महाराष्ट्र) में यशवंतराव घाटगे के रूप में हुआ था। वे शिवाजी महाराज की वंश परंपरा से जुड़े भोंसले राजवंश के थे। महारानी आनंदीबाई ने उन्हें गोद लिया और 1894 में मात्र 20 वर्ष की आयु में कोल्हापुर की गद्दी संभाली। उन्होंने 1922 तक शासन किया।
खास बातें और योगदान:
सामाजिक न्याय और आरक्षण के अग्रदूत: 1902 में उन्होंने भारत में सबसे पहले 50% आरक्षण की नीति लागू की — सरकारी नौकरियों और शिक्षा में पिछड़ी जातियों (Non-Brahmin) के लिए। यह सामाजिक समानता की दिशा में क्रांतिकारी कदम था।
शिक्षा क्रांति:
मुफ्त और अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा (1917) लागू की, जो सभी जाति-धर्म के बच्चों के लिए थी।
लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा दिया, लड़कियों के लिए स्कूल, हॉस्टल और छात्रवृत्तियां शुरू कीं।
कई हॉस्टल, स्कूल और कॉलेज स्थापित किए (जैसे राजाराम कॉलेज)।
पिछड़े वर्गों, दलितों और महिलाओं के लिए विशेष सुविधाएं दीं। उन्होंने डॉ. बी.आर. आंबेडकर जैसे नेताओं का भी समर्थन किया।
किसानों और समाज के उत्थान: सिंचाई नीतियां शुरू कीं, भूमि सुधार किए और किसानों की स्थिति सुधारने के प्रयास किए।
महिलाओं के अधिकार: बाल विवाह पर रोक, विधवा पुनर्विवाह को बढ़ावा, देवदासी प्रथा पर प्रतिबंध जैसी सुधार लाए।
व्यक्तित्व: वे "राजर्षि" उपाधि से सम्मानित थे। लोकप्रिय राजा के रूप में जाने जाते थे, जो जातिवाद के खिलाफ थे और समानता के पक्षधर थे। उनका निधन 6 मई 1922 को मात्र 47 वर्ष की आयु में हुआ।
शाहू महाराज का योगदान आज भी महाराष्ट्र और पूरे भारत में सामाजिक न्याय, शिक्षा और समावेशी विकास की प्रेरणा है।
नोट: कभी-कभी लोग 18वीं शताब्दी के मराठा सम्राट शाहू (शिवाजी के पौत्र) को भी छत्रपति शाहू कहते हैं, लेकिन "शाहू जी महाराज" से आमतौर पर कोल्हापुर वाले राजर्षि शाहू महाराज ही समझे जाते हैं।