05/06/2026
रासायनिक खेती छोड़ जैविक खेती अपनाने के लिए किसानों को करें जागरूक - कलेक्टर श्री ऋतुराज सिंह
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प्रस्फुटन समिति की महिलाएं बच्चों के सही पोषण के प्रति माताओं को जागरूक करें
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कलेक्टर श्री ऋतुराज सिंह की अध्यक्षता में पंख कार्यक्रम के तहत स्वयंसेवी संस्थाओं की जिला स्तरीय बैठक आयोजित
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कलेक्टर श्री ऋतुराज सिंह की अध्यक्षता में दृष्टि योजना अंतर्गत पंख कार्यक्रम के तहत स्वयंसेवी संस्थाओं की जिला स्तरीय बैठक जिला पंचायत सभाकक्ष में आयोजित हुई। बैठक में पंख कार्यक्रम अंतर्गत विभिन्न क्षेत्रों पर्यावरण जल, ऊर्जा, वन, जैविक कृषि, प्राकृतिक कृषि, नशामुक्ति, शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलंबन, ग्राम व महिला सशक्तिकरण स्वदेशी, रोजगार एवं नागरिक कर्तव्य में कार्य कर रहे स्वयंसेवी संस्थाओं के कार्यों एवं उनके क्रियान्वयन पद्धति को विस्तार प्रदान करने पर चर्चा की गई। बैठक में सीईओ जिला पंचायत श्रीमती ज्योति शर्मा, डीएफओ श्री अमित सिंह, संभाग समन्वयक जन अभियान परिषद श्री शिवप्रसाद मालवीय, जिला समन्वयक डॉ सुप्रीति यादव सहित अन्य विभागीय अधिकारी एवं स्वयंसेवी संस्थाओं के सदस्य उपस्थित थे।
बैठक में कलेक्टर श्री ऋतुराज सिंह ने जन अभियान परिषद के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि परिषद का जनसंवाद और पहुंच बहुत मजबूत और प्रभावी है। इसके माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में बदलाव के अनेक बड़े कार्य किए जा सकते हैं। वर्तमान में जन अभियान परिषद द्वारा बहुत अच्छा कार्य किया जा रहा है, लेकिन इसे और बेहतर उपयोग में लाने के लिए हमें सुनियोजित तरीके से आगे कार्य करना होगा।
कलेक्टर श्री सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा यह वर्ष में 'कृषि वर्ष' के रूप में मनाया जा रहा है। 'कृषि वर्ष' अंतर्गत जन अभियान परिषद द्वारा किसानों को जैविक खेती की ओर लाने के लिए विशेष रूप से प्रेरित किया जाए। उन्होंने कहा कि खेतों में यूरिया का उपयोग लगातार बढ़ता जा रहा है। इसे कम करने के लिए किसानों के बीच जागरूकता बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है। हमें किसानों को समझाना होगा कि रासायनिक खेती से जैविक खेती की ओर बढ़ना केवल भूमि के स्वास्थ्य के लिए ही नहीं, बल्कि हमारे स्वयं के स्वास्थ्य और आने वाली पीढ़ियों के लिए भी बेहद जरूरी है।
कलेक्टर श्री सिंह ने कहा कि यदि किसी किसान के पास 10 बीघा जमीन है, तो उसे शुरुआती तौर पर कम से कम 2 बीघा जमीन में जैविक खेती करने के लिए प्रेरित किया जाए। धीरे-धीरे इसके दायरे को बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि जैविक फसल का दाम बाजार में ज्यादा मिलता है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि होगी। जन अभियान परिषद के सदस्य गांव-गांव जाकर किसानों को रासायनिक खेती के नुकसान और जैविक खेती के फायदों के प्रति जागरूक करें।
कलेक्टर श्री सिंह ने कहा कि आगामी सीजन में किसान भाइयों को खेतों में नरवाई न जलाने के लिए प्रेरित करें। किसानों को बताये कि नरवाई जलाने से मिट्टी के जरूरी पोषक तत्व और मित्र कीट पूरी तरह नष्ट हो जाते हैं, जिसका सीधा असर जमीन की उपजाऊ क्षमता पर पड़ता है। नरवाई प्रबंधन उपकरणों को खरीदने के लिए किसानों को प्रेरित करें। नरवाई प्रबंधन उपकरणों पर शासन द्वारा सब्सिडी भी प्रदान की जा रही है। किसान भाई अपनी सुविधा के अनुसार कोई सा भी नरवाई प्रबंधन उपकरण खरीद सकते हैं। कलेक्टर श्री सिंह ने कहा कि जन अभियान परिषद द्वारा बरसात में पौधा रोपण किया जाये और पौधों का बड़े होने तक ध्यान रखा जाये। उन्होंने कहा कि पौधारोपण के बाद पौधे की फोटो पोर्टल पर भी अपलोड करें।
कलेक्टर श्री सिंह ने कहा कि कुपोषण को खत्म करने के लिए प्रस्फुटन समिति की महिलाएं गांव में घर-घर जाकर महिलाओं को जागरूक करें। ग्रामीण महिलाओं और माताओं को बच्चों के स्वास्थ्य और सही पोषण के प्रति जागरूक करें। उन्होंने कहा कि अक्सर बच्चे को भूख लगने पर बाजार के चिप्स, कुरकुरे या अन्य जंक फूड खिला देते हैं। इससे बच्चों का पेट तो भर जाता है, लेकिन उनके शरीर को जरूरी पोषक तत्व नहीं मिलते। नतीजा यह होता है कि बच्चे मुख्य भोजन नहीं खा पाते हैं और धीरे-धीरे कुपोषण का शिकार हो जाते हैं। महिलाओं को जागरूक करें कि वे बच्चों को भूखा न रखें और उन्हें बाजार की हानिकारक चीजों की बजाय घर का बना हुआ पौष्टिक खाना खिलाएं। समिति की महिलाएं गांव के सरकारी स्कूलों जाकर बच्चों को अच्छे स्वास्थ्य के संबंध में जानकारी दें।
संभाग समन्वयक जन अभियान परिषद श्री शिवप्रसाद मालवीय ने बताया कि मध्यप्रदेश शासन के निर्देशानुसार प्रदेशव्यापी ‘’जल गंगा संवर्धन अभियान’’ अंतर्गत जिले में जन अभियान परिषद द्वारा जल स्रोतों के संरक्षण, संवर्धन और पुनर्जीवन के कार्य किये जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि जिले में जन अभियान परिषद की 172 संस्थाएं है, जो पूरी सक्रियता से कार्य कर रही हैं। उन्होंने बताया कि पर्यावरण संरक्षण के लिए जन अभियान परिषद द्वारा ग्राम स्तर पर विशेष नर्सरियां तैयार की जा रही हैं। इन स्थानीय नर्सरियों के माध्यम से आगामी वर्षा ऋतु में किए जाने वाले वृहद पौधारोपण अभियान के लिए पौधों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने पंख कार्यक्रम का उद्देश्य भी बताया।