हमारा सपना
हमारे सफर की मंजिल है स्वराज। आज़ादी से पहले स्वराज का मतलब था अंग्रेजों की गुलामी से मुक्ति। आज इसका मतलब है जीवन के हर पहलू में हर किस्म की पराधीनता से मुक्ति -- भ्रष्टाचार के दानव से मुक्ति, भय और भूख की बेड़ियों से मुक्ति, शोषण और अन्याय के सामने बेबसी से मुक्ति, खुद अपने दिल और दिमाग के बंधनो से मुक्ति। हम ऐसे देश और ऐसी दुनिया का सपना देखते हैं जहां हर इंसान अपनी खुदी को बुलंद कर
सके, अपनी खुशी ढूंढ सके, अपनी आत्मा की आवाज़ को सुन और सुना सके। हम चाहते हैं एक ऐसी:
राजनैतिक व्यवस्था , जहाँ देश और देश का हर राज्य, हर गांव, हर बस्ती अपने-अपने दायरे में आजाद हों, हर स्तर पर पारदर्शिता और जवाबदेही हो, जहाँ तंत्र पर लोक का अनुशासन हो।
अर्थव्यवस्था , जहाँ हर हाथ को काम हो, हर काम का मान हो, हर काम को इतना दाम हो कि हर कोई अपनी मेहनत की कमाई से खुशहाल जिंदगी जी सके। मुनाफ़े की मर्यादा हो ताकि किसी का भोग बाकी सबकी खुशी न छीने, हमारा विकास आने वाली पीढ़ियों के वाजिब हिस्से और पर्यावरण को नुकसान पंहुचा कर न हो ।
सामजिक व्यवस्था , जहाँ राज्य, समुदायों और इंसानों के बीच या आपस में किसी तरह की जोर-जबरदस्ती न हो, शोषण, भेदभाव, और नफरत न हो, जहाँ जीवन के अवसर जन्म के संयोग से न बंधे हों ।
शिक्षा व्यवस्था , जो सबको, समान रूप से सार्थक ज्ञान और चेतना दे, इंसान को इंसान से जोड़े, सबको देश और दुनिया की सांस्कृतिक विरासत से जोड़े, प्रश्न करने का साहस दे, उत्तर देने की क्षमता दे।
विश्व व्यवस्था , जहाँ देश और दुनिया के बीच, आदमी और औरत के बीच, अलग-अलग जाति, धर्म और संस्कृति के इंसान और इंसान के बीच तथा इंसान और प्रकृति के बीच समभाव हो।