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12/02/2026

वाह रे वाह श्री नरेंद्र सरकार!

नरेंद्र की अगुवाई वाली सरकार के फैसले भी कमाल के हैं। शून्य या बहुत कम अंक लाने वाले अब विशेषज्ञ डॉक्टर बनेंगे — और प्रवेश भी शुरू हो चुका है। 4 नंबर लाकर ऑर्थोपेडिक, 7 नंबर में गायनेकोलॉजी! वाह रे नए भारत की नई विकास की राह! अब मरीज का इलाज सही से होगा या सिर्फ “इलाज” नाम की औपचारिकता रह जाएगी?

SC/ST और OBC को UPSC की कोचिंग मुफ्त दी जा रही है, मानो देश का सारा टैक्स केवल वही देते हों। क्या उच्च जाति में आर्थिक रूप से कमजोर लोग हैं ही नहीं? या वे इस देश के नागरिक नहीं हैं?

देश को आखिर किस दिशा में ले जाया जा रहा है, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र जी? क्या लक्ष्य देश को मजबूत बनाना है या उसे पाकिस्तान, बांग्लादेश या श्रीलंका जैसी स्थिति में धकेलना? ऐसा प्रतीत होता है मानो सत्ता का स्वाद चखने के बाद अब उसे जीवनभर बनाए रखने की इच्छा हो। नीतियाँ भी कुछ ऐसी ही दिखाई देती हैं।

UGC जैसे निर्णयों में एक वर्ग को पहले से ही दोषी मान लेने की प्रवृत्ति दिखती है। प्रभु, समानता इस तरह कभी नहीं आएगी। समानता तब आएगी जब समाज से वास्तविक बुराइयाँ दूर होंगी। परंतु जब सरकार और नेता ही विभाजन की राजनीति करेंगे, तो स्वच्छ समाज कैसे बनेगा?

आज ऐसा लगता है कि भाजपा पहले धर्म के नाम पर समाज को बाँटती थी, और अब जाति के नाम पर विभाजन कर रही है। इसका प्रभाव पूरे देश पर पड़ रहा है। कुछ लोग धर्म और जाति के जाल में फँस चुके हैं, और उसका खामियाजा पूरा समाज भुगतता है।

अब समय आ गया है कि जनता स्वयं जागरूक हो। नेताओं और पार्टियों से सतर्क रहे — क्योंकि सत्ता की राजनीति में कोई किसी का सगा नहीं होता। देश सबसे ऊपर है, और देश की एकता ही उसकी असली ताकत है।



Jai hind.

10/02/2026

टूटी चप्पल पहन के मंसुख बोरी उठा रहा है,
और हमारा देसी हीरो बंसी बजा रहा है,
देश हमारा कहाँ जा रहा है?
कहो नरेंद्र, मज़ा आ रहा है?

जनता सवालों में उलझा जा रहा है,
देश किस दिशा में मुड़ता जा रहा है
कहो नरेंद्र, क्या सच में मज़ा आ रहा है?

03/01/2026

उन्नाव प्रकरण पर एक संतुलित दृष्टिकोण :

यह सकारात्मक संकेत है कि अब मीडिया केवल एकतरफा दृष्टिकोण तक सीमित न रहकर सभी पक्षों को सुनने का प्रयास कर रही है और ज़मीनी स्तर पर जाकर तथ्यों को समझने की कोशिश कर रही है। किसी भी संवेदनशील मामले में निष्पक्ष ग्राउंड रिपोर्टिंग अत्यंत आवश्यक होती है, ताकि समाज तक अधूरी या पूर्वाग्रहपूर्ण जानकारी न पहुँचे।

ग्राउंड रिपोर्ट में यह तथ्य सामने आया है कि जिन व्यक्तियों को मीडिया ट्रायल के माध्यम से वर्षों से अपराधी के रूप में प्रस्तुत किया गया, उनके बारे में स्थानीय लोगों की राय अलग है। उन्नाव के कई नागरिक उन्हें एक सामाजिक, मददगार और व्यवहारिक व्यक्ति के रूप में जानते रहे हैं। यह अंतर यह दर्शाता है कि न्यूज़रूम में बनी धारणा और स्थानीय अनुभवों के बीच एक खाई रही है। ऐसे में यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि यदि कोई व्यक्ति लंबे समय तक न्यायिक प्रक्रिया के दौरान कारावास में रहा हो, तो उसके सामाजिक और पारिवारिक जीवन को हुए नुकसान का उत्तरदायित्व कौन लेगा।

इस पूरे घटनाक्रम में कुलदीप सिंह सेंगर की पुत्री ऐश्वर्या सिंह सेंगर का आचरण उल्लेखनीय रहा है। उन्होंने शांति, गरिमा और तथ्यों के आधार पर अपना पक्ष सार्वजनिक रूप से रखा है, जो यह दर्शाता है कि किसी भी पक्ष को अपनी बात रखने का अवसर मिलना न्याय की मूल भावना है।

वहीं, मामले से जुड़े अन्य पहलुओं पर भी निष्पक्षता आवश्यक है। मीडिया में प्रस्तुत की गई कुछ छवियों और ज़मीनी वास्तविकताओं के बीच अंतर पर प्रश्न उठ रहे हैं, जिनका समाधान केवल भावनाओं के आधार पर नहीं बल्कि ठोस जांच और साक्ष्यों के माध्यम से ही संभव है। किसी भी पक्ष के चरित्र या पृष्ठभूमि पर निर्णय देना न तो सामाजिक रूप से उचित है और न ही कानूनी रूप से।

अतः न्यायपालिका से यह अपेक्षा है कि सभी साक्ष्यों, परिस्थितियों और गवाहियों का निष्पक्ष एवं तथ्यात्मक मूल्यांकन कर ही अंतिम निर्णय लिया जाए। यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो दोषी को कानून के अनुसार दंड मिले, और यदि आरोप असत्य पाए जाते हैं तो निर्दोष को न्याय और सम्मान दोनों प्राप्त हों।

सच्चा न्याय वही है जो बिना दबाव, बिना पूर्वाग्रह और केवल प्रमाणों के आधार पर किया जाए।

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01/01/2026

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कुलदीप सिंह सेंगर की बेटी की बात को सुनना भी उतना ही आवश्यक है, जितना किसी भी अन्य पक्ष की। साथ ही उनके गाँव-इलाके के लोगों की बातों और ज़मीनी हकीकत को समझना भी ज़रूरी है। सभी तथ्यों को बिना पूर्वाग्रह के पढ़ें, समझें और स्वयं आकलन करें कि सही और गलत क्या है।

कुछ महत्वपूर्ण बिंदु, जिन पर विचार किया जाना चाहिए:

1. पीड़िता ने घटना के समय (टाइमिंग) को बार-बार बदला है।

2. AIIMS की रिपोर्ट में पीड़िता की उम्र को लेकर तथ्य सही नहीं पाए गए।

3. पीड़िता का पूरा परिवार पहले से ही राजनीतिक और विवादित गतिविधियों में संलिप्त रहा है।

4. यह भी सामने आया है कि पीड़िता एक ड्राइवर के साथ घर से गई थी और किसी अन्य व्यक्ति से विवाह करना चाहती थी, जिसे उनके चाचा महेश करवाना चाहते थे।

5. CDR रिपोर्ट के अनुसार, जिस समय वह दुष्कर्म की बात कह रही है, उस समय वह अपने प्रेमी से फोन पर बातचीत कर रही थी, जबकि कुलदीप सिंह उस लोकेशन से काफ़ी दूर थे।

6. कुलदीप सिंह का नाम बाद में, लगभग दो महीने के बाद, मामले में जोड़ा गया।

7. पीड़िता के परिवार की राजनीतिक महत्वाकांक्षा शुरू से रही है।

8. पीड़िता की माँ ने MLA का चुनाव लड़ा था, जिसमें उन्हें लगभग 1542 वोट प्राप्त हुए थे।

9. पीड़िता के कई वीडियो वायरल हुए हैं, जिन्हें देखकर वह स्वयं को पीड़ित बताने वाली छवि से मेल नहीं खाते।

10. गाँव के कई लोग पीड़िता के चरित्र पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि कुलदीप सिंह को वे एक चरित्रवान व्यक्ति बताते हैं — क्या इस सामाजिक धारणा पर भी विचार नहीं होना चाहिए?

11. कुलदीप सिंह बार-बार नार्को टेस्ट कराने की बात कह रहे हैं, वहीं पीड़िता कहती हैं कि “नार्को टेस्ट आज तक किसी के साथ नहीं हुआ, इसलिए मैं भी नहीं कराऊँगी।” क्या यह बात सोचने योग्य नहीं है?

12. मुख्यधारा की मीडिया नोएडा में बैठकर बिना ज़मीनी रिपोर्ट के कुलदीप सिंह को दोषी ठहरा रही है। क्या मीडिया में इतनी हिम्मत नहीं कि पीड़िता से भी उतने ही कठोर सवाल पूछे जाएँ, जितने सबूतों के साथ सेंगर की बेटी सवाल उठा रही है?

13. क्या सिर्फ़ पीड़िता ही “देश की बेटी” है? क्या कुलदीप सिंह की बेटी देश की बेटी नहीं है?

14. क्या यह सोचने वाली बात नहीं कि एक बेटी, एक पत्नी और एक पूरा परिवार ऐसे हालातों को किस मानसिक पीड़ा के साथ झेल रहा होगा?

15. “जज बिक गए” जैसे बयान देना कितना उचित है, जबकि हमारा देश न्यायपालिका की गरिमा और विश्वास पर टिका हुआ है?

16. क्या एकतरफ़ा मीडिया ट्रायल सही है? क्या इससे केस प्रभावित नहीं होता?

17. अब पीड़िता बृजभूषण सिंह के बारे में भी उलटे बयान दे रही है — क्या यह भी सवालों के घेरे में नहीं आता?

18. यदि अंततः पीड़िता गलत पाई जाती है, तो क्या उसे भी सज़ा मिलेगी?

गलत, गलत ही होता है। लेकिन यदि यह सिद्ध हो जाए कि कुलदीप सिंह सेंगर के पक्ष में प्रस्तुत सबूत सही हैं, तो उनकी और उनके परिवार की खोई हुई प्रतिष्ठा और सम्मान कौन वापस करेगा?

इसलिए, निवेदन है कि भावनाओं से नहीं, तथ्यों और निष्पक्षता से सोचें। सच तक पहुँचने के लिए दोनों पक्षों को समान रूप से सुना जाना बेहद ज़रूरी है।

01/01/2026
01/01/2026

यह पेज जनता तक सच्चाई पहुँचाने के उद्देश्य से बनाया गया है। हो सकता है कि कुछ बातें कभी-कभी कड़वी या किसी को पक्षपाती लगें, लेकिन हमारा मकसद समाज के हित में काम करना है। समाज में हो रहे अच्छे कार्यों को लोगों तक पहुँचाना, गलत के खिलाफ आवाज़ उठाना, ज़रूरतमंदों की मदद करना और हर परिस्थिति में सत्य व न्याय का साथ देना ही इस पेज की मूल भावना है।
संभव है कि हमारी बातों से कुछ लोग असहमत हों, लेकिन हमारा विश्वास हमेशा सही के साथ खड़े रहने में है।

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