04/06/2026
4.6.2026
आज के संसार में जो व्यक्ति सत्य का पालन करता है, धर्म के मार्ग पर चलता है, न्याय का आचरण करता है, उसे बहुत कठिनाइयां सहन करनी पड़ती हैं। "उसको यह सत्य न्याय और धर्म का आचरण करना बहुत कष्टदायक लगता है। जहर पीने के बराबर लगता है।"
"परंतु इस धर्म आचरण का जो फल है, वह बहुत उत्तम और अमृत के समान अत्यंत सुखदायक होता है। वह परिणाम सामान्य लोगों को दिखाई नहीं देता। इसलिए उन्हें सत्य धर्म और न्याय के मार्ग पर चलने में रुचि नहीं होती।"
बुद्धिमान लोग इस बात को समझते हैं, कि हम जो सत्य धर्म न्याय का आचरण करेंगे, तो इससे हमें बहुत उत्तम सुख मिलेगा। "सामान्य लोग केवल भौतिक धन संपत्ति को ही सुख का साधन समझते हैं। यह उनकी भूल है।"
"वास्तव में जो व्यक्ति सत्य धर्म और न्याय के मार्ग पर चलता है, उसके पास भौतिक साधन भले ही कम हों। परंतु धर्म आचरण के फल स्वरूप ईश्वर उसे मन की जो शांति आनंद निश्चिंतता उत्साह आदि प्रदान करता है, वह सामान्य व्यक्ति को नहीं दिखती। यह उसी उत्तम आचरण का फल है, धर्म आचरण का फल है।"
इतना ही नहीं, यह तो बहुत थोड़ा सा फल है। "इसका बहुत सारा फल तो उसे अभी अगले जन्म में मिलेगा। जो कि उसे किसी अच्छे उत्तम धनवान विद्वान बलवान बुद्धिमान परिवार में जन्म मिलेगा। यह फल आम आदमी को दिखता नहीं, इसलिए उसकी रुचि उत्तम कर्मों के आचरण में नहीं बन पाती।"
अतः सब लोगों को सोचना चाहिए, कि भले ही आज हमें सच्चाई के मार्ग पर चलने से कष्ट हो रहा है, विष के तुल्य लग रहा है। कोई बात नहीं। "हमारे मन में जो शांति है, जो निर्भयता आनंद और उत्साह है, वह शांति आनंद निश्चिंतता उत्साह आदि झूठे बेईमान लोगों के जीवन में नहीं है। और हमारा अगला जन्म भी उत्तम मनुष्य का होगा। इस बात का भी उस सत्यवादी को संतोष होता है। इसलिए सत्य धर्म और न्याय के मार्ग पर ही चलना लाभकारी है।"
"अतः इस मार्ग पर चलना चाहिए। जो लोग इतनी हिम्मत रखते होंगे, वे सत्य न्याय और धर्म के मार्ग पर ही चलेंगे। बाकी सामान्य लोग तो संसार की नकल करेंगे और कितने ही जन्मों तक दुख भोगेंगे।"
---- "स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात." See less