Save Girls Save Universe

Save Girls Save Universe Don't let their lives end before it even begins. Save them...save urself.....

12/12/2022
21/08/2021

जेवलिन में ओलंपिक रजत पदक विजेता, पोलैंड की Maria Andrejczyk ने अपने पदक की नीलामी कर दी, क्यो की वो पैसो से एक 8 महीने के गरीब बच्चे को स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में उसकी दिल की सर्जरी के लिए भेजना चाहती थी।

पोलिश स्टोर श्रृंखला Zabka ने $125K की बोली के साथ नीलामी जीती और फिर पदक वापिस Maria को लौटा दिया ।

Humanity at its best 🙏

रानी रामपाल- कप्तान “मैं अपने जीवन से भागना चाहटी थी  बिजली की कमी से, सोते समय हमारे कानों में भिनभिनाने वाले मच्छरों त...
04/08/2021

रानी रामपाल- कप्तान
“मैं अपने जीवन से भागना चाहटी थी बिजली की कमी से, सोते समय हमारे कानों में भिनभिनाने वाले मच्छरों तक, बमुश्किल दो वक्त का खाना खाने से लेकर बारिश होने पर हमारे घर में पानी भरते हुए देखने तक। मेरे माता-पिता ने पूरी कोशिश की, लेकिन वे इतना ही कर सकते थे - पापा गाड़ी चलाने वाले थे और माँ नौकरानी के रूप में काम करती थीं।
मेरे घर के पास एक हॉकी अकादमी थी, इसलिए मैं घंटों खिलाड़ियों को अभ्यास करते हुए देखता थी- मैं वास्तव में खेलना चाहता थी। पापा प्रतिदिन 80 रुपये कमाते थे और मेरे लिए एक छड़ी नहीं खरीद सकते थे। हर दिन, मैं कोच से मुझे भी सिखाने के लिए कहता थी। उसने मुझे अस्वीकार कर दिया क्योंकि मैं कुपोषित था। वह कहते थे, 'आप अभ्यास सत्र के माध्यम से खींचने के लिए पर्याप्त मजबूत नहीं हैं।'
इसलिए, मुझे मैदान पर एक टूटी हुई हॉकी स्टिक मिली और उसी के साथ अभ्यास करना शुरू किया- मेरे पास प्रशिक्षण के कपड़े नहीं थे, इसलिए मैं सलवार कमीज में इधर-उधर भाग रही थी। लेकिन मैंने खुद को साबित करने की ठान ली थी। मैंने कोच से एक मौका मांगा - मैंने आखिरकार उसे बड़ी मुश्किल से मना लिया!
लेकिन जब मैंने अपने परिवार को बताया, तो उन्होंने कहा, 'लड़किया घर का काम ही करता है,' और 'हम तुम्हारे स्कर्ट पहनने नहीं देंगे।' मैं उनसे यह कहते हुए विनती करूं गि, 'कृपया मुझे बताएं। अगर मैं असफल होटी हूं, तो आप जो चाहें करेंगे। 'मेरे परिवार ने अनिच्छा से हार मान ली।
प्रशिक्षण सुबह से शुरू होगा। हमारे पास घड़ी भी नहीं थी, इसलिए माँ उठती थीं और आसमान की ओर देखती थीं कि क्या यह मुझे जगाने का सही समय है।
अकादमी में प्रत्येक खिलाड़ी के लिए 500 मिलीलीटर दूध लाना अनिवार्य था। मेरा परिवार केवल २०० मिली का दूध ही खरीद सकता था; बिना किसी को बताए मैं दूध में पानी मिलाकर पी लेटी थी क्योंकि मैं खेलना चाहता थी
मेरे कोच ने मोटे और पतले के माध्यम से मेरा समर्थन किया; वह मुझे हॉकी किट और जूते खरीदता था। उन्होंने मुझे अपने परिवार के साथ रहने दिया और मेरी आहार संबंधी जरूरतों का भी ध्यान रखा। मैं कड़ी मेहनत करटी और अभ्यास का एक भी दिन नहीं छोड़टी।
मुझे अपनी पहली तनख्वाह याद है; मैंने एक टूर्नामेंट जीतकर 500 रुपये जीते और पापा को पैसे दिए। इतना पैसा उसके हाथ में पहले कभी नहीं था।

Learning for Justice
28/03/2021

Learning for Justice

Address

Delhi
110009

Opening Hours

Monday 9am - 5pm
Tuesday 9am - 5pm
Wednesday 9am - 5pm
Thursday 9am - 5pm
Friday 9am - 5pm

Telephone

9717047202

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Save Girls Save Universe posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Organization

Send a message to Save Girls Save Universe:

Share

Category

इसे देखकर आपका भी सिर शर्म से झुका होगा… आत्मा कराही होगी । खुद की उपलब्धियों पर शर्मिन्दगी महसूस हुई होगी ।

इसे देखकर आपका भी सिर शर्म से झुका होगा… आत्मा कराही होगी । खुद की उपलब्धियों पर शर्मिन्दगी महसूस हुई होगी । जानते हैं जापान में यदि कोई गर्भवती महिला सड़क से गुजर जाती है तो लोग उसे तुरंत रास्ता दे देते हैं, उसके सम्मान में सिर से टोप उतार लेते हैं। वे जानते हैं कि यह स्त्री जापान का भविष्य अपने गर्भ में लेकर चल रही है । इसकी केयर करना हम सबकी जिम्मेदारी है । कौन जानता है यही बच्चा कल देश का बहुत बड़ा साहित्यकार, राजनेता, म्यूजिशियन, एक्टर, स्पोर्टसपर्सन बने जिससे देश पहचाना जाए । कभी चार्ली चैपलिन या हिटलर या नेपोलियन या लोनिन या कैनेडी या लिंकन या मार्टिन लूथर किंग या गाँधी या अम्बेडकर भी ऐसे ही गर्भ के भीतर रहे होंगे ! हमें गर्भ और गर्भवती स्त्री का सम्मान करना चाहिए, जापानियों की तरह , यह हम सब की जिम्मेदारी है !! हम ऐसा सामाज बनायें कि किसी औरत को ऐसे हालात से न गुजरना पड़े !! यदि आप सक्षम हैं , और ऐसा कोई दृश्य आपके सामने से गुजर रहा हो तो उसे एक दिन की मजदूरी निकालकर दे दें , उससे कहें कि तुम आराम करो, आज के रोटी के पैसे हमसे ले लो । यह कोई समाधान नहीं है फिर भी ऐसे हालात में, कोई औरत शौक से अपने सिर पर बोझ नहीं उठाती है, रोटी मजबूर करती होगी उसे । आप करीना कपूर की गर्भावस्था तक मत जाइयेगा । करीना कपूर की गर्भावस्था के फोटो सेशन और इस दृश्य में, बहुत अन्तर है । “पेट भरे चकाचौंध जिंदगी और भूखी जिंदगी का अंतर है !” कितना दु:खुद है कि आजादी के इतने सालों बाद भी हमें ऐसे दृश्य देखने पड़ते हैं । यह दृश्य किसी भी सभ्य सामाज के चेहरे का नकाब उतार लेती है । सरकारों के सारे दावों और तामझाम को एक पल में मटियामेट करके रख देती है !