Indian Muslim & Dalit Development Front

Indian Muslim & Dalit Development Front समाज को बेहतरी और बराबरी दिलाने की एक शुरुआत

09/08/2026

क्या आपको मालूम है बड़े बड़े रेस्टुरेंट ये आइडिया कहाँ से लाते हैं???? नहीं मालूम तो देखिए 😂😂😂😂

06/08/2026

अप्रैल 2022 में खरगोन में रामनवमी जुलूस के दौरान हिंसा भड़कने के अगले ही दिन जिला प्रशासन ने बुलडोजर कार्रवाई करते हुए शहर के पाँच मुस्लिम बहुल इलाकों में 16 मकानों और 29 दुकानों को ध्वस्त कर दिया था।

तत्कालीन मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा था-"जिस घर से पत्थर आए हैं, उस घर को ही पत्थरों का ढेर बनाएंगे।"

जुलाई 2026 में मध्य प्रदेश के सत्र न्यायालय ने 2022 की रामनवमी हिंसा के मामले में आरोपी सभी 11 मुस्लिम पुरुषों को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि उनके खिलाफ न तो कोई विश्वसनीय साक्ष्य था, न कोई गवाह और न ही कोई विधिसम्मत जांच की गई थी।

अदालत द्वारा उन्हें निर्दोष करार दिए जाने के बावजूद, नरोत्तम मिश्रा के शब्दों में भाजपा का "बुलडोजर न्याय" तो वर्षों पहले ही दे दिया गया था।

भाजपा शासित राज्यों में बुलडोजर कार्रवाइयों का निशाना लगातार मुस्लिम समुदाय को बनाया गया है। इसमें धार्मिक स्थलों, शैक्षणिक संस्थानों और घरों तक को निशाना बनाया गया।

यह कानून के शासन और संविधान, दोनों का घोर अपमान है। भाजपा सरकार उन सभी लोगों को जवाब दे, जिनके घर उसने ध्वस्त किए। उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए और इस कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाए।

बिहार के स्वास्थ्य मंत्री श्री निशांत कुमार जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ। Nitish Kumar
20/07/2026

बिहार के स्वास्थ्य मंत्री श्री निशांत कुमार जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ। Nitish Kumar

Arrest warrant issued by International Criminal Court Against नेतन्याहू।
20/07/2026

Arrest warrant issued by International Criminal Court Against नेतन्याहू।

19/07/2026

पूछा कि कौन जात हो?
बोला कि हिंदू हैं ।
बोला हिंदू नहीं जात बताओ।।
बोला कि पासवान (दलित) हैं। ये सुनकर हाथ-पैर बांध दिया और... मारने पीटने लगे मुर्गा जैसे तड़पा के

में दलित समाज के ऊपर अत्याचार हो रहा है और समाज के नेता सोए हुए हैं।
Chirag Paswan Rahul GandhiNitish KumarSamrat Choudhary

18/07/2026

रिया के पिता, राजेश जी बेटी को खोकर इस तरह टूटे कि उन्हें देखने वाले हर शख़्स की आँखें भर आईं।

यह सिर्फ़ एक परिवार का दर्द नहीं। पेपर लीक ने ऐसे कई परिवारों से उनका बच्चा छीन लिया।

हर नाम के पीछे एक माँ है, एक पिता है - जिनके लिए अब कोई कल नहीं।

इस System को नए सिरे से बनाना होगा - जहाँ बच्चों को तनाव नहीं, सुरक्षा मिले। और माँ-बाप को, उनके त्याग का फल मिले - आँसू नहीं।

अलाउद्दीन ख़िलजी का शासनकाल (1296–1316 ई.) वह समय था जब मंगोलों ने भारत को फतह करने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी थी। उन्...
18/07/2026

अलाउद्दीन ख़िलजी का शासनकाल (1296–1316 ई.) वह समय था जब मंगोलों ने भारत को फतह करने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी थी। उन्होंने छोटे-मोटे हमले नहीं किए, बल्कि कई बार लाखों की सेना लेकर दिल्ली तक आ पहुंचे थे।
अलाउद्दीन ने उन्हें हराने के लिए केवल तलवार का इस्तेमाल नहीं किया, बल्कि अर्थशास्त्र (Economics), सैन्य रणनीति और खौफ का ऐसा तालमेल बिठाया जिसने मंगोलों की कमर तोड़ दी। उसकी सफलता के मुख्य कारण ये थे:

१. विशाल और स्थायी सेना (Standing Army)
अलाउद्दीन दिल्ली सल्तनत का पहला सुल्तान था जिसने एक बहुत बड़ी और स्थायी सेना (हमेशा तैयार रहने वाली सेना) बनाई। उसने सैनिकों को ज़मीन के टुकड़ों (इक्ता) की जगह नकद वेतन देना शुरू किया। सेना में बेहतरीन नस्ल के घोड़े रखे गए और भ्रष्टाचार रोकने के लिए 'दाग' (घोड़ों पर मुहर लगाना) और 'हुलिया' (सैनिकों का रिकॉर्ड रजिस्टर में लिखना) जैसी नई प्रथाएं शुरू कीं।

२. बाज़ार नियंत्रण प्रणाली (Market Control Policy)
यह अलाउद्दीन का सबसे मास्टरस्ट्रोक था। इतनी विशाल सेना को ज्यादा वेतन देना सरकारी खजाने के लिए असंभव था। इसलिए उसने दिल्ली के बाज़ारों में अनाज, कपड़े और घोड़ों से लेकर सुई तक—हर चीज़ की कीमत फिक्स कर दी। कीमतें इतनी कम और नियंत्रित रखी गईं कि सैनिक अपने सीमित वेतन में भी आराम से गुजारा कर सकें।

सख्त नियम: अगर कोई व्यापारी तय कीमत से ज्यादा पैसे लेता या वजन कम तौलता था, तो अलाउद्दीन के आदेश पर उसके शरीर से उतना ही मांस काट लिया जाता था। इस डर से महंगाई पूरी तरह खत्म हो गई।

३. सिरी का किला और मजबूत सीमाएं
जब 1303 ई. में मंगोलों ने दिल्ली को चारों तरफ से घेर लिया था, तब अलाउद्दीन को एक सुरक्षित किले की जरूरत महसूस हुई। मंगोलों से दिल्ली की जनता को बचाने के लिए उसने एक नया शहर और सिरी का किला (Siri Fort) बनवाया।
इसके अलावा, उसने उत्तर-पश्चिम (पंजाब और मुल्तान) की सीमाओं पर मौजूद पुराने किलों की मरम्मत करवाई और वहां अपने सबसे बेहतरीन सैनिकों की फौज तैनात कर दी।

४. ज़फर खान जैसे खूंखार सेनापति
अलाउद्दीन के पास ज़फर खान और गाज़ी मलिक जैसे बेहतरीन और निडर सेनापति थे। 1299 ई. के किली के युद्ध में ज़फर खान ने मंगोलों पर ऐसा भयानक कहर ढाया कि मंगोल सेना में भगदड़ मच गई। इस युद्ध में ज़फर खान मारा गया, लेकिन मंगोलों के दिलों में उसका ऐसा खौफ बैठ गया कि वे कई सालों तक उस इलाके में वापस नहीं आए।
५. आक्रामक नीति

अलाउद्दीन ने मंगोलों के खिलाफ केवल रक्षा (Defense) नहीं की, बल्कि उन पर पलटवार (Counter-attack) किया। उसने आदेश दिया था कि मंगोलों को जहां देखा जाए, वहीं मार दिया जाए। जो मंगोल सैनिक जिंदा पकड़े जाते थे, उन्हें हाथियों के पैरों तले कुचलवा दिया जाता था। अलाउद्दीन ने उनके कटे हुए सिरों की मीनारें (Skull towers) बनवाईं ताकि बाकी मंगोल आक्रांताओं में खौफ पैदा हो सके।
इन्हीं कड़े कदमों की वजह से 1306 ई. के बाद मंगोलों की हिम्मत पूरी तरह टूट गई और उन्होंने अलाउद्दीन के जीते-जी भारत पर दोबारा कोई बड़ा हमला करने की जुर्रत नहीं की।

कोर्ट ने कहा कि आज मोबाइल और माइक्रोफोन लेकर कोई भी खुद को रिपोर्टर बता देता है, जबकि कई लोगों के पास न तो पत्रकारिता का...
18/07/2026

कोर्ट ने कहा कि आज मोबाइल और माइक्रोफोन लेकर कोई भी खुद को रिपोर्टर बता देता है, जबकि कई लोगों के पास न तो पत्रकारिता का प्रशिक्षण होता है और न ही जवाबदेही। हाईकोर्ट ने कहा कि अब समय आ गया है कि सरकार ऐसा नियामक ढांचा (रेगुलेटरी फ्रेमवर्क) बनाए, जिससे प्रेस की आजादी भी बनी रहे और फर्जी, गैर-जिम्मेदाराना तथा डराने-धमकाने वाली पत्रकारिता के लिए जवाबदेही भी तय हो।

16/07/2026

पेपर लीक के ख़िलाफ़ छात्रों की गूंज

देहरादून के साथी सत्ता में बैठे लोगों को जगाने का काम करें।
16/07/2026

देहरादून के साथी सत्ता में बैठे लोगों को जगाने का काम करें।

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