18/07/2026
अलाउद्दीन ख़िलजी का शासनकाल (1296–1316 ई.) वह समय था जब मंगोलों ने भारत को फतह करने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी थी। उन्होंने छोटे-मोटे हमले नहीं किए, बल्कि कई बार लाखों की सेना लेकर दिल्ली तक आ पहुंचे थे।
अलाउद्दीन ने उन्हें हराने के लिए केवल तलवार का इस्तेमाल नहीं किया, बल्कि अर्थशास्त्र (Economics), सैन्य रणनीति और खौफ का ऐसा तालमेल बिठाया जिसने मंगोलों की कमर तोड़ दी। उसकी सफलता के मुख्य कारण ये थे:
१. विशाल और स्थायी सेना (Standing Army)
अलाउद्दीन दिल्ली सल्तनत का पहला सुल्तान था जिसने एक बहुत बड़ी और स्थायी सेना (हमेशा तैयार रहने वाली सेना) बनाई। उसने सैनिकों को ज़मीन के टुकड़ों (इक्ता) की जगह नकद वेतन देना शुरू किया। सेना में बेहतरीन नस्ल के घोड़े रखे गए और भ्रष्टाचार रोकने के लिए 'दाग' (घोड़ों पर मुहर लगाना) और 'हुलिया' (सैनिकों का रिकॉर्ड रजिस्टर में लिखना) जैसी नई प्रथाएं शुरू कीं।
२. बाज़ार नियंत्रण प्रणाली (Market Control Policy)
यह अलाउद्दीन का सबसे मास्टरस्ट्रोक था। इतनी विशाल सेना को ज्यादा वेतन देना सरकारी खजाने के लिए असंभव था। इसलिए उसने दिल्ली के बाज़ारों में अनाज, कपड़े और घोड़ों से लेकर सुई तक—हर चीज़ की कीमत फिक्स कर दी। कीमतें इतनी कम और नियंत्रित रखी गईं कि सैनिक अपने सीमित वेतन में भी आराम से गुजारा कर सकें।
सख्त नियम: अगर कोई व्यापारी तय कीमत से ज्यादा पैसे लेता या वजन कम तौलता था, तो अलाउद्दीन के आदेश पर उसके शरीर से उतना ही मांस काट लिया जाता था। इस डर से महंगाई पूरी तरह खत्म हो गई।
३. सिरी का किला और मजबूत सीमाएं
जब 1303 ई. में मंगोलों ने दिल्ली को चारों तरफ से घेर लिया था, तब अलाउद्दीन को एक सुरक्षित किले की जरूरत महसूस हुई। मंगोलों से दिल्ली की जनता को बचाने के लिए उसने एक नया शहर और सिरी का किला (Siri Fort) बनवाया।
इसके अलावा, उसने उत्तर-पश्चिम (पंजाब और मुल्तान) की सीमाओं पर मौजूद पुराने किलों की मरम्मत करवाई और वहां अपने सबसे बेहतरीन सैनिकों की फौज तैनात कर दी।
४. ज़फर खान जैसे खूंखार सेनापति
अलाउद्दीन के पास ज़फर खान और गाज़ी मलिक जैसे बेहतरीन और निडर सेनापति थे। 1299 ई. के किली के युद्ध में ज़फर खान ने मंगोलों पर ऐसा भयानक कहर ढाया कि मंगोल सेना में भगदड़ मच गई। इस युद्ध में ज़फर खान मारा गया, लेकिन मंगोलों के दिलों में उसका ऐसा खौफ बैठ गया कि वे कई सालों तक उस इलाके में वापस नहीं आए।
५. आक्रामक नीति
अलाउद्दीन ने मंगोलों के खिलाफ केवल रक्षा (Defense) नहीं की, बल्कि उन पर पलटवार (Counter-attack) किया। उसने आदेश दिया था कि मंगोलों को जहां देखा जाए, वहीं मार दिया जाए। जो मंगोल सैनिक जिंदा पकड़े जाते थे, उन्हें हाथियों के पैरों तले कुचलवा दिया जाता था। अलाउद्दीन ने उनके कटे हुए सिरों की मीनारें (Skull towers) बनवाईं ताकि बाकी मंगोल आक्रांताओं में खौफ पैदा हो सके।
इन्हीं कड़े कदमों की वजह से 1306 ई. के बाद मंगोलों की हिम्मत पूरी तरह टूट गई और उन्होंने अलाउद्दीन के जीते-जी भारत पर दोबारा कोई बड़ा हमला करने की जुर्रत नहीं की।