09/08/2026
🚨 बड़ा खुलासा | दिल्ली में दवाइयों की खरीद में भाजपा की रेखा गुप्ता सरकार का बड़ा घोटाला?
दिल्ली सरकार द्वारा करीब ₹400 करोड़ की दवाइयाँ खरीदे जाने के बावजूद, सवाल यह है कि इन दवाइयों का बड़ा हिस्सा अस्पतालों तक पहुँचा भी या नहीं?
आरोप है कि दवाइयों का वितरण ज़मीनी स्तर पर होने के बजाय सिर्फ कागज़ों और फाइलों में दिखाया जा रहा है। अगर यह सच है, तो यह बेहद गंभीर मामला है और इसकी निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए।
हमने पहले भी यह मुद्दा उठाया था कि दिल्ली सरकार के अस्पतालों में MRP अंकित दवाइयाँ खरीदी जा रही हैं। इससे सरकारी आपूर्ति की दवाइयों को खुले बाज़ार में डायवर्ट किए जाने की आशंका बढ़ जाती है।
वहीं, पहले AAP सरकार के समय Central Procurement Agency (CPA) के माध्यम से खरीदी जाने वाली सरकारी दवाइयों पर MRP अंकित नहीं होती थी और पैकेट पर स्पष्ट रूप से लिखा होता था:
“दिल्ली सरकार आपूर्ति — बिक्री के लिए नहीं।”
अब सवाल सीधा है—
❓ ₹400 करोड़ की दवाइयाँ कहाँ गईं?
❓ कितनी दवाइयाँ वास्तव में अस्पतालों तक पहुँचीं?
❓ कितनी दवाइयाँ मरीजों को वितरित हुईं?
❓ MRP वाली सरकारी दवाइयों की खरीद क्यों की जा रही है?
❓ क्या सरकारी दवाइयों की सप्लाई और वितरण का स्वतंत्र ऑडिट हुआ है?
दिल्ली की जनता के पैसे से खरीदी गई दवाइयों का हिसाब जनता को मिलना चाहिए।
अगर सरकारी रिकॉर्ड और ज़मीनी हकीकत में अंतर है, तो इसकी निष्पक्ष जाँच, जिम्मेदारी तय करना और दोषियों पर कार्रवाई जरूरी है।
दवाइयाँ मरीजों के लिए हैं, फाइलों में दिखाने के लिए नहीं। 🇮🇳
Arvind Kejriwal