04/12/2019
बेटा अब तो पडोसी का लड़का भी लग गया....
तू कब लगेगा?
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आज-कल हमारे माता-पिता जिज्ञासा के साथ हमसे सिर्फ एक ही प्रश्न पूछा करते है कि बेटा सब लग गए तू कब नौकरी पर लगेगा?
एक छात्र होने के नाते यह हमारे जीवन की बेहद बड़ी विडम्बना है और साथ ही ताने सहना हमारा परम धर्म बन चूका है.....
पडोसी आकर हमसे पूछते है कि बेटा क्या कर रहे हो?....
और यदि हम यह उत्तर दे.......
हम सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे है,
तो उनका मुंह ऐसा बन जाता है जैसे हमने उनके पैसे चुरा लिए हो. साथ ही अलग-अलग प्रकार के ताने मार के हमारे दर्द का मर्म बड़ाने का काम भी वह बखूबी करते है. समाज हमे छिन्न नज़रो से देखाता है और साथ में यदि किसी रिश्तेदार के सुपुत्र की सरकारी नौकरी लग जाए तो अलग परेशानी है..... यह आज के समय में हर विद्यार्थी की समस्या है.
यह ऐसी समस्या है जिनका सामना हर छात्र को करना पड़ता है. कोई भी व्यक्ति आपकी समस्या, आपके संघर्ष या आपकी प्रतिस्पर्धा के बारे में नहीं जानता, आप किस मानसिक तनाव से गुजर रहे है यह भी कोई नहीं समझता और साथ ही यह चीज़े कहीं न कहीं आपके मनोबल को भी कमजोर करती है. और हमें अपने पथ से भटकाती है...
परन्तु इन सब से आपको परेशांन होने की आवश्यकता नहीं है.
यदि कोई आपके मनोबल को शीर्ण होने से कोई बचा सकता है तो वह सिर्फ आप है.
यदि कोई आपके सपने को पूरा कर सकता है तो वह सिर्फ आप है.
बस आपको लगातार एक वर्ष की कठिन मेहनत करनी होती है अब आपके पर निर्भर करती है कि आप उस कठिन मेहनत के लिये तैयार है अथवा नही क्योंकि कुछ किये बग़ैर जयकार नही होती है ।
आप जानते है कि यह स्थिति हर छात्र की है. संघर्ष के दिनों में आपको संदेह कि निगाह से देखा जाता है.
आप इन सब तानो को अपने मन में समेट ले और इन्हें अपनी कमजोरी की बजाय अपनी ताकत बनाएं. और अधिक कठिन परिश्रम करें, क्योकि परिश्रम का कोई विकल्प नहीं होता.आप कितनी भी मेहनत करें यह दुनिया आपको संदेह की निगाह से हमेशा देखेगी ही. परन्तु अपने मन को शांत रखना आपका कार्य है. अपना परिश्रम इतनी शांति से कीजिये कि जब आप सफल हो तो आपकी सफलता उन सभी लोगो को चुप करा दे जो आपकी योग्यता पर प्रश्न उठा रहे थे.
इन्ही परिस्थियों के लिए हमारे पूर्व राष्ट्रपति डॉ ए पी जे अब्दुल कलाम ने कहा है.-
जीवन में कठिनाइयाँ हमे बर्बाद करने नहीं आती है, बल्कि यह हमारे छुपे हुए सामर्थ्य और शक्तियों को बाहर निकालने में हमारी मदद करती है, कठिनाइयों को यह जान लेने दो की आप. उससे भी ज्यादा कठिन है ।