02/01/2016
हम रेलवाले...
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शहरों की दूरियों को मिटाते है, दिलो से दिल को मिलाते है
जी हाँ, हम रेल चलाते है | हाँ जी हम रेल चलाते है |
हर दफ़्तर का दरवाजा, हर रोज बन्द हो जाता है
होता है कोई हादसा, तो देश का झंडा भी झुक जाता है |
पर रेल के हर ऑफिस का दरवाजा हमेशा खुला मिलता है |
चाहे कैसी भी हो हालत, हमारे दिल में होसला पलता रहता है |
फौजी भाइयो के संग हम भी साथ निभाते है वतन के रखवालो संग हम भी साथ निभाते है
हम ईमानदारी से अपनी जिम्मेदारी निभाते है
जी हाँ, हम रेल चलाते है | हाँ जी हम रेल चलाते है |
कोई घर पे दिवाली मनाता है, कोई ईद मानाने जाता है
कोई क्रिसमस पर घर आता है, कोई बैसाखी की खुशियाँ मनाता है |
पर हमारी होली, दीवाली, ईद और क्रिसमस, मनती है हमारे रेल परिवार के साथ,
लौट के आते है डयुटी से तब तक बुझ चुकते है दिये घर पर खुद अँधेरे में रहकर, सब के दिये जलाते है
जी हाँ, हम रेल चलाते है | हाँ जी हम रेल चलाते है |
लोग उतरते है चढ़ते है, रेल पथ पर आगे बढ़ती है |
तनिक नहीं विश्राम यहाँ पर, नित भीड़ यहाँ बढ़ती है |
जब बीमार बच्चे को छोड़कर, नाईट डुयटी करनी पड़ती है |
उस रात रेल पटरी पर नहीं, हमारी सीने पर चलती है |
इसके बाद भी देश वासियो प्यारे भाई बहेनो, हम हँसते मुस्कुराते है
जी हाँ, हम रेल चलाते है | हाँ जी हम रेल चलाते है |
सारी रात गाड़ियाँ चलती, चप्पा चप्पा सोता है |
दुर्घटना चाहे कही भी हो, दर्द तो दिल में होता है |
तुरंत लाइन क्लीयर करके, हम फिर से खड़े हो जाते है |
कर्म को ही ईश्वर समझकर, हम परिश्रम के फूल चढाते है ||
गतिमान रखकर रेल को, जीवन रेखा चलाते है
जी हाँ, हम रेल चलाते है | हाँ जी हम रेल चलाते है |
नव वर्ष शुभम मंगलमय
-अज्ञात