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17/06/2024

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Shivam Mishra Desk|Thoughts for Grandparents’ DayA story that “illustrates how the influence of grandparents, their wisd...
16/06/2024

Shivam Mishra Desk|

Thoughts for Grandparents’ Day
A story that “illustrates how the influence of grandparents, their wisdom and their connection to nature and science, can shape and nurture a child’s curiosity and guide them towards a fulfilling and innovative career in the scientific field,” is how some thoughts about Grandparents’ Day (the first Sunday after Labor Day in the U.S.) were described by ChatGTP artificial intelligence after it generated a story to celebrate the day. The resulting article not only recognises how the guidance of grandparents can affect a child’s career choice, but also showcases the innovative story plot created by AI.

01/02/2023

We launch a series Namely " Do it With Enthusiasm " Organic Chemistry -Neet
Botany -Neet
Physics-Neet
Zoology-Neet
Physical Chemistry -Neet
Inorganic Chemistry -Neet

On every Sunday @9:00Pm

Whole syllabus Revision chapter wise ...

Wish u all the best aspirants👍 2023
In this we will covers all syllabus and provide major formulas and short notes of each every chapters ...we also provides important questions.





जानिये कैसे स्मार्टफोन की लाइट आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैआजकल हर कोई स्मार्टफोन को इस्तेमाल करता है. इतनी व्यस्थ ...
03/06/2022

जानिये कैसे स्मार्टफोन की लाइट आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है

आजकल हर कोई स्मार्टफोन को इस्तेमाल करता है. इतनी व्यस्थ लाइफ में स्मार्टफोन का उपयोग दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है. स्मार्टफोन के कई लाभ हैं परन्तु यह भी नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता है कि इनसे जो लाइट निकलती है वह सेहत को नुक्सान पहुचा सकती है. आइयेइस लेख के माध्यम से देखते हैं कैसे ये स्मार्टफोन की लाइट स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती है.हर तकनीकी के कुछ अच्छे और बुरे परिणाम होते हैं. आजकल स्मार्टफोन हर कोई इस्तेमाल करता है, जो कि लाइफ का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है. इन छोटे डिवाइसों की मदद से एक दूसरे के साथ कनेक्ट और अपडेट रहते हैं, यहां तक की यह एक मनोरंजन का भी अच्छा स्रोत बन गया है. स्मार्टफोन के कई लाभ है परन्तु यह भी नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता है कि इनसे जो लाइट निकलती है वह सेहत के लिए हानिकारक हो सकती है. आजकल हर कोई स्मार्टफोन को इस्तेमाल करता है. इतनी व्यस्थ लाइफ में स्मार्टफोन का उपयोग दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है. इसे शॉपिंग, मूवी टिकट, फ्लाइट टिकट, पढने इत्यादि जैसी सभी चीजों को ट्रैक करने के लिए भी इस्तेमाल किया जा रहा है. इतने सारे काम मिनटों में निपटने के कारण स्मार्टफोन ने पुस्तक, अलार्म घड़ियां, कैमरे और नोटपैड्स को बदल दिया है.

हर घर में जितने लोग नहीं है उससे ज्यादा स्मार्टफोन देखने को मिल जाते हैं. आजकल इन स्मार्टफोन के बिना लाइफ अधूरी है, ये एक जरुरत के साथ आदत भी बन गया है. यद्यपि स्मार्टफोन का उपयोग करने के कई लाभ हैं, लेकिन इन अविश्वसनीय डिवाइसों के अपने स्वयं के कुछ नुकसान भी हैं. विशेषकर, यदि आप लंबे समय तक अपने स्मार्टफोन का उपयोग करते हैं, तो आपको यह जानना होगा की इनसे निकलने वाली लाइट कैसे आपके स्वास्थ्य को नुक्सान पंहुचा सकती है और कई बीमारियों को न्योता भी दे सकती हैं.हमारा शरीर स्वाभाविक रूप से एक चक्र का पालन करता है जो हमें दिन के दौरान जागते रहने और सतर्क रहने की अनुमति देता है और रात में आवश्यक विश्राम प्राप्त करने में हमारी मदद करता है. लेकिन जब हम सोने जाते है और तब इन स्क्रीनों को देखते हैं तो हमारा दिमाग भ्रमित हो जाता हैं. रात में मस्तिष्क, मेलाटोनिन हार्मोन का उत्पादन करता है जो कि आपके शारीर को सोने का संकेत देता है परन्तु उस समय स्मार्टफोन उपयोग करने की वजह से जो लाइट निकलती है मस्तिष्क ऐसा सही से नहीं कर पाता है. जिसके कारण कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न होती हैं.

लंबी अवधि के दौरान, पर्याप्त नींद अगर नहीं हो पा रही है तो न्यूरोटॉक्सिन बिल्डअप हो सकता है, जिसके कारण अच्छी नींद लेना कठिन हो जाता है. इनसोम्निया नमाक बीमारी हो सकती है.

2. स्मार्टफोन की वजह से रात में नींद खराब होती है, जिससे अगले दिन कोई भी नया काम सीखना कठिन हो सकता है या दिमाग सही प्रकार से काम नहीं करता है,थका हुआ सा महसूस करता है.

3. जब मेलाटोनिन हार्मोन सही से काम नहीं कर पाता है, वो भी स्मार्टफोन से निकलने वाली लाइट के कारण तब अन्य हार्मोन पर भी प्रभाव पड़ता है जो कि भूख को सही से नियंत्रित नहीं कर पाते हैं, संभावित तौर पर मोटापे का जोखिम बढ़ा सकता है.

4. आपकी नींद शेड्यूल बिगड़ने से, सर दर्द, कंफ्यूज़ होने की परेशानियां और आपकी याददाश्त पर भी असर पढ़ सकता है.

5. एक रिसर्च में सामने आया है कि स्मार्टफोन में टॉयलेट सीट से लगभग 10 गुना अधिक बैक्टीरिया होते हैं. जरा सोचिए आप खाते हुए फोन कितनी बार छेड़ते हैं और कितने बैक्टीरिया आपके हाथों के जरिये शारीर में प्रवेश करते होंगे.

6. स्मार्टफोन के लाइट के कारण जब लोगों के अन्दर मेलाटोनिन हार्मोन सही से काम नहीं करता है तब वह डिप्रेशन के भी शिकार हो सकते हैं.

7. स्मार्टफोन से निकलने वाली लाइट और नींद के बीच कुछ संबंध है जिसके कारण प्रोस्ट्रेट और ब्रैस्ट कैंसर होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं.

8. स्मार्टफोन से निकलने वाली ब्लू लाइट से आँखों से संबंधी कैटरेक्ट जैसे बीमारी भी हो सकती है. यहां तक की आँखों पर ब्लू लाइट का सीधा पड़ना, रेटिना को डैमेज भी कर सकता है. इसके अलावा कई लोगों की आदत होती है, कि वह अँधेरे में भी स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं, जो आपकी आँखों पर बुरा असर डालते हैं.

9. यह कहना भी गलत नहीं होगा की मोबाइल का आविष्कार हुआ था लोगों को आपस में जोड़ने के लिए, जिससे आसानी से लोग कनेक्ट हो सकें. लेकिन आज के समय में फोन ने इंसान को आइसोलेटे कर दिया है.

10. क्या आप नोमोफोबिया के बारे में जानते हैं? मोबाइल फोन खो जाने या फिर सिग्नल नहीं होने या खराब होने के डर को नोमोफोबिया कहते हैं. कम समय के लिए ही सही परन्तु मोबाइल फोन खोने का अनुभव अधिकतर सभी को होता है. बिना फोन के आजकल यूज़र खुद को अधुरा और घबराया हुआ महसूस करता है.

ऐसा कहना गलत नहीं होगा कि स्मार्टफोन आजकल लाइफ का एक अहम हिस्सा बन गया है परन्तु हमें इसका उपयोग सही से करना चाहिए ताकि स्वास्थ ठीक रहे. हो सके तो रात में इसका उपयोग कम करें ताकि स्मार्टफोन से निकलने वाली रेडिएशन से हानिकारक बीमारीयाँ न हो सके.

अंतरिक्ष में उड़ान भरने के बावजूद बेजोस और ब्रैसनन नहीं कहलाएंगे एस्ट्रोनॉट्सअमरीका की फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रे्रशन ने ...
08/08/2021

अंतरिक्ष में उड़ान भरने के बावजूद बेजोस और ब्रैसनन नहीं कहलाएंगे एस्ट्रोनॉट्स

अमरीका की फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रे्रशन ने एस्ट्रोनॉट्स कहलाने के लिए जरूरी शर्तों में हाल ही किया बदलाव, नए नियम के अनुसार अंतरिक्ष में कम से कम 50 मील (80.46 किमी) की ऊंचाई तक उड़ान भरने पर ही मिलेगा यह सम्मान
विज्ञान और तकनीक
अंतरिक्ष में उड़ान भरने के बावजूद बेजोस और ब्रैसनन नहीं कहलाएंगे एस्ट्रोनॉट्स
अंतरिक्ष में उड़ान भरने के बावजूद बेजोस और ब्रैसनन नहीं कहलाएंगे एस्ट्रोनॉट्स
अमरीका के दो अरबपति कारोबारियों रिचर्ड ब्रैसनन (Richard Brasnon) और जेफ बेजोस (Zeff Bezos) ने जुलाई में अपने निजी अंतरिक्ष यान में उड़ान भरकर इतिहास रच दिया। अंतरिक्ष में जाने वाले दोनों क्रमश दुनिया के पहले और दूसरे अरबपति हैं। इस उपलब्धि के बावजूद क्या बेजोस और ब्रैसनन अंतरिक्ष यात्री (एस्ट्रोनॉट) कहलाएंगे? नहीं, ये दोनों केवल 'स्पेस ट्यूरिस्ट' (Space Tourist) कहलाएंगे 'एस्ट्रोनॉट' नहीं। ऐसा इसलिए क्योंकि हाल ही अमरीकी फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रे्रशन (FAA) ने एस्ट्रोनॉट कहलाने के लिए जरूरी शर्तों में बदलाव किया है। नए नियम के अनुसार अब न तो बेजोस, न ही ब्रैनसन अंतरिक्ष यात्री हैं। गौरतलब है कि 11 जुलाई को सबसे पहले वर्जिन गेलेक्टिक (Virgin Galactic) के संस्थापक रिचर्ड ब्रैसनन और 20 जुलाई को ब्लू ओरिजिन (Blue Origin) के मालिक जेफ बेजोस ने अपनी कंपनी के बनाए रॉॅकेट में अंतरिक्ष में उड़ान भरी थी।

अंतरिक्ष में उड़ान भरने के बावजूद बेजोस और ब्रैसनन नहीं कहलाएंगे एस्ट्रोनॉट्स
क्या हैं एफएए के नए नियम
पुराने नियम के तहत बेजोस और ब्रैसनन अंतरिक्ष यात्री कहलाते क्योंकि उन्होंने अंतरिक्ष उड़ान के एफएए की सभी कसौटियों को पूरा किया था, जिसमें कम से कम 50 मील (80.46 किमी) की ऊंचाई तक उड़ान भरना भी शामिल है। वर्ष 2004 में एफएए की स्थापना के बाद यह पहली बार है जब अंतरिक्ष संबंधित नियमों में बदलाव किया गया है। नए नियमों के अनुसार, एफएए के 'कॉमर्शियल एस्ट्रोनॉट्स विंग्स' (commmercial Astronauts Wings) हासिल करने के लिए अब अंतरिक्ष यात्रियों को 'उड़ान के दौरान रॉकेट में उन गतिविधियों का प्रदर्शन करके दिखाना होगा जो प्रशिक्षण के दौरान सार्वजनिक सुरक्षा के लिए सिखाई गई थीं। एफएए का कहना है कि यह बदलाव इसलिए किया गया है क्योंकि यह 'कॉमर्शियल स्पेस ऑपरेशंस' के दौरान सार्वजनिक सुरक्षा के प्रति हमारी सीधी भूमिका से जुड़ा हुआ मामला है और हम इसमें कोताही नहीं बरत सकते। एफएए की स्थापना इस उद्देश्य से की गई थी कि हम उड़ान चालक दल के उन सदस्यों को चिन्हित कर सकें जो मनुष्यों को ले जाने के लिए डिज़ाइन किए गए अंतरिक्ष वाहनों की सुरक्षा को बढ़ावा दे सकें। अब वही फ्लाइट क्रू अंतरिक्ष यात्री कहलाएगा जो उड़ान के दौरान सुरक्षा गतिविधियों का खरा प्रदर्शन करेंगे।

अंतरिक्ष में उड़ान भरने के बावजूद बेजोस और ब्रैसनन नहीं कहलाएंगे एस्ट्रोनॉट्स
फिर भी मानद उपधि मिलेगी
जो लोग फेडरेशन की इस नई कसौटी पर खरा नहीं उतरते उन्हें भी मायूस होने की जरूरत नहीं, क्योंकि एफएए उन्हें 'कॉमर्शियल एस्ट्रोनॉट्स विंग्स' की 'मानद उपाधि' देकर सम्मानित करेगा। ऐसे व्यक्ति जिन्होंने वाणिज्यिक मानव अंतरिक्ष उड़ान उद्योग में असाधारण योगदान या लाभकारी सेवा का प्रदर्शन किया होगा, उन्हें इस उपाधि से सम्मानित किया जाएगा। इसे पाने के लिए प्राधिकरण की प्रत्येक शर्त को पूरा करना आवश्यक नहीं होगा। हालांकि, 'कॉमर्शियल एस्ट्रोनॉट्स विंग्स' का कोई कानूनी महत्त्व नहीं है न ही इसे पाने वाले को कोई विशेषाधिकार हैं, यह सिर्फ मान्यता का प्रतीक है। वहीं, ब्लू ओरिजिन और वर्जिन गेलेक्टिक दोनों के अपने-अपने 'विंग्स' हैं जो वे अपने नियमों के अनुसार देते हैं।

Psyche Asteroid: रहस्‍यमय ऐस्‍टरॉइड पर खरबों की दौलत, हर इंसान होगा अरबपति, वैज्ञानिकों ने की पुष्टिअमेरिका की अंतरिक्ष ...
07/08/2021

Psyche Asteroid: रहस्‍यमय ऐस्‍टरॉइड पर खरबों की दौलत, हर इंसान होगा अरबपति, वैज्ञानिकों ने की पुष्टि

अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा को रहस्‍यमय 16 साइकी ऐस्‍टरॉइड पर इतनी ज्‍यादा अनमोल धातुएं मिली हैं जिससे धरती का हर इंसान अरबपति बन सकता है। नासा के मुताबिक इस अथाह दौलत की कीमत 10,000,000,000,000,000,000 डॉलर है। नासा ने साइकी ऐस्‍टरॉइड के सतह की फिर से माप की है और उसके आधार पर यह ताजा अनुमान लगाया है। साइकी करीब 226 किमी चौड़ी चट्टान है जो ऐस्‍टरॉइड बेल्‍ट में सूरज के चक्‍कर लगाती है। यह ऐस्‍टरॉइड बेल्‍ट मंगल ग्रह और बृहस्‍पति के बीच स्थित है। इस इलाके में 10 लाख से ज्‍यादा अंतरिक्ष चट्टानें तैर रही हैं। नासा अनमोल धातुओं से भरे इस ऐस्‍टरॉइड की जांच के लिए वर्ष 2026 में एक अंतरिक्षयान भेजने जा रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसकी उत्‍पत्ति कैसे हुई।

​चिली के रेडियो टेलिस्‍कोप से मिलीं अद्भुत तस्‍वीरें

कुछ अटकलों में कहा गया है कि यह किसी शुरुआती ग्रह का कोर है। नासा के इस मिशन में मदद के लिए कैलिफोर्निया के कालटेक यूनिवर्सिटी के एक दल ने साइकी ऐस्‍टरॉइड का एक नया तापमान नक्‍शा तैयार किया है ताकि उसके सतह के अंदर मौजूद चीजों का पता लगाया जा सके। इसके लिए चिली के रेडियो टेलिस्‍कोप का सहारा लिया गया है। इसके जरिए शोधकर्ताओं को 50 पिक्‍सल के रेजोलूशन की तस्‍वीर मिली है और इससे साइकी के बारे में और ज्‍यादा जानकारी मिली है। शोधकर्ताओं के दल ने यह पता लगाने में सफलता हासिल की कि साइकी की धातु की सतह कम से कम 30 फीसदी धातु से बनी है। यही नहीं साइकी की सतह पर मौजूद चट्टान भी कीमती धातुओं से बनी है। शोधकर्ताओं को आशा है कि इस ताजा जानकारी से नासा को अपने साइकी मिशन में बड़ी मदद मिलेगी। अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA एक स्पेसक्राफ्ट तैयार कर रही है जो ऐस्टरॉइड 16 Psyche पर जाएगा। इस क्राफ्ट की टेस्टिंग अब आखिरी चरण में पहुंच गई है।

​पूरी दुनिया की इकॉनमी से कई गुना ज्यादा कीमत

यह अंतरिक्ष यान अगले साल अगस्त में फ्लोरिडा के केप कनेवरल से SpaceX के Falcon Heavy रॉकेट की मदद से लॉन्च किया जाना है। यह क्राफ्ट सौर ऊर्जा से चलेगा और मंगल-बृहस्पति के बीच मुख्य बेल्ट में स्थित ऐस्टरॉइड 16 Psyche पर 2026 में पहुंचेगा। फोर्ब्स मैगजीन के मुताबिक साइकी ऐस्टरॉइड में जितना धातु है वह पूरी दुनिया की इकॉनमी से कई गुना ज्यादा 10, 000 क्वॉड्रिलियन डॉलर (10,000,000,000,000,000,000 डॉलर) की कीमत का हो सकता है। यह क्राफ्ट 21 महीने तक ऐस्टरॉइड की मैपिंग करेगा और इसके फीचर्स को स्टडी करेगा। धरती से करीब 37 करोड़ किमी दूर स्थित यह ऐस्टरॉइड करीब 226 किमी चौड़ा है। न सिर्फ इसका आकार विशाल है बल्कि यह धातुओं से इस कदर बना है कि इसे अब तक खोजा गया सबसे मूल्यवान ऐस्टरॉइड माना जाता है। इसे सबसे पहले 1852 में खोजा गया था। हबल टेलिस्कोप को मिले डेटा के आधार पर यह धातु से बना है जबकि ज्यादातर ऐस्टरॉइड्स में चट्टान या बर्फ ज्यादा होती है। माना जाता है कि इसमें लोहा और निकेल हो सकते हैं। इस आधार पर इसकी कीमत 10,000 क्वॉड्रिलियन डॉलर हो सकती है।

​नासा बना रहा खास यान, करेगा खजाने की तलाश

ऐस्टरॉइड 16 साइकी कैसे बना, इसे लेकर एक थिअरी है कि यह किसी अविकसित ग्रह की कोर हो सकता है। इसकी मदद से ऐस्ट्रोनॉमर्स धरती और दूसरे ग्रहों के बनने की प्रक्रिया को समझ सकते हैं। JPL में स्पेसक्राफ्ट का सोलर इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन चैसिस तैयार है जो किसी वैन के आकार है। यह क्राफ्ट का 80% हिस्सा होगा। अगले 1 साल में क्राफ्ट असेंबल हो जाएगा और फ्लोरिडा भेजने से पहले इसे टेस्ट किया जाएगा। नासा का यह मिशन उसके Discovery Program का हिस्सा है। इस प्रोग्राम के तहत कम कीमत के रोबॉटिक स्पेस मिशन तैयार किए जा रहे हैं। क्राफ्ट में ऐस्टरॉइड का चुंबकीय क्षेत्र नापने के लिए मैग्नेटोमीटर, उसकी सतह की तस्वीरें लेने के लिए मल्टिस्पेक्ट्रल इमेजर, सतह किस चीज से बनी है यह देखने के लिए उससे निकलने वाली गामा रेज और न्यूट्रॉन्स के अनैलेसिस के लिए स्पेक्ट्रोमीटर और हाई डेटा-रेट ट्रांसफर लेजर संपर्क के लिए एक्सपेरिमेंटल उपकरण लगे हैं।

​तबाह हो सकती है पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था

साइकी ऐस्‍टरॉइड की अथाह कीमत से यह सवाल उठ सकता है कि इसे धरती पर लाना चाहिए लेकिन अगर ऐसा किया गया तो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था तबाह हो सकती है। वैज्ञानिकों के मुताबिक धरती पर ऐस्टरॉइड मटीरिअल के बाजार में आने से बेशकीमती धातुओं की कीमत अचानक गिर जाएगी। इस तरह की वस्तुओं का खनन, बिक्री करने वाली सभी कंपनियों की वैल्यू गिरने लगेगी और पूरा बाजार बिगड़ जाएगा। यहां तक कि अगर इस ऐस्टरॉइड का एक टुकड़ा भी धरती पर लाया जाता है तो इसे संभालना मुश्किल होगा।' हालांकि नासा की ऐसी कोई योजना है भी नहीं। माना जा रहा है कि अन्‍य चट्टानों के विपरीत साइकी 16 ज्‍यादातर लोहे और निकेल से बना है। नासा के इस अहम मिशन से ठीक पहले कालटेक यूनिवर्सिटी ने ऐस्‍टरॉइड की जांच की है। इससे साइकी का पहला तापमान नक्‍शा बनकर तैयार हो गया है। इससे साइकी के सतह के बारे में ताजा जानकारी मिली है।

हर दिन Facebook पर आप कितनी देर रहते हैं ऑनलाइन? ऐसे लगा सकते हैं पता, जानिए स्टेप बाय स्पेट प्रोसेस----कैसे सेट करें टा...
05/08/2021

हर दिन Facebook पर आप कितनी देर रहते हैं ऑनलाइन? ऐसे लगा सकते हैं पता, जानिए स्टेप बाय स्पेट प्रोसेस----कैसे सेट करें टाइम लिमिट

Facebook दुनिया का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म है। खाली वक्त में इस प्लेटफॉर्म पर हर दिन लोग कई घंटे गुजार देते हैं। लेकिन अगर आप पता लगाना चाहते हैं कि आखिर आप हर दिन Facebook पर कितना वक्त गुजारते हैं, तो इसका पता लगाना काफी आसान है। दरअसल Facebook की तरफ से एक फीचर दिया जाता है, जो हर एक व्यक्ति के Facebook स्क्रॉल करने के टाइम लिमिट के बारे में जानकारी देता है। Facebook की तरफ से यह जानकारी रोजाना और हर हफ्ते के हिसाब से दी जाती है। इतना ही नहीं, अगर आपको लगता है कि आप फेसबुक पर ज्यादा वक्त गुजराते हैं, तो इसे कंट्रोल करने के लिए रिमाइंडर की सुविधा दी गई है। मलब अगर आप रोजाना Facebook पर 30 मिनट से ज्यादा नहीं गुजारना चाहते हैं, तो आप फेसुबक पर 30 मिनट की टाइम लिमिट सेट कर सकते हैं। ऐसे में 30 मिनट पर आपको Facebook बंद करने का रिमाइंडर मिलेगा।

कैसे Facebook पर बिताने वाले वक्त का लगाएं पता

सबसे पहले Facebook ओपन करें।
इसके बाद टॉप पर तीन डॉटेड लाइन दिखेंगी, जिस पर क्लिक करना होगा
फिर पेज को स्क्रॉल करके नीचे जाना होगा, जहां Settings & Privacy बटन दिखेगा।
इसके बाद Setting & Privacy बटन पर क्लिक करके पर Your Time on Facebook ऑप्शन दिखेगा।
Your Time on Facebook ऑप्शन पर क्लिक करके ही एक नया पेज खुलेगा।
जहां से Facebook पर खर्च किये समय की जानकारी हासिल कर पाएंगे।

कैसे सेट करें टाइम लिमिट

Your Time on Facebook बटन पर क्लिक करने के बाद Set Daily Time Reminder ऑप्शन दिखेगा।जिस पर क्लिक करने पर एक पेज खुलेगा। Daily Time Reminder ऑप्शन से घंटे और मिनट के हिसाब से टाइम सेट कर पाएंगे। इसके अलावा यूजर अपनी नोटफिकेशन सेटिंग में भी बदलाव कर पाएंगे।

NASA ने शेयर किया आकाशगंगा का 13 अरब साल पुराना वीडियो, देखकर रह जाएंगे हैरानअमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने आकाश...
05/08/2021

NASA ने शेयर किया आकाशगंगा का 13 अरब साल पुराना वीडियो, देखकर रह जाएंगे हैरान

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने आकाशगंगा (Galaxy) के 13 अरब साल पुराने डेटा का वीडियो जारी किया है. नासा के हबल टेलीस्कोप के जरिए कैद किए गए इस वीडियो को अब तक करीब 3 लाख व्यूज मिल चुके हैं. वीडियो में नासा (NASA) ने पिछले 13 अरब साल में ध्वनि के जरिए आकाशगंगा (Galaxy) की उत्पत्ति की स्पीड को दिखाया है.

13 अरब साल पुराना डेटा
नासा ने इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए इस वीडियो के साथ लिखा, 'आप 13 अरब साल का डेटा सुन रहे हैं. साल 2014 से इस हबल अल्ट्रा डीप फील्ड इमेज में आकाशगंगाओं को ध्वनि में दिखाया गया है.'

नासा ने आगे लिखा है, 'हम हर एक आकाशगंगा के लिए एक अलग नोट सुन रहे हैं, जब प्रकाश इस इमेज में एमिट होता है, धुन सुनाई देती है. आकाशगंगा जितनी दूर होगी, उसके प्रकाश को हबल तक पहुंचने में उतना ही अधिक समय लगेगा.'
1990 में लॉन्च हुआ टेलीस्कोप
बता दें कि अप्रैल 1990 में नासा (NASA) और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी ने हबल स्पेस टेलीस्कोप को लॉन्च किया था. इसे डिस्कवरी स्पेस शटल के जरिए अंतरिक्ष में भेजा गया था. अमेरिकी एस्ट्रोनॉमर एडविन पोंवेल हबल के नाम पर इस टेलिस्कोप को 'हबल' नाम दिया गया.

इसे अंतरिक्ष में ही सर्विसिंग के हिसाब से डिजाइन किया गया है. यह 13.2 मीटर लंबा है और इसका वजन 11 हजार किलोग्राम है. ये ​टेलीस्कोप धरती के लोवर ऑर्बिट में परिक्रमा करता है.

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