19/02/2020
सड़कों पर गुब्बारे बेच कर बनाई देश की सबसे बड़ी टायर कंपनी
हौसले अगर साथ हों तो ज़िन्दगी के किसी भी मुक़ाम को पाना मुश्किल नहीं। कुछ ऐसे ही मज़बूत इरादों के साथ MRF कंपनी के संस्थापक के. एम्. मेंमन ने अपनी ज़िन्दगी की शुरआत की थी। ये बात कल्पना से परे लगती है की जो कभी सड़कों पर गुब्बारे बेचता हो, वही देश के सबसे बड़े टायर उद्योग का मालिक बन जाए।
हमारा देश अन्य विकासशील देशों की तुलना में, स्वतंत्रता के पहले और बाद भी, इस मामले में अत्यंत भाग्यशाली रहा की यहाँ स्टील, सीमेंट, भारी इंजीनियरिंग, परिवहन और ऑटोमोबाइल टायर जैसे उद्योगों में विदेशी कंपनियों का वर्चस्व नहीं हो पाया, क्योंकि टाटा, बिरला आदि कुछ ऐसे भारतीय उद्योगपति थे जिन्होंने इस क्षेत्र में पहल करने का बीड़ा उठाया था। ऐसे ही एक अग्रणी उद्यमी थे केरल के एम. एम. मैमन जिन्होंने अपनी कंपनी MRF के जरिये भारतीय टायर उद्योग की नीव रखी जो आज देश के सबसे बड़ी टायर कंपनी बन चुकी है।
मैमन नवंबर 1922 में केरल के एक ईसाई परिवार में जन्मे थे। इनके पिता एक निजी बैंक चलाते थे और साथ ही स्थानीय समाचार पत्र का सञ्चालन भी करते थे। तत्कालीन त्रावणकोर की रियासत ने इनके कुछ विवादस्पद लेखों के कारण इन्हें क़ैद कर जेल भेज दिया था। जिसके कारण मैमेन जी का परिवार बड़ी मुश्किलों में पड़ गया। उस समय मैमेन कॉलेज में थे। घर की जिम्मेदारियों को समझते हुए मैमेन अपने भाइयों के साथ मिलकर छोटा-मोटा काम करने लगे।
इन्होंने अपने घर के अहाते में ही गुब्बारे बनाने की एक छोटी सी यूनिट डाली उसे खुद ही सड़कों पर बेचा करते। कुछ दिनों बाद इन्होने टायर रेट्रेडिंग का काम शुरू किया जिसमें इन्हें काफी सफलता मिली। धीरे-धीरे इन्हें टायर उद्योग का भी अनुभव होने लगा। उन दिनों Dunlop, Firestone और Good Year जैसे विदेशी कम्पनियाँ टायर उद्योग पर बुरी तरह हावी थीं, जो की भारत सरकार के लिए एक चिंता का विषय था। अतः सरकार ने भारतीय कंपनियों को आमंत्रित करना शुरू किया। जिसका फ़ायदा मैमेन जी को भरपूर मिला।
अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए मैमेन जी ने अमेरिका की एक कंपनी Mansfield Tyre & Rubber Company के साथ मिलकर साल 1964 में देश की पहली टायर कंपनी बनाई। साल 1967 में इनकी कंपनी अमेरिका को टायर निर्यात करने वाली सबसे पहली कंपनी बनी। साल 1979 इन्होंने नायलॉन टायर भी बनाने शुरू किये। लेकिन इसी साल मेश्फील्ड ने इनके साथ साझा तोड़ लिया और इनकी कंपनी का नाम MRF (मद्रास रबर कंपनी) हो गया।
MRF की छवि को मौजूदा विदेशी कंपनियों ने बिगाड़ने में कोई कमी नहीं छोड़ी। लेकिन मैमन अपनी बढ़िया क्वालिटी के साथ आगे बढ़ते रहे। मैमन व्यक्तिगत रूप से एक बहुत अच्छे आर्टिस्ट थे, उन्होंने ग्राहकों, खासतौर पर ट्रक ड्राइवरों से मिलकर कर उनकी मांग को समझते हुए विख्यात logo "MRF Muscle Man" बनाया जो की टायर की मजबूती का प्रतीक बना।
इसके साथ ही MRF ने मोटर स्पोर्ट्स (Formula1), क्रिकेट अकादमी और क्रिकेट वर्ल्ड कप की स्पोंसर्शिप के जरिये भी अपनी मजबूती बढ़ायी। अपनी इन्हीं रणनीतियों, उत्कृष्ट उत्पादन और ग्राहक की संतुष्टतता के चलते ही MRF आज भारत की सबसे विश्वसनीय और सफल टायर कंपनी बन पायी है।
BadaBusiness Salutes Mr. K. M. Mammen
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