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02/10/2017

बापू को आज कोटि कोटि श्रध्दा सुमन I उनके अहिंसा,करुणा,स्वच्छता व स्वराज के सिद्धांतों को याद करने के साथ उन पर त्वरित एक्शन की जरुरत है I

30/09/2017

साथियों,
असत्य पर सत्य की जीत तथा बुराइयों पर अच्छाई की जीत के पर्व दशहरा पर आपको सपरिवार हार्दिक शुभकामनाएं I भगवान् श्री राम एवं उनका परिवार आपको सैदेव सत्यकर्मों, जनकल्याण के कार्यों, वृद्ध, निर्बलों एवं बीमार व्यक्तियों की सहायता तथा स्वछता की ओर प्रेरित करें I

26/08/2017

प्रिय साथियों,
सीबीआई न्यायालय, पंचकुला के आदेश द्वारा सिरसा के बाबा राम रहीम को बलात्कार की घटना में दोषी करार किये जाने के उपरान्त पंचकुला, सिरसा व दर्जनों अन्य शहरों व स्थानों में हुई हिंसा की घटनाओं ने यह साबित कर दिया है कि भीड़ नियंत्रण की घटनाओं में अधिकांश राज्यों की पुलिस पूर्ण रूप से असफल रही है I उल्लेखनीय है कि भारत के संविधान के अनुसार लोक शांति बनाये रखना राज्यों का प्रमुख कर्तव्य है लेकिन देखा यह गया है कि अधिकांश मामलों में लोक शांति बनाये रखने में राज्य सरकारें विफल रही हैं वह चाहे अयोध्या स्थित बाबरी मस्जिद के तोड़े जाने की घटना हो, गुजरात के दंगों की घटना हो, हरियाणा में ही रामपाल महाराज के डेरे के कब्जे को लेकर हुए दंगे हों या मथुरा में जवाहर बाग की हिंसा की घटना हो जिसमे SP मुकुल दिवेदी व थानाध्यक्ष संतोष यादव की हत्या हुई अथवा अन्य अनेकों साम्प्रदायिक दंगों की घटना हो I
इन घटनाओं के अनेकों कारण हो सकते हैं किन्तु अन्य तमाम कारणों में जहाँ एक कारण बाबा राम रहीम के भक्तों में अंध श्रद्धा के कारण बाबा राम रहीम, रामपाल, आशाराम अथवा रामवृक्ष यादव के आदेश को भगवान् का आदेश मानना हो सकता है वहां दूसरा कारण भीड़ के लोगों में कानून का डर न होना भी है I यह भारत देश के लिए अत्यंत विडंबना ही है कि एक दिल्ली की निर्भय के साथ हुए बलात्कार के दोषियों को सजा दिलाने के लिए वर्ष 2012 में लाखों लोग राजधानी दिल्ली में महामहिम राष्ट्रपति जी के भवन की ओर कूच कर गये और एक कल की बिल्कुल विपरीत घटना जब न्यायालय से दोषी करार किये गए एक बलात्कारी के समर्थन में लाखों लोग पंचकूला, सिरसा में हिंसा पर उतर गए जिसकी आंच कई प्रदेशों में फ़ैल गई जिसमे लगभग 30 व्यक्ति मारे गए और लगभग 250 व्यक्ति घायल हुए I क्या इस घटना से हमारे देश की विश्व में बदनामी नहीं हुई ?? क्या इन घटनाओं से हमारे देश के संविधान और संविधान को बनाने वाले महान व्यक्तियों को आंसू नहीं आये होंगे ??
उल्लेखनीय है कि धारा 144 Cr. P.C. के आदेशों के उल्लंघन की सजा धारा 188 IPC में वर्णित है जो कि वर्तमान में जमानतीय (Bailable) है जिसमे सजा एक माह से अधिकतम 6 माह की है, इसलिए लोगों में धारा 144 का डर नहीं है I
अत: यदि सरकार लोगों को अनुशासित और कानून का उल्लंघन के प्रति डर की भावना जाग्रत करना चाहती है तो उसको गोस्वामी तुलसी दास जी की रामचरित मानस में अंकित चौपाई, “भय बिन प्रीत न होई गुसांई” पर ध्यान देकर नियम कानूनों में कठोर सजा का प्राविधान करना चाहिए I
भीड़ नियंत्रण से सम्बंधित पुलिस/ पैरा मिलिट्री फोर्सेज की ट्रेनिंग/ उनको इस अवसर के लिए उपलब्ध कराये गए हथियार/ टूल्स तथा भीड़ नियंत्रण से सम्बंधित कानूनों को विशेषतया धारा 144 Cr.P.C., तथा भारतीय दण्ड विधान (IPC) के चैप्टर VIII लोक शांति से सम्बंधित (related with public tranquility) धाराएँ 143/144/145/ 147/ 148/151/152/153 I.P.C. आदि {जो कि सभी जमानतीय अपराध हैं और जिनमे 6 माह से अधिकतम कारावास 3 वर्ष का दण्ड का प्राविधान है} तथा इनसे सम्बंधित जमानत एवं न्यायालय में साक्ष्य सम्बंधित धाराओं (Indian Evidence Act) में व्यापक समीक्षा उपरान्त बदलाव की आवश्यकता तत्काल रूप से वांछनीय हो गई है I
उदहारण स्वरुप धारा 304B IPC दहेज़ हत्या में कानून आरोपी को अभियुक्त मानती है तथा न्यायालय में उसे ही स्वयं अपने निर्दोष होने की बात साबित करनी पड़ती है जबकि अन्य समस्त अपराधों में राज्य की ओर से जांच एजेंसी को अभियुक्त के विरुद्ध अपराध साबित करना पड़ता है क्योंकि कानून यह मानता है कि ससुराल के अन्दर बहु की जब हत्या की जाती है तो वहां कोई व्यक्ति उस घटना का गवाह नहीं होता अलावा अभियुक्त/अभियुक्तों के I इसी प्रकार हिंसक भीड़ की इतनी बड़ी तादाद को नियंत्रण करना, गिरफतारी करना ही अपने आप में एक दुष्कर कार्य होता है, तब निष्पक्ष गवाह वहां कहाँ से आयेंगे ?? अत: जो अभियुक्त घटनास्थल पर पुलिस/ पैरामिलिटरी द्वारा धारा 144 Cr.P.C. (जो कि केवल एक निषेधात्मक आदेश है) के उल्लंघन में गिरफ्तार कर आरोप पत्र द्वारा कोर्ट चालान किये जाते हैं, Indian evidence act में बदलाव कर निर्दोष साबित करने की जिम्मेदारी स्वयं अभियुक्तों पर डाली जानी चाहिए I धारा 144 Cr. P.C. के आदेशों के उल्लंघन की सजा धारा 188 IPC में वर्णित है तथा लोक शांति बनाये रखने से सम्बंधित धाराएँ 143/144/145/147/148/151/152/153 I.P.C. जो कि वर्तमान में जमानतीय (Bailable) है को अजमानतीय (Non-bailable) बनाया जाना तथा इनमे सजा की सीमा का बढाया जाना अब अपरिहार्य हो गया है I भले ही कानून व्यवस्था राज्य सरकारों का विषय हैं किन्तु 1. Police Act (जो कि वर्ष 1861 में अंग्रेजों द्वारा बनाया गया था), IPC के चैप्टर VIII (लोक शांति से सम्बंधित धाराएँ) तथा Cr.P.C. व Indian Evidence Act आदि में संशोधन संसद ही कर सकती है हालांकि कुछ मामलों में राज्य सरकार भी कुछ संशोधन कर सकती है किन्तु भीड़ नियंत्रण के मामले में यूनिफार्म अमेंडमेंट जो की पूरे भारत वर्ष के लिए हो निश्चित रूप से प्रभावशाली होने के साथ-साथ हितकर भी होगा I
अत: निवेदन है कि कृपया गंभीरता पूर्वक इस पत्र के तथ्यों पर विचार कर शीघ्र वांछनीय कार्यवाही कर देश की क़ानून व्यवस्था व क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम में व्यापक सुधार करने की कार्यवाही की जाए अन्यथा देश के करोड़ों कानून का पालन करने वाले आम नागरिकों का विश्वास देश की ढीली/ लचर/ विलंबित/ महँगी/ थका देने वाली कानून व न्याय व्यवस्था से भरोसा उठ जाएगा I
इस पत्र को आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी, भारत सरकार, नई दिल्ली तथा माननीय केंद्रीय गृह मंत्री जी भारत सरकार, नई दिल्ली को भी प्रेषित किया जा रहा है I
आप यदि इस पोस्ट से सहमत हों तो कृपया इसको like कर अधिक से अधिक शेयर कीजिएगा I
जय हिन्द,
जस्टिस इंडिया आर्गेनाईजेशन

26/08/2017

सिरसा स्थित डेरा बाबा राम रहीम की रेप पीड़िता साध्वी की इस गुमनाम चिट्ठी को पंचकूला के स्थानीय सांध्य दैनिक अखबार 'पूरा सच' में अक्षरश: प्रकाशित किया गया था. आरोप है कि इसके बाद राम रहीम के इशारे पर 'पूरा सच' अखबार के संपादक रामचन्द्र छत्रपति के घर में घुसकर उन्हें गोलियों से छलनी कर दिया गया था. उसी चिट्ठी के आधार पर राम रहीम को सीबीआई कोर्ट ने रेपिस्ट करार दिया है. कोर्ट की ओर से गुरमीत राम रहीम को दोषी ठहराए जाने के बाद साध्वी की उसी गुमनाम चिट्ठी को दैनिक जागरण ने प्रकाशित किया है, आप पढ़िए किन शब्दों में पीड़िता ने बयां किया था दर्द-:

सेवा में,
माननीय प्रधानमंत्री महोदय जी श्री अटल बिहारी वाजपेयी, भारत सरकार

विषय : डेरे के महाराज द्वारा सैकड़ों लड़कियों से बलात्कार की जांच करें.

श्रीमान जी, यह है कि मैं पंजाब की रहने वाली हूं और अब पांच साल से डेरा सच्चा सौदा सिरसा, हरियाणा (धन-धन सतगुरु तेरा ही आसरा) में साधु लड़की के रूप में सेवा कर रही हूं. मेरे साथ यहां सैकड़ों लड़कियां भी डेरे में 18-18 घंटे सेवा करती हैं. हमारा यहां शारीरिक शोषण किया जा रहा है. साथ में डेरे के महाराज गुरमीत सिंह द्वारा योनिक शोषण (बलात्कार) किया जा रहा है. मैं बीए पास लड़की हूं. मेरे परिवार के सदस्य महाराज के अंध श्रद्धालु हैं, जिनकी प्रेरणा से मैं डेरे में साधु बनी थी.

साधु बनने के दो साल बाद एक दिन महाराज गुरमीत की परम शिष्या साधु गुरुजोत ने रात के 10 बजे मुङो बताया कि आपको पिता जी ने गुफा (महाराज के रहने का स्थान) में बुलाया है. मैं क्योंकि पहली बार वहां जा रही थी, मैं बहुत खुश थी. यह जानकर कि आज खुद परमात्मा ने मुङो बुलाया है. गुफा में ऊपर जाकर जब मैंने देखा महाराज बेड पर बैठे हैं. हाथ में रिमोट है, सामने टीवी पर ब्लू फिल्म चल रही है. बेड पर सिरहाने की ओर रिवॉल्वर रखा हुआ है. मैं यह सब देखकर हैरान रह गई. मुझे चक्कर आने लगे. मेरे पांव के नीचे की जमीन खिसक गई. यह क्या हो रहा है. महाराज ऐसे होंगे? ऐसा मैंने सपने में भी नहीं सोचा था. महाराज ने टीवी को बंद किया व मुङो साथ बिठाकर पानी पिलाया और कहा कि मैंने तुम्हें अपनी खास प्यारी समझकर बुलाया है. मेरा यह पहला दिन था.

महाराज ने मेरे को बांहों में लेते हुए कहा कि हम तुझे दिल से चाहते हैं. तुम्हारे साथ प्यार करना चाहते हैं, क्योंकि तुमने हमारे साथ साधु बनते वक्त तन-मन-धन सब सतगुरु के अर्पण करने को कहा था. तो अब ये तन-मन हमारा है. मेरे विरोध करने पर उन्होंने कहा कि इसमें कोई शक नहीं हम ही खुदा हैं.

जब मैंने पूछा कि क्या यह खुदा का काम है तो उन्होंने कहा - श्री कृष्ण भगवान थे, उनके यहां 360 गोपियां थीं जिनसे वह हर रोज प्रेम लीला करते थे. फिर भी लोग उन्हें परमात्मा मानते हैं, यह कोई नई बात नहीं है. हम चाहें तो इस रिवॉल्वर से तुम्हारे प्राण पखेरू उड़ाकर दाह संस्कार कर सकते हैं. तुम्हारे घरवाले इस प्रकार से हमारे पर विश्वास करते हैं व हमारे गुलाम हैं. वह हमारे से बाहर जा नहीं सकते. यह तुमको अच्छे से पता है. हमारी सरकार में बहुत चलती है.

हरियाणा व पंजाब के मुख्यमंत्री, पंजाब के केंद्रीय मंत्री हमारे चरण छूते हैं. राजनीतिज्ञ हमसे समर्थन लेते हैं, पैसा लेते हैं और हमारे खिलाफ कभी नहीं जाएंगे. हम तुम्हारे परिवार के नौकरी लगे सदस्यों को बर्खास्त करवा देंगे. सभी सदस्यों को अपने सेवादारों (गुडों) से मरवा देंगे. सबूत भी नहीं छोड़ेंगे. यह तुम्हें अच्छी तरह पता है कि हमने गुंडों से पहले भी डेरे के प्रबंधक फकीर चंद को खत्म करवा दिया था जिनका अता-पता तक नहीं है. ना ही कोई सबूत बकाया है. जो कि पैसे के बल पर हम राजनीतिक व पुलिस और न्याय को खरीद लेंगे. 1इस तरह मेरे साथ मुंह काला किया और पिछले तीन मास में 20-30 दिन बाद किया जा रहा है.

आज मुझको पता चला कि मेरे से पहले जो लड़कियां रहती थीं, उन सबके साथ मुंह काला किया गया है. डेरे में मौजूद 35-40 साधु लड़की 35-40 वर्ष की उम्र से अधिक हैं जो शादी की उम्र से निकल चुकी हैं. जिन्होंने परिस्थितियों से समझौता कर लिया है. इनमें ज्यादातर लड़कियां बीए, एमए, बीएड, एमफिल पास हैं, मगर घरवालों के अंधविश्वासी होने के कारण नरक का जीवन जी रही हैं.

हमें सफेद कपड़े पहनना, सिर पर चुन्नी रखना, किसी आदमी की तरफ आंख न उठाकर देखना, आदमी से 5-10 फुट की दूरी पर रहना महाराज का आदेश है लेकिन दिखाने में देवी हैं मगर हमारी हालत वेश्याओं जैसी है.

मैंने एक बार अपने परिवारवालों को बताया कि डेरे में सबकुछ ठीक नहीं है तो मेरे घर वाले गुस्से में होते हुए कहने लगे कि अगर भगवान के पास रहते हुए ठीक नहीं है तो ठीक कहां है. तेरे मन में बुरे विचार आने लग गए हैं. सतगुरु का सिमरण किया कर. मैं मजबूर हूं. यहां सतगुरु का आदेश मानना पड़ता है. यहां कोई भी दो लड़कियां आपस में बात नहीं कर सकतीं. घरवालों को टेलिफोन मिलाकर बात नहीं कर सकतीं. घरवालों का हमारे नाम फोन आए तो हमें बात करने का महाराज के आदेशानुसार हुक्म नहीं है. यदि कोई लड़की डेरे की इस सच्चाई के बारे में बात करती है तो महाराज का हुक्म है कि उसका मुंह बंद कर दो.

पिछले दिनों बठिंडा की लड़की साधु ने जब महाराज की काली करतूतों का सभी लड़कियों के सामने खुलासा किया तो कई साधु लड़कियों ने मिलकर उसे पीटा. जो आज भी घर पर इस मार के कारण बिस्तर पर पड़ी है. जिसका पिता ने सेवादारों से नाम कटवाकर चुपचाप घर बैठा दिया है. जो चाहते हुए भी बदनामी और महाराज के डर से किसी को कुछ नहीं बता रही.

एक कुरुक्षेत्र जिले की एक साधु लड़की जो घर आ गई है, उसने अपने घर वालों को सब कुछ सच बता दिया है. उसका भाई बड़ा सेवादार था, जो कि सेवा छोड़कर डेरे से नाता तोड़ चुका है. संगरूर जिले की एक लड़की जिसने घर आकर पड़ोसियों को डेरे की काली करतूतों के बारे में बताया तो डेरे के सेवादार / गुंडे बंदूकों से लैस लड़की के घर आ गए. घर के अंदर से कुंडी लगाकर जान से मारने की धमकी दी व भविष्य में किसी से कुछ भी नहीं बताने को कहा.

इसी प्रकार कई लड़कियां जैसे कि जिला मानसा (पंजाब), फिरोजपुर, पटियाला, लुधियाना की हैं. जो घर जाकर भी चुप हैं क्योंकि उन्हें जान का खतरा है. इसी प्रकार जिला सिरसा, हिसार, फतेहबाद, हनुमान गढ़, मेरठ की कई लड़कियां जो कि डेरे की गुंडागर्दी के आगे कुछ नहीं बोल रहीं.

अत: आपसे अनुरोध है कि इन सब लड़कियों के साथ-साथ मुङो भी मेरे परिवार के साथ जान से मार दिया जाएगा अगर मैं इसमें अपना नाम-पता लिखूंगी. क्योंकि मैं चुप नहीं रह सकती और ना ही मरना चाहती हूं. जनता के सामने सच्चाई लाना चाहती हूं. अगर आप प्रेस के माध्यम से किसी भी एजेंसी से जांच करवाएं तो डेरे में मौजूद 40-45 लड़कियां जो कि भय और डर में हैं. पूरा विश्वास दिलाने के बाद सच्चाई बताने को तैयार हैं. हमारा डॉक्टरी मुआयना किया जाए ताकि हमारे अभिभावकों व आपको पता चल जाएगा कि हम कुमारी देवी साधु हैं या नहीं. अगर नहीं तो किसी के द्वारा बर्बाद हुई हैं. ये बता देंगे कि महाराज गुरमीत राम रहीम सिंह जी, संत डेरा सच्चा सौदा के द्वारा तबाह की गई हैं.

प्रार्थी: एक निर्दोष जलालत का जीवन जीने को मजबूर (डेरा सच्चा सौदा सिरसा).
साभार: NDTV khabar

26/08/2017

प्रिय साथियों,

कल पंचकूला स्थित सीबीआई न्यायालय द्वारा बाबा राम रहीम को बलात्कार के प्रकरण में दोषी ठहराये जाने की घटना में बाबा राम रहीम के नापाक चेहरे को पूरी दुनिया के सामने बेपर्दा करने का पूरा श्रेय उन 2 साध्वियों को जाता है जिन्होंने बाबा राम रहीम के खतरनाक गुंडों के आंतक के चलते तथा अपने भाई रंजीत सिंह की हत्या के बावजूद भी अपनी जिंदगी की परवाह न करके अपने विरुद्ध हुए वीभत्स अत्याचार के विरुद्ध इन्साफ पाने के लिए 15 वर्षों तक लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी I वास्तव में तो निर्भय भारत की यह दो बेटियां हैं I और एक दिल्ली की निर्भय थी जो सबको जगाकर स्वयं सो गई I

यह संगठन हरियाणा की इन दोनों साध्वियों को नमन करता है I साथ ही इस केस के CBI के जांच कर्ता श्री सतीश डागर जी जिन्होंने अथक प्रयास कर गुमनाम साध्वी को खोज निकाला और उसको विश्वास में लेकर अन्य पीड़ित साध्वियों से संपर्क किया और साक्ष्य एकत्रित किया और अत्यंत दबाव व डेरे के गुंडों की धमकियों से अविचलित रहते हुए अत्यंत विषम परिस्थितियों में गवाही इकट्ठी की और कोर्ट में अन्तोत्गात्वा समस्त गवाही को कलमबंद कराने में सफलता प्राप्त की, को भी उनकी अत्यंत बहादुरी, व्यावसायिक सूझभूझ व हिम्मत की दाद देनी पड़ेगी जिसके लिए वह भारत सरकार से अति विशेष सम्मान प्राप्त करने के अधिकारी बनते हैं I यह संगठन उनको भी नमन करता है I

यह संगठन आपसे दोनों साध्वियों के साथ-साथ दिल्ली की निर्भया (मरणोपरांत) सहित “निर्भया मेडल” से सम्मानित करने की शुरुवात करने, हरियाणा की दोनों साध्वियों (जिन्होंने सीबीआई कोर्ट में गवाही दी) को सरकारी नौकरी और एक-एक फ्लैट दिल्ली अथवा चंडीगढ़ में (जहाँ वह चाहें) देने और उनको फुल प्रूफ सुरक्षा दिए जाने की प्रबल संस्तुति करता है ताकि देश की हजारों, लाखों ऐसी लड़कियों, महिलाओं यहाँ तक की अन्य व्यक्तियों को भी मानसिक शक्ति प्राप्त हो सके जो गुंडों व दादाओं की धमकियों के सामने अपने विरुद्ध हो रहे अथवा हुए अत्याचार के विरुद्ध चुप होकर बैठ जाते हैं और न्याय की किरण उन तक नहीं पहुँच पाती है I यह संगठन आपसे से यह भी निवेदन करता है कि दिल्ली के निर्भय काण्ड की नायिका तथा अब सिरसा काण्ड के विरुद्ध बाबा राम रहीम की दोनों साध्वी नायिकाओं की यह अत्यंत साहसपूर्ण कथाओं को CBSE के पाठ्यक्रम में शामिल कराकर अगले वर्ष से NCERT की किताबों में प्रिंट कराने की कृपा करें I

सिरसा स्थित बाबा राम रहीम डेरा की इस अत्यंत रहस्यमय, अति गोपनीय एवं अति वीभत्स घटना के सत्य को उजागर करने में स्थानीय समाचार पत्र "पूरा सच" के संपादक स्वर्गीय राम चंदर छत्रपति जिन्होंने सिरसा काण्ड की घटना (विरुद्ध बाबा राम रहीम) का निर्भय साध्वी का पत्र सबसे पहले साहस करके अपने समाचार पत्र में प्रकाशित किया था जिसके पश्चात् बाबा राम रहीम के गुंडों की धमकियों के बावजूद भी वह इस केस की रिपोर्टिंग छापते रहे और अन्तोत्गत्वा डेरा के गुंडों द्वारा उनकी हत्या कर दी गई, का भी बहुत बड़ा योगदान था जिनको पत्रकार जगत में सर्वोच्च स्थान मीडिया जगत की ओर के साथ-साथ भारत सरकार की ओर से सेना मेडल, पुलिस मेडल की भांति “मीडिया मेडल” सहित उनके परिवार को शहीद सैनिक की भांति पेंशन भी मिलना चाहिए I साथ ही इस केस के सीबीआई जांचकर्ता को बेस्ट इन्वेस्टीगेशन के ख़िताब से नवाजा जाना चाहिए और उनको भी राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत किये जाने की प्रबल अनुशंसा यह संगठन करता है I
यदि आप इस पोस्ट से सहमत हों तो इसको अवश्य like कर अधिक से अधिक शेयर करें I इस पत्र को ईमेल द्वारा आदरणीय प्रधान मंत्री जी श्री नरेन्द्र मोदी जी व केंद्रीय गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह जी को भी प्रेषित किया जा रहा है I
जय हिन्द
जस्टिस इंडिया आर्गेनाईजेशन

25/08/2017

It's time to start National NIRBHAYA MEDAL from 2 SADHVIS, the real heroine of RAM RAHEEM conviction

आदरणीय श्री नरेन्द्र मोदी जी
प्रधान मंत्री, भारत सरकार, नई दिल्ली
प्रणाम !

आज पंचकूला स्थित सीबीआई न्यायालय द्वारा बाबा राम रहीम को बलात्कार के प्रकरण में दोषी ठहराये जाने की घटना में बाबा राम रहीम के नापाक चेहरे को पूरी दुनिया के सामने बेपर्दा करने का पूरा श्रेय उन 2 साध्वियों को जाता है जिन्होंने बाबा राम रहीम के खतरनाक गुंडों के आंतक के चलते अपनी जिंदगी की परवाह न करके अपने विरुद्ध हुए वीभत्स अत्याचार के विरुद्ध इन्साफ पाने के लिए 15 वर्षों तक लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी I वास्तव में तो निर्भय भारत की यह दो बेटियां हैं I यह संगठन इन दोनों साध्वियों को सलाम करता है I साथ ही इस केस के CBI के जांच कर्ता को भी उनकी अत्यंत बहादुरी, व्यावसायिक सूझभूझ व हिम्मत की दाद देनी पड़ेगी जिन्होंने अत्यंत विषम परिस्थितियों में गवाही इकट्ठी की और कोर्ट में अन्तोत्गात्वा समस्त गवाही को कलमबंद कराने में सफलता प्राप्त की I यह संगठन उनको भी सलाम करता है I यह संगठन आपसे दोनों साध्वियों को निर्भया मेडल से सम्मानित करने की शुरुवात करने, दोनों को सरकारी नौकरी और एक-एक फ्लैट दिल्ली अथवा चंडीगढ़ में (जहाँ वह चाहें) देने की प्रबल संस्तुति करता है ताकि देश की हजारों, लाखों ऐसी लड़कियों, महिलाओं यहाँ तक की अन्य व्यक्तियों को भी मानसिक शक्ति प्राप्त हो सके जो गुंडों व दादाओं की धमकियों के सामने अपने विरुद्ध हो रहे अथवा हुए अत्याचार के विरुद्ध चुप होकर बैठ जाते हैं और न्याय की किरण उन तक नहीं पहुँच पाती है I यह संगठन आपसे से यह भी निवेदन करता है कि दिल्ली के निर्भय काण्ड की नायिका तथा अब सिरसा काण्ड के विरुद्ध बाबा राम रहीम की दोनों साध्वी नायिकाओं की यह अत्यंत साहसपूर्ण कथाओं को CBSE के पाठ्यक्रम में शामिल कराकर अगले वर्ष से NCERT की किताबों में प्रिंट कराने की कृपा करें I इस घटना के सत्य को उजागर करने में स्थानीय समाचार पत्र "पूरा सच" के संपादक स्वर्गीय राम चंदर छत्रपति जिन्होंने सिरसा काण्ड की घटना (विरुद्ध बाबा राम रहीम) का निर्भय साध्वी का पत्र सबसे पहले साहस करके अपने समाचार पत्र में प्रकाशित किया था जिसके पश्चात् बाबा राम रहीम के गुंडों की धमकियों के बावजूद भी वह इस केस की रिपोर्टिंग छापते रहे और अन्तोत्गत्वा उनकी हत्या कर दी गई, का भी बहुत बड़ा योगदान था जिसको पत्रकार जगत में सर्वोच्च स्थान मीडिया जगत की ओर के साथ-साथ भारत सरकार की ओर से भी मिलना चाहिए I साथ ही इस केस के जांचकर्ता को बेस्ट इन्वेस्टीगेशन के ख़िताब से नवाजा जाना चाहिए और उनको भी राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत किये जाने की प्रबल अनुशंसा यह संगठन करता है I
न्यायालय के आदेश के पश्चात् पंचकुला, सिरसा व दर्जनों अन्य शहरों व स्थानों में हुई हिंसा की घटनाओं ने यह साबित कर दिया है कि भीड़ नियंत्रण की घटनाओं में अधिकांश राज्यों की पुलिस पूर्ण रूप से असफल रही है I भीड़ नियंत्रण से सम्बंधित पुलिस/ पैरा मिलिट्री फोर्सेज की ट्रेनिंग/ उनको इस अवसर के लिए उपलब्ध कराये गए हथियार/ टूल्स तथा भीड़ नियंत्रण से सम्बंधित कानूनों यथा 144 Cr.P.C.,188 IPC 147/148 /149 IPC आदि को व्यापक समीक्षा उपरान्त बदलाव की आवश्यकता तत्काल रूप से वांछनीय हो गई है I भले ही कानून व्यवस्था राज्य सरकारों का विषय हैं किन्तु Police Act 1861, Cr.P.C.,तथा I.P.C. सेंट्रल एक्ट हैं और इनमें संशोधन संसद ही कर सकती है I
अत: निवेदन है कि कृपया गंभीरता पूर्वक इस पत्र के तथ्यों पर विचार कर शीघ्र वांछनीय कार्यवाही कर देश की क़ानून व्यवस्था व क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम में व्यापक सुधार करने की कार्यवाही की जाए अन्यथा देश के करोड़ों कानून का पालन करने वाले आम नागरिकों का विश्वास देश की ढीली/ लचर/विलंबित/ महँगी/ थका देने वाली कानून व न्याय व्यवस्था से भरोसा उठ जाएगा
सम्मान सहित,
justiceindia.org

14/06/2016
केजरी जी, क्याआपने इनकी पीड़ा को समझा और एहसास किया ? 16जूनको इस घटना की तीसरी बरसी है ? अभी तक दिल्ली स्टेट का कंपनसेशन ...
14/06/2016

केजरी जी, क्याआपने इनकी पीड़ा को समझा और एहसास किया ? 16जूनको इस घटना की तीसरी बरसी है ? अभी तक दिल्ली स्टेट का कंपनसेशन नहीं मिला जो अन्य राज्यों की भांति आपको देना था और देना है ? कृपया अधिक से अधिक शेयर करें I

वर्ष 2013 में घटित केदारनाथ त्रासदी  के पीड़ितों के दिल्ली वासी होने की सजा ????? सभी प्रेमियों, मित्रों और शुभ चिन्तकों ...
12/06/2016

वर्ष 2013 में घटित केदारनाथ त्रासदी के पीड़ितों के दिल्ली वासी होने की सजा ?????

सभी प्रेमियों, मित्रों और शुभ चिन्तकों जिन्होंने फेस बुक के पेज जस्टिस इंडिया आर्गेनाईजेशन (JIO) को पसंद (like) किया है और जो उनका भी जो भविष्य में इस पेज को पसंद करेंगे और इससे जुड़े रहेंगे, यह संगठन ह्रदय से आभार प्रकट करता है और उन सबके स्वास्थ्य और प्रसन्नता के लिए ईश्वर से प्रार्थना करता है I
आप समस्त भाई और बहनों को 3 वर्ष पूर्व की केदारनाथ त्रासदी की भयानक घटना याद होगी जिसमे हजारों व्यक्ति चंद मिनटों में भीषण बाढ़ में मृत्यु की गोद में समां गए थे I वे अत्यंत खुशनसीब है जो इस भयानक त्रासदी से बच निकले थे किन्तु उन्होंने भी अपने एक या अनेक प्रियजनों को खो दिया था I
दिनांक 16-06-2016 को इस त्रासदी को तीसरी (3rd) पुण्य तिथि हैं I विस्मृति का मानव स्वभाव है किन्तु जानबूझ कर नहीं अपितु जीवन को जीवंत रखने के लिये I अतीत की यादें समाप्त नहीं होती, किसी कोने में दबी, सिमटी रहती हैं और समय पर तत्काल जीवंत हो जाती हैं I
होनी को कोई टाल तो नहीं सकता किन्तु आपस के सहयोग से कथित घटना के दुःख को बाँट लेने से वह कम जरूर लगने लगता है I दुःख की इस घडी में 3 वर्ष पूर्व जब यह घटना हुई थी, उसमे लापता/मृत अपनों व उन सभी जवानों जिन्होंने पीड़ितों को बचाने व राहत कार्य में अपनी जान गवां दी थी की याद में भीगी पलकों से इंडिया गेट पर दिनांक 29-06-2013 को मौन धारण कर संध्या के समय दिल्ली व आसपास के जनपदों के सैकडों स्त्री-पुरुषों ने एकत्रित होकर श्रधांजलि अर्पित की थी और और उनकी आत्मा की शान्ति के के लिए मोमबत्ती प्रज्वलित की थी I
साथियों, आपको याद होगा उस समय केंद्र में श्री मनमोहन जी की सरकार ने ऐलान किया था कि इस घटना में मृत प्रत्येक व्यक्ति के वारिस को 3.5 लाख रु० (2 लाख प्रधान मंत्री राहत कोष व 1.5 लाख रु० केंद्रीय सरकार के डिजास्टर मैनेजमेंट फण्ड से ) दिया जायेगा तथा प्रत्येक राज्य सरकार अपने-अपने प्रदेश के निवासियों को एक मुश्त कंपनसेशन देगी I उत्तराखंड सरकार द्वारा मृत्यु प्रमाण पत्र होते ही केंद्रीय सरकार का धन अन्य राज्यों में समय से वितरित हो गया और उन्होंने अपने-अपने प्रदेश का अनुदान पीड़ित परिवारों को घटना के 1 से 2 वर्षों के अन्दर-अन्दर दे दिया जिसमे सबसे कम अनुदान उ.प्र. व गुजरात सरकार का 2-2 लाख का रहा I सबसे अच्छा कार्य राजस्थान की गहलौत सरकार का रहा जिन्होंने 5-5 लाख प्रत्येक पीड़ित परिवार को देने के अलावा प्रत्येक परिवार के एक योग्य सदस्य को सरकारी नौकरी उपलब्ध कराई और साथ ही जिस परिवार में माता-पिता में से कोई एक लापता हो गए और उनके परिवार में उनकी पुत्री है, उसके नाम 4 लाख रूपये की FD कराई गई व 4,000/- मासिक अनुदान (शादी होने तक) प्रारंभ कराया गया I इसके अतिरिक्त हरियाणा सरकार द्वारा 5 लाख, तमिलनाडु सरकार द्वारा 3.5 लाख, उत्तराखंड सरकार द्वारा 3.5 लाख अलग से अपने- अपने प्रदेश के पीड़ितों को प्रदान किया गया I
इस मामले में दिल्ली प्रदेश के पीड़ित व्यक्ति सबसे अधिक दुर्भाग्यशाली रहे जिनको केंद्रीय सहायता के अलावा राज्य सरकार से आज तक फूटी कौड़ी भी नहीं मिली I उल्लेखनीय है कि घटना के समय न तो शीला सरकार (कांग्रेस) और न ही तब से आज तक केजरीवाल सरकार ने इन पीड़ित परिवारों पर अपनी दया द्रष्टि नहीं की जो कि भारतवर्ष के अन्य सभी राज्य के मुख्य मंत्री अपने अपने प्रदेशों के पीड़ित परिवारों पर कर चुके हैं I उल्लेखनीय है कि दिल्ली प्रदेश के 143 व्यक्ति सरकारी अभिलेखों के अनुसार लापता/मृत हैं जिनको मृत्यु प्रमाण पत्र जारी हुए है और 5 व्यक्ति ऐसे हैं जिनको अभी तक मृत्यु प्रमाण पत्र भी जारी नहीं हुए और उनको उत्तराखंड सरकार से मृत्यु प्रमाण पत्र दिलाने के लिए दिल्ली सरकार ने कोई भी ठोस प्रयास आज तक नहीं किया I इन व्यक्तियों के मृत्यु प्रमाण पत्र अभी तक नहीं मिल पाने के कारण उनके परिवारों को आज तक केंद्रीय सरकार का 3.5 लाख अनुदान भी नहीं मिल पाया है जिसके कारण उनका जीवन मृत्यु से भी बद्दतर हो गया है किन्तु केजरी सरकार के कान पर आज तक जूं नहीं रेंगी I हाँ यदि अल्प संख्यक (कथित) समुदाय के लोग यह होते तो करोड़ों रूपये का अनुदान कभी का मिल गया होता जैसा कि हो ही रहा है और आप लोग अखबारों में पढ़ ही रहे होंगे I यद्यपि उनको भी विशेष परिस्तिथियों में अनुदान दिया गया है तो अनुचित नहीं किन्तु समता और समानता का नियम सभी के लिए एक सामान क्यों नहीं ??

“ केदारनाथ आपदा पीड़ित परिवार संघ, दिल्ली ” नाम से मंच से अनेकों प्रतिवेदन केजरीवाल जी को दिए गये जिनमे 2 बार उनको व्यक्तिगत रूप से व 2 बार उनके आवास के कार्यालय में सुश्री स्वाति मालीवाल जी को व एक उनके अधीक्षक को I इसके अलावा श्री रामनिवास गोयल जी, स्पीकर, विधान सभा, दिल्ली तथा श्री कपिल मिश्र जी, माननीय मंत्री जल, पर्यटन एवं भाषा से भी व्यक्तिगत रूप से मिलकर प्रतिवेदन दिए गए लेकिन परिणाम वही ढाक के तीन पात I
मित्रों, दिल्ली सरकार के सामने प्रार्थना करते- करते थक चुके है और पीड़ित परिवारों में इतना धन व बल नहीं है कि वह धरना- प्रदर्शन कर सकें I वह सब पहले से ही टूटे हुए है I केजरीवाल सरकार के लिए यह बड़ा ही सुनहरी अवसर ऐसे वास्तविक गरीब, बेसहारा ओर अनेकों विधवाओं की लाठी बन कर पुण्य कमाने का था जिसको उन्होंने जान बूझ कर खो दिया है I शायद इन 143+ 5 पीड़ित परिवारों को दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी का निवासी होने का दण्ड केजरीवाल सरकार द्वारा दिया जा रहा है I किन्तु केजरीवाल को इतना तो पता होना ही चाहिए कि गरीब की आह महल को भी उजाड़ देती है I
साथियों, फैसला आपके हाथ में है I आपसे इतना ही अनुरोध है कि कृपया इस पोस्ट को पढ़कर अधिक से अधिक सोशल मीडिया पर इसका प्रचार प्रसार करें और आगे आने वाले समय में गरीब और पीड़ित जनता की ताकत का एहसास केजरीवाल सरकार को करा देने में सहयोग करें I
इस त्रासदी में मृत सभी व्यक्तियों की आत्मा को भीगी पलकों से नमन करते हुए श्रधांजलि सुमन अर्पित I JusticeIndia.Org

21/05/2016

Better Late Than Never Is A Right Decision- Needs to begin tradition awarding medal to such martyr ?
Kejri announcement of Rs 1 Crore, 25 Lakh by MHA, Central Govt and a job to the wife of martyr officer will certainly minimize the sadness of Khan’s family. Moreover it will boost the spirit of honest and bold officers. This decision will also help the govt. to fight against corruption. The decisions of both the government are highly appraised and praised. The governments should also begin the tradition to award a medal to such officer(s) who fight/fought fearlessly against corruption and loose their life or disable their organs excluding the financial compensation and service to one of family member. If Kejriwal ji will read this tweet, he is requested to send a proposal to central govt. for the same. Many-2 thanks to Kejriwal ji and HM Shri Rajnath Singh Ji from JusticeIndia.Org

19/05/2016

For Justice to NDMC Estate Officer Mohd. Moeen Khan & his family
देश की जनता गत माह अप्रैल में NIA के DSP तंजील अहमद व उसकी पत्नी पर हुई ताबड़तोड़ गोलीकांड को नहीं भूली जिसमे तंजील अहमद साहब की हत्या हुई I इस घटना को प्रारंभ में मीडिया के अनुसार आतंकवादिओं के द्वारा हत्या किये जाने पर आशंका व्यक्त की गई थी किन्तु जांच के उपरान्त यह घटना प्रॉपर्टी विवाद के कारण होना साबित हुई जिसमे कुछ अभियुक्त गिरफ्तार भी किये जा चुके हैं. तंजील अहमद की ओखला में शव यात्रा में दिल्ली के मुख्या मंत्री अरविन्द केजरीवाल शरीक हुए और जांच के रिजल्ट आने से पूर्व ही तंजील अहमद के परिवार को एक करोड़ रूपये का अनुदान दिए जाने की घोषणा कर दी किन्तु 3 दिन पूर्व केजरीवाल जी की विधान सभा क्षेत्र में कार्यरत NDMC के एस्टेट अफसर मोहम्मद मोइन खान जो ‘कनाट होटल’ के मालिक रमेश कक्कड़ के द्वारा दिए गए बड़े लालच और धमकी के आगे नहीं झुकने और ईमानदारी पर अटल रहने के कारण 147 करोड़ के देनदार रमेश कक्कड़ के क्रोध का शिकार होकर उसके गुर्गों की जामिया नगर, दिल्ली में अनेकों गोलियां खाकर जान गवां बैठेने पर भ्रष्टाचार को जड़ से समाप्त करने का नारा लगाने वाली आप की सरकार के मुखिया केजरीवाल द्वारा 1 करोड़ उसके परिवार को देने की बात तो दूर, 2 शब्द भी उसकी ईमानदारी की शहादत पर न बोल सके और वह मात्र भ्रष्टाचार के विरुद्ध यह गाना, “एक ऐसे गगन के तले, जहाँ चोर न हो जहाँ भ्रष्ट भी न हो बस आपका राज चले” गुनगुनाते रहे? NDMC के मेयर ने भी क्या किया? क्या वह अपने ऐसे ईमानदार, बहादुर व कर्मठ अधिकारी के घर उसके परिवार को सान्तवना देने गए? नेताओं में ऐसी संवेदना कहाँ? चाहे वह किसी भी पार्टी के हो ? वह तो केवल वहां जाते है जहाँ जाने से उनको वोट बैंक का लाभ दिखाई देता हो I क्या इस प्रकार की घटनाओं से ईमानदार अधिकारियों का मनोबल नहीं टूटेगा? क्या सरकारी अधिकारी जान गवांने के बजाये इस प्रकार के भ्रष्ट व्यापारियों/ अपराधियों से एन केन पराकरेण समझौता करने में ही भलाई नहीं समझेंगें ? अभी तक पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों/ कर्मचारियों द्वारा तो ईमानदारी से अपराधियों के विरुद्ध कार्यावाही करने में अपनी जान गवाने की अनेकों घटनाएं सामने आयी है लेकिन सिविलियन अफसरों द्वारा ईमानदारी पर अडिग रहने व निर्भय रहकर अपने दायित्व से पीछे न हटने का और उसके कारण अपनी जान गंवाने का यह अनोखा मामला वह भी देश की राजधानी में प्रकाश में आया है I इस प्रकार के अति विशिष्ठ प्रकरण में ईमानदार अधिकारियों में उत्साह भरने व निर्भयपूर्वक कार्य करने हेतु मनोबल बढाने के लिए तत्काल खान परिवार को आर्थिक अनुदान दिए जाने, उसके परिवार के एक योग्य सदस्य/आश्रित को उसी विभाग में यथा योग्य नौकरी दिए जाने के अलावा मरणोपरांत ईमानदारी के मेडल से अलंकृत किये जाने की महती आवश्यकता है जिससे भ्रष्टाचार विरोधी आन्दोलन को प्रयाप्त बल मिल सके और समाज में भी एक अच्छा सन्देश जा सके I जिस प्रकार सेना व पुलिस में शौर्य, बहादुरी, विशिष्ट, अति विशिष्ट सेवाओं के लिए सम्बंधित अधिकारियों को पदक प्रदान किये जाते हैं इसी प्रकार केंद्र सरकार व राज्य सरकारों को भी अपने सिविलियन अधिकारियों/ कर्मचारियों को भी एस्टेट अफसर मोहमद मोइन खान की तरह निर्भय होकर ईमानदारीपूर्वक कार्य करने पर पदक (मेडल) प्रदान करने की परम्परा की शुरुआत की जानी चाहिए I इस प्रकरण में मीडिया ने 16 मई की इस सनसनीखेज घटना को 3 दिन बाद आज 19 मई को देश के सामने प्रकट किया है, इसका कारण तो वही जाने किन्तु विलम्ब का कारण उसको अपनी साख कायम रखने के लिए स्पष्ट करना चाहिए I जस्टिस इंडिया आर्गेनाईजेशन (justiceIndia.Org) शहीद एस्टेट अफसर मोहम्मद मोइन खान की ईमानदारी व निर्भीकता को सलाम करता है और उसकी आत्मा की शांति के लिए एक परमात्मा/ अल्लाह से प्रार्थना करता है तथा उसके परिवार पर आयी इस दुःख की घडी में उसके साथ है I देश के प्रधान मंत्री आदरणीय नरेन्द्र मोदी जी से अति विनम्र अनुरोध है कि कृपया इस प्रकरण में हुए शहीद ऐसे ईमानदार व निर्भीक अधिकारी तथा उसके दुखी परिवार के प्रति सहानुभूति प्रकट करते हुए उनको आर्थिक अनुदान, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी तथा शहीद मोहम्मद मोइन खान की ईमानदारी व निर्भीकता को गौरान्वित कराने हेतु शीघ्र कार्यवाही करें ताकि देश के ईमानदार अधिकारियों में निर्भीकता से ईमानदारी से कार्य करते रहने की प्रेरणा मिलती रहे I

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