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   हुँ भूखा तो नहीं मरूंगा (फ़िल्म मे सिर्फ एक बार इस जातिसूचक शब्द का इस्तेमाल किया गया है ताकि सबको पता लगे कि चमकीला इ...
25/04/2024

हुँ भूखा तो नहीं मरूंगा (फ़िल्म मे सिर्फ एक बार इस जातिसूचक शब्द का इस्तेमाल किया गया है ताकि सबको पता लगे कि चमकीला इस जाति से था )

1980 दशक मे पंजाब की सबसे सुपरहिट जोड़ी "गायक अमर सिंह #चमकीला व अमरजोत कौर उर्फ बब्बी के जीवन पर बनी फ़िल्म नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई जिसे बनाया इम्तियाज़ अली ने और अभिनय किया मशहूर गायक व कलाकार दिलजीत दोसाँझ व परिनीति चोपड़ा ने |
रिलीज होते ही इसने वैसे ही रिकॉर्ड तोड़ डाले जैसे #चमकीला व अमरजोत तोड़ते थे | फ़िल्म मे ऐसा अहसास करवाया गया कि चमकीला व #अमरजोत अश्लील गाने गाते थे इसलिए उनका कत्ल किया गया, जब उन्हें गोली मारी गई तब चमकीला की उम्र सिर्फ 27 साल थीं और अमरजोत के पेट मे उनका दूसरा बच्चा था | इस छोटी सी उम्र मे ये जोड़ी शोहरत की बुलंदिया छू चुके थे | वैसे #पंजाब के अन्य गायक भी इसी तरह के गाने गाते थे और आज तो इससे भी अश्लील, नशे व #हथियारो को प्रमोट करने वाले गाने गाते है लेकिन इस जोड़ी को छोड़कर आज तक किसी का कत्ल नहीं किया गया
(सिद्धू मूसेवाला का कत्ल आपसी रंजिश के कारण हुआ)

कत्ल किसने किया ये आज तक भी पता नहीं लग पाया है?

फिल्म मे ऐसा दिखाने की कोशिश की गई कि इसमें ख़ालिस्तानी ग्रुप का हाथ हो सकता है, या फिर पंजाब के उन गायको का जिनका धंधा इस जोड़ी ने बर्बाद कर दिया था |

लेकिन ये नहीं दिखाया क्या कि चमकीला की पत्नी अमरजोत एक जट्ट सिख थीं जबकि ये दिखा दिया कि चमकीला जाति से #बहुजन था |

फ़िल्म मे कही भी ये दिखाने की कोशिश नहीं की गई कि यह ऑनर किलिंग भी हो सकती है जबकि उत्तर भारत मे यह आम बात है, हरियाणा मे उसी दौर मे रातो को रागणी कॉम्पीटिशन होते थे,राजेंद्र खरकिया व सरिता चौधरी की जोड़ी इतने अश्लील बोलते थे कि आप परिवार के साथ सुन नहीं सकते लेकिन उनको सुनने के लिए भीड़ जमा होती थीं, तालिया बजती थीं.. उत्तर प्रदेश व बिहार का तो और भी बूरा हाल है, वहां तो जवान लड़किया गानो पर अश्लील डांस करती है और जवाब,बूढ़े, बच्चे तक लुफ्त उठाते है |

लेकिन सिर्फ इस जोड़ी का कत्ल हुआ? 🤔 बेशक फ़िल्म मे ना दिखाया गया हो लेकिन ऐसा माना जाता है कि चमकीला को सिर्फ इसलिए मारा गया क्युकि वह चमार था और उसकी शोहरत जातिवादियों को हजम नहीं हो रही थीं,अमरजोत को इसलिए मारा गया क्युकि उसने एक से शादी कर ली थीं |

चमकीला व अमरजोत बेशक आज दुनिया मे नहीं है लेकिन उनके गाये हुए गानो ने उन्हें अमर कर दिया है, वो अपने गानो के जरिये इस जातिवादीयो को हर पल थप्पड़ मार रहे है और आज भी शोहरत के शीर्ष पर है |

चमकीला व अमरजोत जैसी जोड़ी ना आज तक कोई बन पाई और ना भविष्य मे बन पाएगी |




02/12/2022
कतर....एशिया का पहला देश जो अकेले ही विश्वकप का आयोजन करवा रहा है...मैच देखने वाले हर आम व खास दर्शकों को महंगे गिफ्ट से...
24/11/2022

कतर....
एशिया का पहला देश जो अकेले ही विश्वकप का आयोजन करवा रहा है...मैच देखने वाले हर आम व खास दर्शकों को महंगे गिफ्ट से भरा थैला दिया!

लेकिन ये क्या.!!?
इतने महंगे गिफ्ट पर क़तर के सुल्तान की फोटो तक नहीं है ??? आश्चर्य...

एक हमारा फर्जी विश्वगुरू देश है जहाँ नमक के पैकेट पर भी प्रधानमंत्री का बड़ा सा फोटो छपवा दिया जाता है!

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😊

अभी कुछ दिन पहले पंजाब के सिंगर सिद्धू मूसेवाले की हत्या कर दी गयी थी।काफी सुर्खियां बटोरी थीं इस हत्या ने।पूरा सिस्टम प...
02/11/2022

अभी कुछ दिन पहले पंजाब के सिंगर सिद्धू मूसेवाले की हत्या कर दी गयी थी।काफी सुर्खियां बटोरी थीं इस हत्या ने।पूरा सिस्टम पंजाब का लग गया था अपराधी को पकडने।ऐसे ही एक और पंजाबी सिंगर रहे,बल्कि यूं कहें सबसे फेमस फोल्क सिंगर मे से रहे अमर सिंह चमकीला।चमकीला का जन्म एक गरीब चमार परिवार मे लुधियाना जिले मे हुआ।शुरूआती जीवन मे अमर सिंह एक इलैक्ट्रिशियन बनना चाहते थे,हालांकि हालात ने साथ नही दिया,तो लुधियाना मिल मे नौकरी पकड ली।गाने बजाने का शौक तो था ही।ऐसे ही इनकी मुलाकात फेमस कलाकार सुरिंदर शिंदा से हुई।

शिंदा ने चमकीला के लिखे गीत सुने,तथा इतना प्रभावित हुए की एक अल्बम रिलीज करी,जो की सुपरहिट रही।चमकीला के लफ्जों मे एक जादू था,तथा एक अनोखी बात थी।तो साहब चमकीला का सफर यहां से शुरू तो हुआ,पर शिंदा उस जमाने मे उन्हे कम मेहनतआना देते थे,जिससे घर चलाना मुश्किल हो गया।
चमकीला ने उसके बाद खुद की अल्बम रिलीज करी,जिसमे सोनिया कौर उनके साथ थी.एल्बम ने धूम मचा दी तथा चमकीला सुपरस्टार बन गए।इसके बाद चमकीला की मुलाकात अमरजोत कौर से हुई,जिनके साथ चमकीला ने गाने बनाने शुरू किए।यहां से चमकीला की जिंदगी ने सबसे बडा मोड लिया,और अमरजोत के साथ इनकी जोडी पंजाब के साथ साथ,कनाडा इंग्लैंड ऑस्ट्रेलिया तक छा गयी।

दोनो ने ही शादी करी,हालांकि दोनो ही पहले से शादीशुदा थे।पर इनके बीच का प्रेम,इनकी कैमिस्ट्री अगर आप इनकी पुरानी वीडीयो देखें,तो अलग ही नजर आएगी।टाइम ऐसा आया की चमकीला रोज के तीन शो तक करने लगे।सन 84 मे तो इन्होने सबसे ज्यादा शो करने का रिकाड बना डाला।चमकीला के गीतों की जैसे दुनिया दिवानी हो चुकी थी।अलग ही बात थी उनके गानो मे।आलम यह था की,जहां दूसरे बडे कलाकार एक शो के हजार दो हजार रूपये लेते थे,वहीं चमकीला शादियों मे बुलावे पर ही चार हजार रूपये लेते थे।दूसरे कलाकार तो मानो बिल्कुल ठप हो चुके थे।हर जगह चमकीला की ही डिमांड थी। कई कलाकारों ने दूसरे काम तक पकड लिए थे।लोग सिर्फ चमकीला को ही सुनना चाहते थे।चमकीला पंजाब के सबसे बडे फोल्क कलाकार बन चुके थे।

पर शायद कुदरत को कुछ और ही मंजूर था।सन 1988 मे चमकीला अपना स्टेज शो करने एक गांव पहुंचे।भीड खचाखच भरी हुई थी।सब उनके दीदार के लिए बैठे थे।तैयारी हो रही थीं,की इसी बीच एक बाइक पर तीन सवार बैठे आए।भीड को चीरते हुए स्टेज तक पहुंचे,और फिर लगातार फायर चमकीला और अमरजोत पर दागने लगे।उन सवारों ने चमकीला की टीम के हर सदस्य को मार डाला,और वहां से रवाना हो गए।लोग बाद मे उन्हे अस्पताल लेकर गए ही थे,हालांकि उन्होने मौके पर ही दम तोड दिया।एक महान कलाकार दुनिया से चला गया।

त्रासदी चमकीला की मौत तो थी,ही उससे बडी त्रासदी तथा शर्मनाक बात यह थी,की पुलिस ने व प्रशासन ने उनके कातिलों को ढूंढने मे कोई रूचि नही दिखायी।एक मशहूर कलाकार,जिसकी दुनिया पागल थी,उसकी मौत का मजाक बना दिया।फाइल बाद मे ढुलमुल तरीके से दबा दी गयी,और केस रफा दफा हो गया।

आज 34 बरस उस घटना को हो गए,आजतक अमर सिंह चमकीला और नवजोत कौर की आत्माएं,
अपने लिए इंसाफ मांग रही हैं।अमर सिंह चमकीला के पुराने गाने आप आज भी सुने,तो कोई उनके बराबर ना था,ना पहुंचेगा।पोस्ट बडी हो गयी,अगली पोस्ट मे इस घटना पर कुछ और जानकारी दी जाएगी।अगर समय हो,तो यूट्यूब पर इस महान कलाकार को जरूर सुनें
🙏🙏🙏

28/09/2022
05/08/2022

जान चुका तुम शब्दों को , अंगार नहीं लिखने दोगे !
#सत्ता की #मनमानी का , प्रतिकार नहीं लिखने दोगे !
जनमानस के दुख के , अम्बार नहीं लिखने दोगे !
हो #फूलों की बरसात चाहते , खार नहीं लिखने दोगे !
#भूख , #गरीबी पे होता , व्यापार नहीं लिखने दोगे !
इस #गुलाम होती पीढ़ी की , #हुंकार नहीं लिखने दोगे !
#संविधान का जर्जर तन , मैं अंधों को दिखलाता हूँ ।
बहरों की बस्ती में पीड़ा , #लोकतंत्र की गाता हूँ ।

#भारत #माँ के भावों का श्रृंगार, नहीं लिखने दोगे !
गुरुओं का निर्मल पूजा दरबार , नहीं लिखने दोगे !
मुल्क में होता नारी अत्याचार , नहीं लिखने दोगे !
महँगाई का होता मूकप्रहार , नहीं लिखने दोगे !
जब भी #कलम उठाऊँगा हर बार , नहीं लिखने दोगे !
है पता मुझे गद्दारों को गद्दार , नहीं लिखने दोगे !
#संविधान का जर्जर तन मैं , अंधों को दिखलाता हूँ ।
बहरों की बस्ती में पीड़ा , #लोकतंत्र की गाता हूँ ।

बोलो मेरी कविताऐं हैं बेकार, कहो तो ना लिख्खूँ !
सच्चाई के आगे हो लाचार, कहो तो ना लिख्खूँ !
दूषित होता पूरा धर्मप्रचार, कहो तो ना लिख्खूँ !
पल-पल पीता खून को भ्रष्टाचार, कहो तो ना लिख्खूँ !
देश में होता काला-कारोबार, कहो तो ना लिख्खूँ !
शब्दों में संरक्षित ये यलगार, कहो तो ना लिख्खूँ !
संविधान का जर्जर तन मैं , अंधों को दिखलाता हूँ ।
बहरों की बस्ती में पीड़ा , लोकतंत्र की गाता हूँ ।

दिनेश कुमार

मानेकशॉ 1932 में भारतीय सैन्य अकादमी ,  #देहरादून के पहले इंटेक में शामिल हुए । उन्हें चौथी  #बटालियन, 12 वीं फ्रंटियर फ...
27/06/2022

मानेकशॉ 1932 में भारतीय सैन्य अकादमी , #देहरादून के पहले इंटेक में शामिल हुए । उन्हें चौथी #बटालियन, 12 वीं फ्रंटियर फोर्स #रेजिमेंट में कमीशन दिया गया था । द्वितीय विश्व युद्ध में, उन्हें वीरता के लिए मिलिट्री क्रॉस से सम्मानित किया गया था। 1947 में भारत के विभाजन के बाद , उन्हें 8 वीं गोरखा राइफल्स में फिर से नियुक्त किया गया । #मानेकशॉ को 1947 के #भारत-पाकिस्तान #युद्ध और #हैदराबाद संकट के दौरान एक नियोजन भूमिका में रखा गया था, और परिणामस्वरूप, उन्होंने कभी भी एक पैदल सेना बटालियन की कमान नहीं संभाली। सैन्य संचालन निदेशालय में सेवा करते हुए उन्हें ब्रिगेडियर के पद पर पदोन्नत किया गया था। वह 1952 में 167 इन्फैंट्री #ब्रिगेड के #कमांडर बने और 1954 तक इस पद पर रहे जब उन्होंने सेना मुख्यालय में सैन्य प्रशिक्षण निदेशक के रूप में पदभार संभाला।

राजा राम मोहन राय मूर्तिपूजा और रूढ़िवादी हिंदू परंपराओं के विरूद्ध थे। वह सभी प्रकार की सामाजिक धर्मांधता और अंधविश्वास...
22/05/2022

राजा राम मोहन राय मूर्तिपूजा और रूढ़िवादी हिंदू परंपराओं के विरूद्ध थे। वह सभी प्रकार की सामाजिक धर्मांधता और अंधविश्वास के खिलाफ थे। लेकिन उनके पिता रूढ़िवादी हिंदू ब्राह्मण थे। इससे पिता और पुत्र में मतभेद पैदा हो गया और राजा राम मोहन राय घर छोड़कर चले गए। उन्होंने घर लौटने से पहले काफी यात्राएं की। वापसी के बाद उनके परिवार ने इस आशा के साथ उनकी शादी कर दी कि वह बदल जाएंगे। लेकिन इसका उन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा।

 #सलाम
04/05/2022

#सलाम

13 अप्रैल 1913 का दिन भारत के इतिहास का काला दिन है | आज के ठीक 103 साल पहले जलियावाला बाग़ में एक शांतिपूर्ण सभा के लिए ...
13/04/2022

13 अप्रैल 1913 का दिन भारत के इतिहास का काला दिन है | आज के ठीक 103 साल पहले जलियावाला बाग़ में एक शांतिपूर्ण सभा के लिए जमा हुए हजारोभारतीयों पर अंग्रेज हुक्मरान ने अंधाधुंध गोलिया बरसी थी | जिसमे कई मासूम लोगो की जान गई बहुत से घायल हुए |

इस दर्दनाक घटना को याद कर हमने यहाँ जलियांवाला बाग हत्याकांड में शहीद हुए लोगो को विनम्र श्रद्धांजलि

शिक्षा की कमी से ज्ञान की कमी होती है, जो नैतिकता की कमी की ओर ले जाती है,  जो प्रगति की कमी की ओर ले जाती है, जो धन की ...
11/04/2022

शिक्षा की कमी से ज्ञान की कमी होती है, जो नैतिकता की कमी की ओर ले जाती है, जो प्रगति की कमी की ओर ले जाती है, जो धन की कमी की ओर ले जाती है, जो निम्न वर्गों के उत्पीड़न की ओर ले जाती है, देखें कि किस स्थिति में समाज शिक्षा की कमी का कारण बन सकता है

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