21/03/2026
*अखिल भारतीय रचनात्मक समाज*नई दिल्ली*
*ईद -उल फितर का सन्देश*
पावन रमजान माह की पूर्णाहुति के साथ आज सम्पूर्ण विश्व में ईद-उल-फितर का त्योहार श्रद्धा, प्रेम और भाईचारे के साथ मनाया जा रहा है। रमजान केवल उपवास का समय नहीं, बल्कि यह आत्मशुद्धि, संयम, सेवा और मानवता का एक जीवंत पाठ है, जो हमें करुणा, सहिष्णुता और आपसी सद्भाव का मार्ग दिखाता है।
यह अत्यंत सुखद संयोग है कि इस वर्ष रमजान के दौरान विभिन्न धर्मों के अनेक पावन पर्व एक साथ आए और ईद-उल-फितर का यह शुभ अवसर हिंदू धर्म के पवित्र नवरात्रि के समय में आया। यह हमें स्पष्ट संदेश देता है कि सभी धर्मों का मूल भाव एक ही है—मानवता, प्रेम और एकता।
आज विश्व के अनेक भागों में सत्ता और स्वार्थ के कारण अशांति, हिंसा और वैमनस्य का वातावरण बना हुआ है। ऐसे समय में यह पर्व हमें पुनः याद दिलाता है कि सच्चा धर्म वही है, जो इंसान को इंसान से जोड़ता है, न कि अलग करता है।
अखिल भारत रचनात्मक समाज, जिसकी स्थापना महान गांधीवादी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए संत विनोबा भावे की मानसपुत्री पूज्य डॉ. निर्मला देशपांडे जी के प्रेरणा से हुई, सदैव इस उद्देश्य के लिए कार्यरत है कि जहाँ नफरत हो, वहाँ प्रेम का संचार हो; जहाँ हिंसा हो, वहाँ अहिंसा की ज्योति जले; और जहाँ मन में दूरी हो, वहाँ अपनत्व का सेतु बने।
आइए, इस पावन अवसर पर हम सभी संकल्प लें कि हम आपसी भेदभाव भुलाकर एक-दूसरे को गले लगाएँ, और दुनिया को यह संदेश दें—
"मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना"।
क्योंकि यदि इंसानियत ही नहीं बचेगी, तो धर्म, मजहब और पंथ का अस्तित्व भी अर्थहीन हो जाएगा।
आइए, हम सब मिलकर प्रेम, शांति और भाईचारे की एक नई शुरुआत करें।
*आप सभी को ईद-उल-फितर की हार्दिक शुभकामनाएँ*।
*जय जगत*
धन्यवाद।
आप सबका
विभूति कुमार मिश्र
राष्ट्रीय अध्यक्ष
अखिल भारत रचनात्मक समाज, नई दिल्ली