We Support CAA. NRC.

We Support CAA. NRC. We are Indian and we support Indians

30/05/2026
एक "रहस्यमयी सैटिंग का अड्डा " जहा व्हिस्की पीकर नंगा नाच देखकर कोई भी सेटिंग की जा सकती थी किस आंतकवादी को सजा देनी है ...
30/05/2026

एक "रहस्यमयी सैटिंग का अड्डा "
जहा व्हिस्की पीकर नंगा नाच देखकर कोई भी सेटिंग की जा सकती थी
किस आंतकवादी को सजा देनी है माफ़ करना है आधी रात को भी जहा से कोर्ट खुलवा कर आंतकवादी छुड़ा सकते थे

दिल्ली का "जिमखाना क्लब" और इस क्लब के अन्दर जाते थे - IAS, IPS, JUDGE और कांग्रेस नेता
भ्रष्टाचार रिश्वत गद्दारी का अड्डा था जिमखाना

आम जनता तो इस क्लब के पास भी नही फटक सकती थी
क्योकी ये 27 ऐकड का क्लब प्रधानमंत्री निवास से एकदम सटा हुआ है

-इस क्लब के ठीक सामने इंदिरा गांधी का घर था जहां उनकी हत्या हुई थी
इस क्लब मे महात्मा गांधी भी जाते थे - नेहरू , राजीव और राहुल गांधी भी

इस क्लब मे होता क्या था ??

रहस्यमयी सवाल जो सबकी खोपडी मे आता आता है -
इस क्लब मे होती थी "सैटिंग

IAS अफसर अपनी पोस्टीग से पहले " सही लोगो से " यही मिलते थे

बडे जज और बडे वकील एक ही टेबल पर बैठ दारू पीते और मुकदमे फाईनल करते थे

बडे बडे उद्योगपति एक दुसरे से यही मिल धन्धे की " सैटिंग " करते थे

पत्रकारो को यही इसी क्लब से सनसनी खेज खबरे मिल जाती थी " सैटिंग " के कारण

एक तरहा से भारत को चलाने वाले लोग इस क्लब मे जनता की नजरो से दूर " दारू पीने और सैटिग करने " आते थे

सफेदपोश रहस्यमयी मुलाकात प्रेमसम्बन्ध भी यही बनते

लेकिन दिक्कत तब शुरू हुई जब बीजेपी सत्ता मे आई

बीजेपी के नेताऔ को क्लब की सदस्यता नही दी गयी
और फिर शुरू हुआ इस क्लब को अपने काबू मे लेने का चक्कर

बीजेपी सरकार ने सबसे पहले 2021 मे क्लब की कमेटी भंग करदी

सरकार ने 15 डायरेक्टर नियुक्त कर दिये क्लब चलाने बारे क्लब के सारे कागज़ो का आडिट करवा डाला

क्लब की एक " green card " scheme थी वो बन्द कर दी

अब आदेश जारी कर दिया के , 5 जून 2026 तक हर हाल मे जमीन खाली करो

कारण बडा सही दिया है " प्रधानमंत्री की सुरक्षा " - - सब चुप

कांग्रेस बेशक सत्ता मे नही है - लेकिन Gymkhana club मे आज भी कांग्रेस राज कायम रहा

देश के सबसे पावरफुल लोग 2 दिन के अंदर हाई कोर्ट में सुनवाई हो रही है. देश के दो सबसे महंगे वकील एक इलीट क्लब के पक्ष में खड़े हैं.
जो बकील आंतकवादी देश्द्रोहिओं और पाकिस्तान के साथ खड़े होते कपिल सिविल और अभिषेक मनु सिंगबी केस लड़ रहे है

आपमें है ये दम? मैं आपकी बात कर रहा हूं. आपके साथ सिर्फ नरेंद्र मोदी हैं. वही इनसे टकरा रहे हैं.
आप अपने विचार लिख सकते है ये लौकतन्त्र है

तुम्हें क्या लगा था कि अवैध के नाम पर सिर्फ झुग्गी-झोपड़ियों पर बुलडोजर चलेगा ?
अवैध मतलब अवैध, चाहे झुग्गी हो या कोठी।
दिल्ली जिमखाना क्लब सिर्फ क्लब नहीं, अंग्रेजों की बनाई वो औपनिवेशिक इमारत है जिसे 1913 में अंग्रेज अफसरों, सैन्य अधिकारियों और एलीट वर्ग की मौज-मस्ती के लिए बनाया गया था।
जहां भारतीयों की एंट्री लगभग ना के बराबर थी।
आजादी के बाद ही इस पर बुलडोजर चल जाना चाहिए था, लेकिन नेहरू खुद इसके सदस्य थे और आज कांग्रेस के युवराज भी इसके सदस्य बताए जाते हैं।
करीब 30 एकड़ में फैला यह क्लब लुटियंस ज़ोन के सबसे पॉश इलाके में स्थित है।
* सदस्यता शुल्क लगभग 30 लाख रुपए
* सदस्यता के बाद भी 37 साल की वेटिंग

* सरकार को सालाना किराया सिर्फ 1000 रुपए

* लगभग 3 करोड़ टैक्स बकाया

* PM हाउस और कई संवेदनशील सरकारी-रक्षा प्रतिष्ठानों के बेहद करीब लोकेशन

अब सरकार ने इसे 5 जून तक खाली करने का समय दिया है और कहा है कि यह जगह Defence Infrastructure और Public Safety के लिए चाहिए।
बधाई हो,

5 जून को गुलामी की एक और निशानी ढह सकती है।

मोदी हैं तो मुमकिन है 🙏

21/05/2026

*भारत बचाओ🇮🇳*
ट्रंप ने भारत में आग लगाने और सरकार को गिराने के आदेश जारी किए हैं। देश खतरे की ओर बढ़ रहा है। नीचे दी गई जानकारी 24 घंटे के भीतर हर भारतीय तक पहुँचनी चाहिए।
'ऑपरेशन 37' क्या है? आज भारत को इतना बड़ा खतरा क्यों है? यह बिल्कुल सच है। देश के दुश्मनों और गद्दारों का 'ऑपरेशन 37' मोदी सरकार को गिराने के मकसद से शुरू हो चुका है। मोदी को हटाने के लिए, अमेरिकी राष्ट्रपति ने CIA और 'डीप स्टेट' को 12 महीने का समय दिया है। गद्दारों ने पहले ही लोगों को जाति और क्षेत्रीय आधार पर बांटने, गुमराह करने वाले आंदोलनों के ज़रिए सार्वजनिक शांति भंग करने और 'फर्जी वोटिंग' जैसे झूठे आरोपों को बहाने के तौर पर इस्तेमाल करने की योजना बना ली है। जगदीश धनखड़ का मुद्दा इसका एक उदाहरण है।
उनका मकसद कम से कम 37 BJP सांसदों को तोड़कर BJP को बांटना है – कभी टैक्स के नाम पर, कभी आरक्षण के नाम पर, और कभी किसानों के कुछ नेताओं के ज़रिए। लिंग-आधारित और धार्मिक आंदोलनों को भड़काकर, वे अराजकता फैलाने और सरकार को गिराने की कोशिश कर रहे हैं, ठीक वैसे ही जैसा बांग्लादेश में हुआ था। दक्षिण भारत और महाराष्ट्र में हो रहे हिंदू विरोध प्रदर्शन, साथ ही कुछ नेताओं के जन्माष्टमी पर बीफ खाने वाले बयान, इसके और भी उदाहरण हैं।
खास तौर पर हिंदुओं को बांटने की एक सोची-समझी कोशिश की जा रही है। इसके अलावा, पाकिस्तान को उकसाने और भारत को यूक्रेन-रूस संघर्ष जैसे किसी लंबे युद्ध में घसीटने की कोशिशें भी की जा रही हैं, जो अर्थव्यवस्था को तबाह कर देगा।
अगर विपक्ष, 'डीप स्टेट' और ट्रंप 12 महीने के भीतर मोदी को गिराने में नाकाम रहते हैं, तो यह कहना गलत नहीं होगा कि वे उन पर जानलेवा हमला करने की कोशिश करने से भी नहीं हिचकिचाएंगे, क्योंकि भारत की तरक्की अमेरिका के पतन का कारण बन रही है। आज, अमेरिका भारत का विकास नहीं देखना चाहता।
भारत अपने सबसे मुश्किल दौर से गुज़र रहा है। देश और खुद को बचाने के लिए, हिंदुओं को और भी ज़्यादा एकजुट होना चाहिए। दूसरा पक्ष कभी भी आपके साथ नहीं होगा, क्योंकि उनका मकसद 'गज़वा-ए-हिंद' को पूरा करना है।

हिंदुओं, जागो, एकजुट होओ, सतर्क रहो, और अपने रिश्तेदारों, दोस्तों और पड़ोसियों को भी सतर्क रखो।
कृपया इसे पढ़ें और अपने दोस्तों, ग्रुप्स, जान-पहचान वालों और उनके सभी संपर्कों को आगे भेजें। हर किसी को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि यह कम से कम 1,000 लोगों तक पहुँचे। आपके प्रयासों का 'डोमिनो इफ़ेक्ट' यह होगा कि एक हफ़्ते में यह 10 करोड़ लोगों तक पहुँचेगा, और तीन हफ़्तों में 1 अरब लोगों तक।

19/05/2026

लोग बोल रहे है मोदी ने अपना रंग दिखा दिया चुनाव होते ही...
बताओ विदेश घूमने की मना कर रहे है...
सोना खरीदने की मना कर रहे है ...
पेट्रोल डीजल बचाने को बोल दिया ...
भाई क्या गजब कर दिया मोदी जी ने
जिस देश में युवा भगत सिंह 19 साल में शहीद हो गए
उस देश को बचाने के लिए युवाओं को विदेश जाने के लिए मना करना गुनाह हो गया🤔?forex रिज़र्व कम हो रहा था तो ये सेक्रिफाइस मांगना क्या बहुत बड़ा अपराध हो गया?
जहां 1962 में चाइना वार में देश की औरतों ने अपना सोना उतार कर देश की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए दे दिया था उस देश में एक साल सोना कम खरीदने को बोलना गलत हो गया 🤔?
जिस देश में अंग्रेजों से लड़ाई के दौरान स्वदेशी अपनाओ का नारा के तहत विदेशी सामान को बहिष्कार किया था .. तो अब मोदी जी ने भी तो यही कहा विदेशी सामान मत खरीदो ..

🙏🏼 इस समय ईरान और अमेरिका की लड़ाई में बहुत से देशों में महा संकट आया हुआ है उसका असर हमारे देश में भी पड़ रहा है इसलिए मोदी विरोध तो हम बाद में भी कर लेंगे ., पर इस समय जो संकट हमारे सामने दरवाजे पर खड़ा है पहले मिल कर इसका सामना करो 🙏🏼 सभी कमियां सभी में होती है किसी में कम किसी में ज्यादा ये सब बाद में निबटा जाएगा ., पर पहले अभी देश अपना जब आंधी आती है तो खिड़की दरवाजे बद करते हो या नहीं ? ऐसे ही देश में आंधी आने वाली है 🙏🏼 सुरक्षा कौन करेगा हम को ही करनी है


18/05/2026

#अपनी_तैयारी_कर_लो...
आने वाले कुछ महीनों में विश्व में भयंकर युद्ध के आसार नजर आ रहे हैं
नेतनयाहू द्वारा चुपके से यूएई जाकर वहां के नेताओं से गुप्त मुलाकात का खुलासा होने के बाद ईरान, चीन भड़के हुए हैं
अमेरिका को इस गुप्त मुलाकात की जानकारी थी लेकिन नेतनयाहू द्वारा खुद ही सार्वजनिक रूप से खुलासा करने पर अमेरिका भी ख़फ़ा है
जबकि ट्रंप एक जरुरी मिशन के तहत चीन गए हुए हैं
बहरहाल इधर भारत के भी पश्चिमी और पूर्वी सीमाओं पर युद्ध सरीखी सरगर्मी बढ़ी हुई है। पाकिस्तान इस ताक में है कि टर्की, चीन जैसे कुछ देशों का साथ मिले तो भारत से दो-दो हाथ कर लें
उधर कंजड़ कंगलादेश के जाहिल नेताओं का झुंड भी भारत पर चढ़ाई करने के लिए उबाल मार रहा है।
जिन जाहिलों के दिमाग में भूसा भरा हो वे कभी भी कोई भी कदम बिना सोचे-समझे उठा सकते हैं।
पाकिस्तान अपनी अंदरूनी मामलों, मंहगाई और राजनीतिक गुटबाजियों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए भारत पर चढ़ाई कर सकता है
ऐसा हुआ तो बंगाल में टीएमसी की हार से तिलमिलाया हुआ बंगलादेश भी इस अवसर का फायदा उठाते हुए पूर्वी मोर्चा खोल सकता है दोनों मोर्चों पर युद्ध होने पर भारत के अंदर बैठे गजवा वालों को भी उबाल मारने की प्रेरणा मिलेगी अच्छे वाले मुसलमान और बुरे वाले मुसलमान, दोनों एक ही हैं और मौका आने पर दोनों एक हो जाएंगे
भारत पूरे ढाई मोर्चों पर युद्ध में जूझेगा ऐसी संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता है
ऊपर से जल शांत दिखाई दे रहा है लेकिन अंदर-अंदर धाराएं बहुत तेज चल रही हैं कभी भी तूफान आ सकता है
ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए हमारी-आपकी क्या तैयारियां हैं......??
जब अचानक आपके दरवाजे पर 40-50 गजवा वालों की भीड़ आ जाएगी तब आप क्या करेंगे.......??
अचानक डायरेक्ट एक्शन डे की पुनरावृत्ति हो गई तब आप क्या करेंगे........??
सेना, पुलिस और प्रशासन इतने उलझे हुए होंगे कि आपकी मदद के लिए कोई नहीं आएगा.... जीना मरना आपके अपने हाथ में रहेगा।
मोदी जी ने सही समय पर सोना खरीदने के लिए मना किया है
यह‌ लोहा खरीदने का समय है
आने वाले समय और परिस्थितियों को भांपते हुए घर में इतना लोहा खरीद कर भर लो कि जरुरत पड़ने पर अपना जान-माल और इज्जत आबरू बचा सको
मेरा काम है सबको जगाते रहना और पहले से आगाह करना.... इस पर विचार कीजिए....
🙏🙏जय जय श्री राम 🚩
Sanjna Jatav Mehre, barsar, hamirpur We Support CAA. NRC. Tatiane Camargo

17/05/2026

*राजनीति है, चलती रहती है, लेकिन बीजेपी कितनी सूक्ष्म स्तर पर काम करती है, यह समझने के लिए कृपया इसे जरूर पढ़ें। *
*युद्ध की तैयारी*
इस रणनीति में TMC की गुप्त चालों की जानकारी निकाली गई।
इसमें काम आया PK... यानी प्रशांत किशोर।
PK के पास अपार पैसा था... भारत में इतना पैसा सीधे रास्ते से नहीं आता।
ED ने उस पर दबाव बनाया, उसने बिहार में झुकाव दिखाया, वह खत्म हो गया, लेकिन TMC की सारी जानकारी बीजेपी तक पहुंच गई। इसके बदले उसे संरक्षण दिया गया।
PK खत्म हुआ... उससे I-PAC की जानकारी मिली। और
TMC को झटका लगना शुरू हुआ।
CAA के विरोध में ममता बनर्जी उतर गईं। वह अनावश्यक था। लेकिन उससे विचार-मंथन शुरू हुआ। और संघ का मंथन मतलब बहुत खतरनाक तैयारी होती है।
साधारण कपड़े पहने, पैरों में साधारण चप्पलें डाले हुए सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी / जिला परिषद के रिटायर्ड शिक्षक जैसे दिखने वाले साधारण, बिना पहचान वाले लोग... बैठते हैं... बात करते हैं... फिर अपनी-अपनी थालियां लेकर आलू की सब्जी, रोटी, दाल-चावल खाते हैं, अपनी थालियां खुद धोकर जगह पर रखते हैं और बातचीत करते हुए निकल जाते हैं।
इसी दौरान इन साधारण लोगों को समझ आया कि संसदीय शस्त्रागार में एक जंग लगा हुआ महाशस्त्र मौजूद है।

यही वह हथियार था... इसे पूरी तरह संसदीय नियमों के अनुसार चलाया गया। पहली परीक्षा बिहार में हुई। इसके बाद ममता सतर्क हो गईं।
उनके पास बांग्लादेशी घुसपैठियों का आधार था। मरे हुए और बाहर रहने वाले लोगों के नाम पर वोट डाले जाते थे। उस हथियार को निष्क्रिय कर दिया गया।
आगे “छापा वोट” का तरीका था। विरोधी लोगों को मतदान के लिए बाहर निकलने ही नहीं देना, और ममता के मुस्लिम पुलिसकर्मी खुद बटन दबाते रहते थे।
किसके दम पर? प्रशासनिक और पुलिस तंत्र के बल पर...
वहां चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को आगे रखते हुए कई उपाय करके नई सख्त व्यवस्था बनाई।
वहां की समानांतर मुस्लिम पुलिस समर्थक व्यवस्था को तोड़ दिया गया।
क्लब व्यवस्था डर दिखाती थी, तो वहां केंद्रीय बल तैनात किए गए।
I-PAC पर छापे के दौरान ममता ने जो फाइलें तेजी से हटाई थीं, उसकी पूरी जानकारी PK ने दी ही थी, लेकिन वहां के I-PAC अधिकारी चंदेल और जैन को ED ने पकड़ लिया। और आधा काम पूरा हो गया।
92 लाख कथित बांग्लादेशी मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए। यह काम कठिन तो था ही, लेकिन अद्भुत भी था... क्योंकि ममता की मुस्लिम और जिहादी पुलिस नेटवर्क की बड़ी श्रृंखला तोड़नी थी।
“बाइक वाहिनी” दोपहिया वाहनों पर आतंक फैलाती थी, यह जानकारी पहले से थी। इसलिए मतदान से सिर्फ दो दिन पहले दोपहिया वाहनों पर रोक लगा दी गई। उन 48 घंटों में हर विधानसभा क्षेत्र के TMC अपराधियों को पकड़कर जेल में डाल दिया गया। करीब दस हजार इस्लामिक और जिहादी तत्व जेल भेजे गए।
मतदान के बाद EVM कैसे ले जाए जाते हैं, कहां रखे जाते हैं — इसमें पुलिस और I-PAC की मिलीभगत थी।
इसलिए वहां पुलिस को मतदान केंद्रों और उनके आसपास से हटाकर केंद्रीय बल तैनात किए गए।
TMC की हर छोटी-बड़ी जानकारी निकालकर यह रणनीति संघ के साधारण कार्यकर्ताओं ने छह-सात महीने पहले ही तय कर ली थी और समय आने पर लागू की।
जो सामान्य जनता की आंखों को दिखाई नहीं देता था, वही यहां बताया गया है...
जनता जो देख रही थी, पीड़ित हिंदू समाज जो सह रहा था... आज वह मुक्त हुआ। अगर बीजेपी सत्ता में नहीं आती, तो यह “बानो” कम से कम आधे हिंदुओं को खत्म कर देती, और बंगाल भारत का हिस्सा नहीं रहता... या फिर मुस्लिम बहुल राज्य बन गया होता।
मोदी और शाह ने हिंदुओं के 🙏
We Support CAA. NRC. Mehre, barsar, hamirpur Tatiane Camargo Dharam Dutt Raghuvanshi Sanjna Jatav

16/05/2026

इतिहास जो छिपाया गया है –

9 सितम्बर 1947 की मध्यरात्रि को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के द्वारा सरदार पटेल को सूचना दी गई कि 10 सितम्बर को संसद भवन उड़ा कर एवं सभी मन्त्रियों की हत्या कर के लाल किले पर पाकिस्तानी झण्डा फहराने की दिल्ली के मुसलमानों की योजना है।
सूचना क्यों कि संघ की ओर से थी, इसलिये अविश्वास का प्रश्न नहीं था। पटेल तुरंत हरकत में आए और सेनापति आकिन लेक को बुला कर सैनिक स्थिति के बारे में पूछा।
उस समय दिल्ली में बहुत ही कम सैनिक थे। आकिन लेक ने कहा कि आस-पास के क्षेत्रों में तैनात सैनिक टुकड़ियों को दिल्ली बुलाना भी खतरे से खाली नहीं है। कुल मिला कर आकिन लेक का तात्पर्य था कि यह इतनी जल्दी भी नहीं किया जा सकता, इसके लिये समय चाहिए। यह सारी वार्ता वायसराय माउंटबैटन के सामने ही हो रही थी, लेकिन पटेल तो पटेल ही थे। उन्होंने आकिन लेक को कहा-“विभिन्न छावनियों को संदेश भेजो, उनके पास जितनी जितनी भी टुकड़ियाँ फालतू हो सकती हैं, उन्हें तुरंत दिल्ली भेजें।” आखिर ऐसा ही किया गया।

उसी दिन शाम से टुकड़ियाँ आनी शुरू हो गई। अगले दिन तक पर्याप्त टुकड़ियाँ दिल्ली पहुँच चुकी थीं।

*सैनिक कार्यवाही*
सैनिक कार्यवाही आरम्भ हुई। दिल्ली के जिन-जिन स्थानों के बारे में संघ ने सूचना दी थी, उन सभी स्थानों पर एक साथ छापे मारे गये और हर जगह से बड़ी मात्रा में शस्त्रास्त्र बरामद हुए। पहाड़गंज की मस्जिद, सब्ज़ी मंडी मस्जिद तथा मेहरौली की मस्जिद से सब से अधिक शस्त्र मिलेl अनेक स्थानों पर मुसलमानों ने स्टेन गनों तथा ब्रेन गनों से मुकाबला किया, लेकिन सेना के सामने उन की एक न चली। सब से कड़ा मुकाबला हुआ सब्जी मण्डी क्षेत्र में स्थित ‘काकवान बिल्डिंग’ में। इस एक बिल्डिंग पर कब्जा करने में सेना को चौबीस घण्टों से भी अधिक समय लगा।

मेहरौली की मस्जिद से भी स्टेनगनों व ब्रेनगनों से सेना का मुकाबला किया गया। चार-पाँच घंटे के लगातार संघर्ष के बाद ही सेना उस मस्जिद पर कब्जा कर सकी।

*तत्कालीन काँग्रेस अध्यक्ष आचार्य कृपलानी के अनुसार*
“मुसलमानों ने हथियार एकत्र कर लिए थे। उन के घरों की तलाशी लेने पर बम, आग्नेयास्त्र और गोला बारूद के भण्डार मिले थे। स्टेनगन, ब्रेनगन, मोर्टार और वायर लेस ट्रांसमीटर बड़ी मात्रा में मिले। इन को गुप्तरूप से बनाने वाले कारखाने भी पकड़े गए।

अनेक स्थानों पर घमासान लड़ाई हुई, जिस में इन हथियारों का खुल कर प्रयोग हुआ। पुलिस में मुसलमानों की भरमार थी। इस कारण दंगे को दबाने में सरकार को काफी कठिनाई का सामना करना पड़ा। इन पुलिस वालों में से अनेक तो अपनी वर्दी व हथियार लेकर ही फरार हो गए और विद्रोहियों से मिल गए। शेष जो बचे थे, उन की निष्ठा भी संदिग्ध थी। सरकार को अन्य प्रान्तों से पुलिस व सेना बुलानी पड़ी।” (कृपलानी, गान्धी, पृष्ठ 292-293)

*मुसलमान सरकारी अधिकारी थे योजनाकार*
दिल्ली पर कब्जा करने की योजना बनाने वाले कौन थे ये लोग? ये कोई सामान्य व्यक्ति नहीं थे। इन में बड़े – बड़े मुसलमान सरकारी अधिकारी थे, जिन पर भारत सरकार को बड़ा विश्वास था। इन में उस समय के दिल्ली के बड़े पुलिस अधिकारी तथा दिल्ली विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी थे, जो कि मुसलमान थे।
एक-एक पहलू को अच्छी तरह सोच-विचार करके लिख लिया गया था और वे लिखित कागज-पत्र विश्वविद्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी की ही कोठी में एक तिजोरी में सुरक्षित रख लिए गए थे।

उन दिनों मुसलमान बन कर मुस्लिम अधिकारियों की गुप्तचरी करने वाले संघ के स्वयंसेवकों को इस की जानकारी मिल गई और उन्होंने संघ अधिकारियों को सूचित किया। संघ अधिकारियों ने योजना के कागजात प्राप्त करने का दायित्व एक खोसला नाम के स्वयंसेवक को सौंपा।
खोसला ने उपयुक्त स्वयंसेवकों की एक टोली तैयार की और सभी मुसलमानी वेश में रात को विश्वविद्यालय के उस अधिकारी की कोठी पर पहुँच गए। मुस्लिम नेशनल गार्ड के कार्यकर्ता वहाँ पहरा दे रहे थे। खोसला ने उन्हें ‘वालेकुम अस्सलाम’ किया और कहा – “हम अलीगढ़ से आए हैं। अब यहाँ पहरा देने की हमारी ड्यूटी लगी है। आप लोग जाकर सो जाओ।” वे लोग चले गए।

*कोठी से तिजोरी ही उठा लाए*
खोसला के लोग कोठी से उस तिजोरी को ही निकाल कर ट्रक पर रख कर ले गए। उस में से वे कागज निकाल कर देखे गए तो सब सन्न रह गए।

नई दिल्ली में आजकल जो संसद सदस्यों की कोठियाँ हैं, इन्हीं में से ही किसी कोठी में रात को कुछ स्वयंसेवक सरकारी अधिकारियों की बैठक बुलाई गई और दिल्ली पर कब्जे की उन कागजों में अभिलिखित योजना पर मन्थन किया गया। इसी मन्थन में से यह बात सामने आई कि यह योजना इतने बड़े और व्यापक स्तर की है कि हम संघ के स्तर पर उस को विफल नहीं कर सकते। इसे सेना ही विफल कर सकती है। अतः इस की सूचना हमें सरदार पटेल को देनी चाहिए। फलतः उस बैठक से ही दो - तीन कार्यकर्ता रात्रि को एक बजे के लगभग सीधे सरदार पटेल की कोठी पर पहुँचे तथा उन्हें जगा कर यह सारी जानकारी दी। पटेल बोले – “अगर यह सच न हुआ तो?” कार्यकर्ताओं ने उत्तर दिया - “आप हमें यहीं बिठा लीजिए तथा अपने गुप्तचर विभाग से जाँच करा लीजिए। अगर यह सच साबित न हुआ तो हमें जेल में डाल दीजिए।” इस के बाद सरदार हरकत में आए।

कल्पना करें कि यदि सरदार पटेल संघ की उक्त सूचना पर विश्वास न करते अथवा वे आकिन लेक की बातों में आ जाते तो भारत सरकार को भाग कर अपनी राजधानी लखनऊ, कलकत्ता या मुम्बई में बनानी पड़ती और परिणाम स्वरूप आज पाकिस्तान की सीमा दिल्ली तक तो जरूर ही होती।

*साभार : पुस्तक : ”विभाजनकालीन भारत के साक्षी” (पृष्ठ संख्या 92-93)*
*लेखक - श्री कृष्णानन्द सागर जी*

भारत मे लाखों में नहीं,करोड़ों की संख्यां बंगलादेशी घुसपैठियों की है,मगर बेहद अपमानजनक तरीके से दुर्दांत अपराधी दर्शाते ह...
06/05/2026

भारत मे लाखों में नहीं,करोड़ों की संख्यां बंगलादेशी घुसपैठियों की है,मगर बेहद अपमानजनक तरीके से दुर्दांत अपराधी दर्शाते हुए, रहमान उर्फ सत्यनिष्ठ को जेल में डाला जाता है जो अब इस्लाम छोड़ चुका है... हिंदुओं को घर घर बताता घूम रहा है कि असली इस्लाम क्या है...सनातन धर्म की रक्षा कैसे होगी... हमारी बेटियां कैसे बचेंगी....
ऐसे उदाहरण हम देखने के आदी हो चुके है, वसीम रिज़वी को भी उत्तराखंड सरकार ने जेल में तब ही डाला जब वह इस्लाम छोड़ कर जितेन्द्र सिंह त्यागी हो गए थे... देश में EX मुस्लिमों को सताने और जेल में डालने का जो काम हो रहा है, इस काम को 'राष्ट्रवादी' सरकारों द्वारा किया जाना उचित नहीं है इस पर केंद्रीय नेतृत्व को ध्यान देने की आवश्यकता है
भारत मे लाखों में नहीं,करोड़ों की संख्यां बंगलादेशी घुसपैठियों की है,मगर बेहद अपमानजनक तरीके से दुर्दांत अपराधी दर्शाते हुए, रहमान उर्फ सत्यनिष्ठ को जेल में डाला जाता है जो अब इस्लाम छोड़ चुका है... हिंदुओं को घर घर बताता घूम रहा है कि असली इस्लाम क्या है...सनातन धर्म की रक्षा कैसे होगी... हमारी बेटियां कैसे बचेंगी....
ऐसे उदाहरण हम देखने के आदी हो चुके है, वसीम रिज़वी को भी उत्तराखंड सरकार ने जेल में तब ही डाला जब वह इस्लाम छोड़ कर जितेन्द्र सिंह त्यागी हो गए थे... देश में EX मुस्लिमों को सताने और जेल में डालने का जो काम हो रहा है, इस काम को 'राष्ट्रवादी' सरकारों द्वारा किया जाना उचित नहीं है इस पर केंद्रीय नेतृत्व को ध्यान देने की आवश्यकता है

यह चेहरा याद है आपको?यह थीं शोभा मजूमदार… एक 85 साल की वृद्ध महिला, जिनको उम्र के इस आखिरी पड़ाव में TMC के गुंडों ने उन...
05/05/2026

यह चेहरा याद है आपको?

यह थीं शोभा मजूमदार… एक 85 साल की वृद्ध महिला, जिनको उम्र के इस आखिरी पड़ाव में TMC के गुंडों ने उनके घर में घुसकर निर्ममता से पीटा था।

2021 के पश्चिम बंगाल चुनाव से ठीक पहले,
TMC के गुंडों ने इस नाजुक, कमजोर, सफेद बालों वाली बुजुर्ग मां को निर्ममता से पीटा। इनपर डंडे चलाये गए थे, लातें पड़ीं थी, गालियां बरसीं थी। इनका इकलौता अपराध यह था कि इनका बेटा गोपाल मजूमदार भाजपा का कार्यकर्ता था।

उस समय इस माँ ने रो-रोकर, कांपते स्वर में अपनी पीड़ा सुनाई थी, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं था।

कुछ दिनों बाद, उन चोटों की वजह से शोभा मजूमदार इस दुनिया को अलविदा कह गईं।

एक मां अपने बेटे की राजनीतिक पसंद की वजह से इतनी बेरहमी से दुष्टों द्वारा कुचल दी गई।

उस वक्त “संविधान बचाओ, लोकतंत्र बचाओ” के नारे लगाने वाले लोग, सब चुपचाप तमाशबीन बने रहे! सबकी आँखें बंद रहीं, सबकी जुबान बंद रही! किसी की कोई आवाज़ न आई!

इस मासूम, पीड़ित चेहरे की यह तस्वीर देखने मात्र से ही दिल भर आता है, आँखें नम हो जाती हैं।

स्व. शोभा मजूमदार जी… आपकी पीड़ा बंगाल की उस हिंसा की सबसे दर्दनाक गवाही है। तृणमूल कांग्रेस के जिन लोकतंत्र विरोधी गुंडों ने आपको मारा, और जिन शर्मनिरपेक्ष बहरूपियों ने चुप्पी साध ली, दोनों को इतिहास कभी नहीं भूलेगा। कभी माफ़ नहीं करेगा।

आज बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की जीत ने शोभा मजूमदार जी जैसे सैंकड़ो मासूमों की आत्मा को बहुत सकून दिया होगा।

देश की आज़ादी के 78 वर्ष बाद वास्तव में आज पश्चिम बंगाल में असली लोकतंत्र की स्थापना हुई है। यह किसी राजनीतिक दल की नहीं, लोकतंत्र की जीत है। भारत की जीत है।

सभी देशवासियों को हार्दिक बधाई!
We Support CAA. NRC.

डायन गई 🥹😍
04/05/2026

डायन गई 🥹😍

Address

India Gate Circle, India Gate, New Delhi
Delhi
110003

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when We Support CAA. NRC. posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share

Category