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 #आईपीएस विनीत  #जायसवाल को उत्तर प्रदेश के  #सुल्तानपुर जनपद का  #पुलिस अधीक्षक बनाए  #जाने पर हार्दिक  #शुभकामनाएं...
22/08/2026

#आईपीएस विनीत #जायसवाल को उत्तर प्रदेश के #सुल्तानपुर जनपद का #पुलिस अधीक्षक बनाए #जाने पर हार्दिक #शुभकामनाएं...

15/08/2026
 #कम से कम  #सावन मे तो सब्र  #करिये....
12/08/2026

#कम से कम #सावन मे तो सब्र #करिये....

कासगंज के चंदन गुप्ता को पहचानते होंगे! सीएम योगी के कट्टर समर्थक थे। कट्टर इतने की उनके सीएम बनने पर भंडारा किया था। 26...
07/08/2026

कासगंज के चंदन गुप्ता को पहचानते होंगे! सीएम योगी के कट्टर समर्थक थे। कट्टर इतने की उनके सीएम बनने पर भंडारा किया था। 26 जनवरी 2018 को विहिप ने तिरंगा यात्रा के लिए प्रशासन से इजाजत मांगी। प्रशासन ने मना कर दिया। क्योंकि हालात बेहतर नहीं थे। इसके बाद भी करीब 100 की संख्या में बाइक से तिरंगा यात्रा निकाली गई। मुस्लिम गलियों में जमकर नारेबाजी हुई। इस दौरान झड़प हो गई। गोलियां चली। एक गोली चंदन को आकर लगी और मौके पर ही मौत हो गई।

इसके बाद जमकर हंगामा हुआ। मुस्लिमों की दुकानें जलाई गई। प्रशासन को तीन दिन तक इंटरनेट बंद करना पड़ा। कई दिग्गज नेता चंदन की अंतिम यात्रा में पहुंचे। परिवार को आर्थिक मदद, बहन को नौकरी, चौक पर मूर्ति लगवाने का वादा किया। बहन को नौकरी मिली लेकिन 6 महीने बाद ही निकाल दिया। चौक पर मूर्ति लगी लेकिन आज भी ढकी हुई है। किसी नेता को फुर्सत नहीं कि उसका उद्धाटन कर सके। परिवार कोर्ट-कचेहरी के चक्कर में फंसा हुआ है। जो उस वक्त चंदन गुप्ता अमर रहे कर रहे थे अब वह भूल गए।

यह सब बातें इसलिए बता रहा हूं क्योंकि हर 6 महीने में दंगो की भेंट ऐसे ही मामूली परिवारों के लोग चढ़ते हैं। इनकी लाशों पर सियासत होती है। खूब वादे होते हैं लेकिन हकीकत में कुछ नहीं बदलता। सलाह सिर्फ इतनी है कि जब आप नहीं थे तब भी धर्म था, जब आप नहीं रहेंगे तब भी धर्म रहेगा। आपके बचाने से बचेगा नहीं, किसी के चाहने से खत्म नहीं होगा। आप बस अपना ख्याल रखिए। उग्रता और कट्टरता से दूर रहिए। सोशल मीडिया पर जो आपको भड़का रहे हैं इनके पास अच्छी नौकरी है। इनके बच्चे सेट हैं। आपको अपना देखना है।

05/08/2026

सरकार के पास funds की इतनी कमी हो गई है कि वह LIC के 6.5% stakes बेच रही है जिससे उसे 31 हज़ार करोड़ रुपये मिल जाएँ.

मगर सवाल ये है कि FUNDS की इतनी कमी हुई कैसे?

दुनिया मे वर्ल्ड बैंक का सबसे बड़ा क़र्ज़दार भारत है, उस पर 13.57 लाख करोड़ का क़र्ज़ है, जिसमे देशभर में सड़कों कर निर्माण के लिए लिया गया फंड शामिल है.

मगर National highway सहित सभी सड़कें पहली बारिश में ही करोड़ों स्वाहा होने की सूचना दे देती हैं , और आप पर छोड़ देती हैं कि आप उसके लिये किसे जिम्मेदार मानते हैं.

बेटी बचाओ योजना के लिये जो fund release किया गया उसमें से 80% योजना के promotion और साहब के विज्ञापन पर ख़र्च हो गया.

Skill india योजना में बैंक रिकार्ड्स के मुताबिक़ 94% लाभार्थी या तो फ़ेक थे, invalid या ख़ाली फ़ॉर्म थे. यही हाल किसान फ़सल बीमा योजना और शौचालय योजना का है.

यानी सरकार द्वारा किये गए निर्माण हों या योजनाएँ जनता का पैसा जनता पर नहीं लगा, फिर कहाँ लगा गया?

सरकार नई भर्तियाँ नहीं कर रही, IAS स्तर के पद भी ख़ाली पड़े हैं, मगर परिसीमन बिल के अंतर्गत सांसदों की संख्या बढ़ा रही है, इससे जो जनता पर ख़र्च का बोझ बढ़ेगा , (एक एक MP हमे 5 साल में 4 से 5 करोड़ का पड़ता है.) उसे हमे क्यों उठाना चाहिए?

उधर सरकारी आँकड़ों के ही अनुसार महज अवतार बाबू की छवि निर्माण में ही 5 लाख 98 हज़ार करोड़ फूँका जा चुका है.

उनके एक एक आयोजन / उद्घाटन पर करोड़ों ख़र्च होते हैं, कल ही आंध्रप्रदेश में उन्होंने 13 हज़ार लोकनर्तकियो का नृत्य प्रदर्शन देखा है, क्यों? किसलिए?

फिर विदेश में उनकी यात्रा के दौरान NRIs charted विमानों से लाए जाते हैं, इसके अतिरिक्त उनके ख़र्च का पैसा भी हम ही देते हैं.

हर चुनाव में जनता को बाँटे जा रहे धन का ख़र्च अलग हैं.

पिछले सालों में सरकारी पार्टी को मिला electoral bond का चंदा, PM care fund , राम मंदिर के लिये चंदा और राम मंदिर की लूट इन सबमें भी जनता का ही पैसा शामिल है, उनका हिसाब कहाँ है?

जंगल और जंगल सम्पदा भी निजी हाथों में बेची जा रही है.
सरकार लगातार PSUs भी बेच रही है.

सवाल ये है कि सरकार जब हज़ार हाथों से भर भर के पैसा उगाह रही है तो तंगी आख़िर क्यों है. सरकार न शिक्षा पर ख़र्च कर रही है न चिकित्सा पर न नागरिक सुविधाओं और ज़रूरतों पर , सेना का भी अग्निवीरी करण हो गया है.

तब ख़र्च हो कहाँ रहा है, ख़र्च की data sheet कहाँ है?

जनता के पैसों से चौगुनी दाम पर ख़रीदे गए हथियार इसराइल को दिए जा रहे हैं, क्या इज़राइल भारत से ये हथियार ख़रीद रहा है या बदले में कुछ दे रहा है? अगर हाँ तो क्या? इसराइल का भारत मे कितना निवेश हो रहा है, कौन बताएगा?

अंग्रेजों ने यह देश लूटा तो कम से इमारतें दे गए जो आज भी खड़ी हैं, रेलवे, पोस्ट सर्विस, बिजली दे गए.

ये जब कभी इस पर देश क़ब्ज़ा छोड़ेंगे तो देश के पास इनकी दी नफ़रती मानसिकता के सिवा क्या रह जाएगा?


(आँकड़े गूगल से लिये हैं)

02/08/2026

#बनिया समाज की #समझदार बीबियां...

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