Mohammad Jabir

Mohammad Jabir Motivational Speaker, Author, Social Worker

24/08/2026

जामिया नगर को पूरे देश के लिए एक आइडियल होना चाहिए था, लेकिन आज यह इलाका बदहाल है। गंदगी के ढेर, उबलते सावर, बने अधबने रास्ते, बिगड़ता सामाजिक तानाबाना इलाके की पहचान बन गई है। कभी सोचा आपने! इसका जिम्मेदार कौन है?

समाज का भला तभी संभव है, जब समाज खुद भी बदलाव में अपना योगदान दे—क्या सिर्फ़ दूसरों से उम्मीद करना काफी है।इलाक़े में सै...
21/08/2026

समाज का भला तभी संभव है, जब समाज खुद भी बदलाव में अपना योगदान दे—क्या सिर्फ़ दूसरों से उम्मीद करना काफी है।
इलाक़े में सैकड़ों NGO हैं।बीसियों जमातों और मिल्ली तंज़ीमों के ऑफिस हैं। वार्ड और विधान सभा में मुस्लिम नुमाइंदे हैं।इसके बावजूद नई नस्ल में ख़राबी भी अपने उरूज पर है।जामिया मिलिया इस्लामिया जैसा तारीख़ी तालीमी इदारा जो इस इलाक़े की पहचान है।
सभी का तालमेल और इस्तिमाल सिर्फ़ अपने सियासी मफ़ाद के लिए किया जाता है। इलेक्शन के वक़्त कितनी NGO हैं उनकी लिस्ट बनती। सभी तंज़ीमों से और उनके ज़िम्मेदारों से मीटिंग्स की जाती हैं। अपने अपने हक़ में वोट डालने की अपील कराई जाती है।जामिया ओल्ड बॉयज़ और इसी तरह की कमेटियों की मीटिंग की जाती हैं। ये जोड़ तोड़ सिर्फ़ अपने अपने सियासी फायदे की हद तक होता है उसके बाद। अपनी डफली अपना राज।कोई सवाल करने वाला नहीं कोई जवाब देने वाला नहीं।किया जामिया नगर जैसा अज़ीम और मशहूर इलाक़ा इसी बेक़दरी का हक़दार है।

17/08/2026

जब वक़्त आपके हिसाब से न चल रहा हो तो ठहर जाएँ।इहतिसाब करें ग़ौर व फ़िक्र करें कि किया ग़लत हो रहा है।फिर आगे बढ़ें।

जान लेने को ये तैयार हमारी निकले,शहजादे भी हकीकत में भिखारी निकले।एक सदी बीत गई इनको तमाशा करते,हमने रहबर जो चुने थे वो ...
17/08/2026

जान लेने को ये तैयार हमारी निकले,
शहजादे भी हकीकत में भिखारी निकले।
एक सदी बीत गई इनको तमाशा करते,
हमने रहबर जो चुने थे वो मदारी निकले ।

15/08/2026
आज हर सिम्त चिराग़ो की लवें तेज़ करो।और मुमकिन हो तो जी भर के उजाले में नहाओ।इस तिरंगे को ज़रा और भी ऊँचा करदो ।किया ही ...
15/08/2026

आज हर सिम्त चिराग़ो की लवें तेज़ करो।
और मुमकिन हो तो जी भर के उजाले में नहाओ।
इस तिरंगे को ज़रा और भी ऊँचा करदो ।
किया ही अच्छा हो कि आकाश पे जाकर लेराओ ।
ताकि ये रंग ज़रा और भी गहरे हो जायें ।
लोग थक जायें तो साये में इसी के सो जायें।

अहले वतन को यौमे आज़ादी मुबारक।

जो हम पे गुज़रे थे रंज सारे जो ख़ुद पे गुज़रे तो लोग समझे।जब अपनी अपनी मोहब्बतों के अज़ाब झेले तो लोग समझे।वो गाँव का इक...
04/08/2026

जो हम पे गुज़रे थे रंज सारे जो ख़ुद पे गुज़रे तो लोग समझे।
जब अपनी अपनी मोहब्बतों के अज़ाब झेले तो लोग समझे।
वो गाँव का इक ज़ईफ़ दहक़ाँ सड़क के बनने पे क्यूँ ख़फ़ा था।
जब उन के बच्चे जो शहर जाकर कभी न लौटे तो लोग समझे।

01/08/2026

सुबह की सैर वाक़ई सेहत का ख़ज़ाना है।

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