12/09/2026
•••••••• चौठचन्द्र पूजा •••••••••
सोमदिन, 14 सितम्बर 2026क होयत।
भादव शुक्ल चतुर्थी कऽ ई पूजा होइत अछि । एहि तिथिके विशिष्ट शुभ फलदायक मानल गेल अछि । मिथिलामे चन्द्रमाक पूजा प्रशस्त मानल जाइत अछि । मनोकामना सिद्धि होयबाक उद्देश्य सँ दिन भरि निराहार रहि साँझमे विविध प्रकारक पूड़ी - पकवानक संग फल ओ दहीक छाँछी उठबैत अछि । स्कन्दपुराण सँ एहि पूजा आ कथा के लेल गेल अछि । ई व्रत जहिया साँझमे चौठ पड़ए तहिया करी से पर्व निर्णयमे कहल गेल अछि ।
पूजा - व्रती संध्याकाल नित्यकर्म सँ निवृत् भऽ स्नान कऽ पूजाक आसन पर बैसथि , पूजाक यावन्तो सामग्री अरिपनक अनुसार डाली छाँछी , अष्टदल अरिपन पर पायस ( मड़र ) राखल जाय आ कलशक अरिपन पर दीपयुक्त कलश राखल जाय । संकल्प , तखन गणपत्यादि पञ्चदेवता , (सधवा) गौरी , (विधवा) विष्णु आ रोहिणीसहितभाद्रशुक्ल चतुर्थीचन्द्र के पूजा भेला पर .......
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दहीक मटकुरी लऽ एहि मंत्र सँ दर्शन करि :-
दधि शंख तुषाराभम् क्षीरोदारणव सम्भवम् ।
नमामि शशिनं भक्त्या शंमभोर्मुकुट भूषनम् ।।
डाली, पकवान, मिष्ठान या फल लऽ एहि मंत्र सँ दर्शन करि :-
सिंह प्रसेन मवधीत सिंहो जाम्बवताहतः ।
सुकुमारक मारोदीपस्तेह्यषव स्यमन्तकः।।
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*** *क्रमशः* ****