नमस्कार मैं राहुल सूरमा हूं।
दिल्ली के शहादरा क्षेत्र में 6 अक्टूबर 1988 को मेरा जन्म हुआ । खुदको सौभाग्यसाली समझता हूं की देश की राजधानी में जन्मा और अपने गृहनगर के लिए तमाम मंचो पर उपलब्धियां हासिल कर दिल्ली की शहादरा के गौरव को आगे बढ़ाया ।
और विगत वर्षों से आज भी मैं इसी कार्य में जुड़ा हुआ हूं, महरौली इलाके के CSKN पब्लिक स्कूल से शुरआती शिक्षा हासिल करके उच्च शिक्षा के लिए मैं दयाल सिंह कॉल
ेज तक पहुंचा ।
इस दौरान खेलों में अत्यधिक रुचि रखने के कारण मैंने स्कूल के दिनों से ही कुश्ती से जुड़ा रहा । स्कूल लेवल पर लगातार मेडल जीतने की ललक ने कॉलेज और यूनिवर्सिटी लेवल पर भी मुझे लड़ने का मौका दिया । मैने आल इंडिया नैशनल स्कूल गेम्स में लगातार 3 साल तक पदक जीता। जूनियर नेशनल गेम्स में भी कुश्ती में पदक हासिल किया
जिसके कारण यूनिवर्सिटी की ओर से भी लड़ने का मौका मुझे मिला । जहां मैंने 96 किलोग्राम भर वर्ग में 3 साल तक लगातार पदक हासिल किया ।
कॉलेज के अलावा भी देश के तमाम राज्यों में मैंने अपने शहर दिल्ली और शहादरा का मान बढ़ाते रहा , इस दौरान मुझे
नौसेरवा टाइटल
बाल केसरी टाइटल
भारत कुमार टाइटल
शेरे हिंद
जैसे सम्मानों से नवाजा गया ।
लेकिन इतने सुनहरे सफर पर निकल पड़ने के बाद भी दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से साल 2011 में मुझे रेसलिंग के दौरान ही चोट लग गई , और बड़ी इंजरी से मैं लगातार जूझने लगा जिसके कारण मेरा खेलना अखाड़ों में उतरना छूट गया । शायद नियति को यही मंजूर था , लेकिन खेलों के प्रति प्यार लगाव ने मुझे इनसे दूर नहीं किया और फिर खेल के मैदानों में मैं एक आयोजक के तौर पर खेल संघों में सदस्य के तौर पर जुड़ गया ।
इस दौरान मैं पहली बार समाजसेवी के रूप में 2012 से काम करने लगा । खेलों के आयोजनों में सभाओं में , जनता के बीच रहना मुझे अच्छा लगने लगा इस के बाद साल 2020 में मेरे जिंदगी में एक नया मुकाम हासिल हुआ जब मैं अखिल भारतीय के कुश्ती महासंघ से जुड़ा , इस वक्त मैं दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष के रूप में अपनी सेवाएं दे रहा हूं । अखिल भारतीय कुश्ती महासंघ के सहयोग और मेरे NGO युवा खेल प्रोत्साहन ट्रस्ट के मदद से अंतरराष्ट्रीय स्तर का दंगल आयोजित कर सका । 2020 के इस दंगल में देश ही नहीं बल्कि विदेशों जैसे ईरान मंगोलिया जैसे देशों के पहलवानों ने शिरकत की ।
इस वक्त मैं अपने क्षेत्रीय जनता के बड़ो के आशीर्वाद और युवाओं के साथ मिलकर अपने एनजीओ
युवा खेल प्रोत्साहन ट्रस्ट के माध्यम से जनता की सेवा कर रहा हूं । लोगों के बीच रहना मुझे आत्मीय संतुष्टि प्रदान करता है , मेरा यह लक्ष्य है की इंजरी के कारण मैं तो आगे नहीं खेल सका लेकिन अगर मेरे क्षेत्र में कोई भी ऐसे प्रतिभावान युवा होगा तो मैं उन सब की मदद के लिए तत्पर रहता हूं।
बस अपने आप को सौभाग्यसाली समझता हूं की शहादरा के लोग मुझे इतना प्यार देते हैं , और मुझे ईश्वर ने उनकी सेवा के लिए चुना है ।�