22/05/2021
डॉक्टर्स में मृत्यु दर क्यों अधिक है?--क्योंकि
1-डॉक्टर्स और नर्सिंग स्टाफ को अधिक वायरल लोड सहन करना पड़ता है,
2-PPE किट में रोज रहना भी एक यंत्रणा है, जो कि पिछले सवा साल से लगातार रह रहे हैं।
3-डॉक्टर्स का ख़ुद का स्वास्थ्य अमूमन खराब ही रहता है, क्योंकि बहुत लंबी पढ़ाई, कठिन कंपीटिटिव एग्जाम, जीवन मे लगातार रहने वाला स्ट्रेस, संक्रामक रोगों से लगातार पाला पड़ना, इन सब वजहों से।
4-इसके अलावा बहुत से डॉक्टर्स खुद बीमार पड़ने पर भी आराम नही करते हैं, काम करते रहते हैं।
5-नींद भी पूरी नही लेते हैं अधिकांश चिकित्सक, रात को इमरजेंसी कॉल, नाईट ड्यूटी, शिफ्ट ड्यूटीज आदि ये भी वजहें हैं।
6-ऊपर से हर समय सर पर तलवार लटकती रहती है, क्रिटिकल मरीजों की।
7-हर समय, मरते दम तक पढ़ते रहना पड़ता है, क्योंकि हर महीने नई दवाइयां, नई तकनीकें आती रहती हैं।
8-अपने मरीजों के अलावा रिश्तेदारों,मित्रों के फ़ोन भी चिकित्सा सलाह हेतु आते रहते हैं, तो एक तरह से परिवार के अलावा भी बहुत से लोगों के स्वास्थ्य की ज़िम्मेदारी सर पर रहती है।
9-क्लीनिक या अस्पताल खोलने पर लिया गया भारी भरकम लोन, या पेमेंट सीट से पढ़ाई की गई हो तो एजुकेशन लोन की भारी क़िस्त।
10-मरीज़ को किसी दवा या प्रोसीजर का साइड इफ़ेक्ट होने पर, गलती न होने पर भी कोर्ट कचहरी, मुकदमे, FIR आदि। चिकित्सक का पक्ष सुने बिना मीडिया एंड सोशल lynching
सारांश--अधिकांश डॉक्टर्स लगभग पूरी ज़िंदगी भयंकर तनाव में जीते हैं, ये बात और है कि वो ऐसा ज़ाहिर नही करते हैं।