02/02/2025
दिल्ली में 70 विधानसभा है,
11 विधानसभा पर मुस्लिम निर्णायक भूमिका में हैं,
आपको जिसे वोट देना है दीजिए,
नहीं देना है तो न दीजिए…
ऐसे भी इस बहुसंख्यवादी सिस्टम पर मुझे कोई भरोसा नहीं,
लेकिन आप माने या न माने ओखला से शिफाउर रहमान और मुस्तफाबाद से ताहिर हुसैन को टिकट देकर AIMIM ने CAA/NRC आंदोलन की यादों को ताजा कर दिया है…
CAA/NRC आंदोलन की चर्चा अब फिर से होने लगी है
संवैधानिक न्यायपालिका द्वारा हिरासत के नाम पर बेकसूर मुसलमानों को वर्षों वर्ष जेल में कैद रखने की प्रक्रिया पर चर्चा आम हो चुकी है…
जो भी मुसलमान वोटिंग सिस्टम में हिस्सा लेते हैं उनको एक बार गौर करने की जरूरत है, आखिर कबतक कांग्रेस/AAP को वोट करते रहेंगे और क्यों?
क्या आपको कोरोना काल में निजामुद्दीन मरकज व मुसलमानों के साथ केजरीवाल सरकार का घृणित रवैया याद नहीं आता?
अमित शाह से शरजील इमाम को गिरफ्तार कर जेल में डालने का आह्वान करने वाला केजरीवाल को आप भूल गए हैं?
आपको जो दिल करे कीजिए…
लेकिन किसी पार्टी की चमचागिरी में कम से कम शिफाउर रहमान व ताहिर हुसैन की कुर्बानियों को बेकार तो ना कहिए…
अगर आप शिफाउर रहमान व ताहिर हुसैन को सपोर्ट नहीं कर सकते तो कम से कम अपना मुंह बंद रखिए प्लीज़…