15/08/2026
पुरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद स्वामी जी का पीएम नरेंद्र मोदी को लेकर एक बड़ा बयान सामने आया है। जगद्गुरु शंकराचार्य ने यह संकेत देते हुए कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी कूटनीति में तो माहिर हैं, लेकिन दो बातों में अभी वे कमजोर हैं। नरेंद्र मोदी के पास अभी तक गौ-रक्षा और हिंदू धर्मांतरण को मिल रहे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष प्रोत्साहन के खिलाफ कोई प्रकल्प नहीं है। अगर नरेंद्र मोदी गौ-रक्षा का मार्ग प्रशस्त करने के साथ-साथ धर्मांतरण करने वालों को मानवाधिकार की सीमा में दंड का पात्र समझते हैं, तो निश्चित तौर पर वे एक बार फिर भारत के प्रधानमंत्री होंगे। स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने अपने मंडी जिला के तीन दिवसीय प्रवास के दौरान सुंदरनगर में आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि नरेंद्र मोदी ने शपथ ग्रहण करने से पूर्व उनके पास पुरी में बैठकर कम से कम बार भूल करने का आशीर्वाद मांगा गया था। गौ-हत्या के काले कलंक को प्रोत्साहन और हिंदू धर्मांतरण के खिलाफ कड़ी कार्यवाही को लेकर कार्य योजना बनाकर नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री के तौर पर माने जाएंगे।
शपथ ग्रहण करने के पहले 45 मिनटों तक मेरे पास पुरी में वो बैठे थे। उन्होंने मुझसे कहा था कि ऐसा आशीर्वाद दीजिए कम से कम मैं भूल कर सकूँ। मैंने कहा, "बिल्कुल भूल न कर सकूँ ऐसा क्यों नहीं चाहते?" तो उन्होंने कहा, "मनुष्य हूँ, मनुष्य से तो भूल होती है।" मैं एक संकेत करता हूँ- नमन, मिलन, दमन, अंकन, अनुगमन। कूटनीति के पाँच प्रभेद हैं। पाँचों में मोदी जी माहिर हैं। लेकिन गौ-हत्या के काले कलंक को प्रोत्साहित न करें, हिंदुओं को धर्मच्युत बनाने वालों को तीक्ष्ण दृष्टि से देखें। अगर दो गुण वो अपना लेते हैं—गौ-भक्तों को गुंडा कहना छोड़कर गौ-रक्षा का मार्ग प्रशस्त करते हैं और हिंदुओं को धर्मच्युत करने वाले को मानवाधिकार की सीमा में दंड का पात्र समझते हैं, तो भारत के प्रधानमंत्री योग्य माने जाएँगे। अभी तो कूटनीति के आधार पर वो विश्व में ख्याति प्राप्त कर रहे हैं। कूटनीति के पाँच प्रभेद—नमन, मिलन, दमन, अंकन, अनुगमन। कूटनीति में माहिर हैं लेकिन दो दृष्टि से अभी कमजोर हैं। गौ-रक्षा का प्रकल्प नहीं है, हिंदुओं को धर्मच्युत करने वाले को गुप्त या प्रकट प्रोत्साहन प्राप्त...
महा-यंत्रों के द्वारा ही महानगर की संरचना होती है। पहली बात यह। महानगर में शुद्ध मिट्टी की पहुँच नहीं है, शुद्ध पानी की पहुँच नहीं है, शुद्ध प्रकाश की पहुँच नहीं है, शुद्ध पवन की पहुँच नहीं है, प्रचुर आकाश की पहुँच नहीं है, संयुक्त परिवार की पहुँच नहीं है। इसलिए कुलदेवी, कुलदेवता, कुलगुरु—इन सब की पहुँच नहीं है। तो विकास के नाम पर मनुष्य को भोजन करने और संतान उत्पन्न करने का यंत्र बना देना ही आधुनिक विकास का द्योतक है? विकास के नाम पर दिशाहीनता की पराकाष्ठा है स्मार्ट सिटी। वन का विलोप, गाँवों का विलोप, संयुक्त परिवार का विलोप, तो अर्थ क्या होगा? मनुष्य-जीवन की सार्थकता ही विकास के नाम पर विलुप्त करने का षड्यंत्र है।
#हिन्दूराष्ट्र #गो_हत्या_बंद