20/04/2026
इनका नाम शहीन मलिक है।
साल 2009 में वह 26 साल की थी। हरियाणा के पानीपत में स्टूडेंट काउंसलर के तौर पर काम करती थी।
उसके बॉस ने उससे रिश्ता बनाने की मांग की।
उसने मना कर दिया।
उसके बाद उसके चेहरे पर तेज़ाब से हमला करवाया गया।
उसकी एक आंख की रोशनी चली गई।
पिछले 16 सालों में उसे 25 सर्जरी से गुजरना पड़ा।
उसने हार नहीं मानी।
वह कोर्ट गई।
2015 में सबूत दर्ज हुए।
2019 में जिरह पूरी हुई।
2024 में अंतिम बहस हुई।
24 दिसंबर 2025 को फैसला आया।
तीनों आरोपी बरी कर दिए गए।
सबूत पर्याप्त नहीं थे।
वह कोर्ट से बाहर आई, आंखों में आंसू थे।
उसने कहा — जज की कुर्सी के ऊपर लिखा “सत्यमेव जयते” उसे एक झूठ जैसा लगा।
लेकिन वह रुकी नहीं।
उसने अपील की।
वह सुप्रीम कोर्ट पहुंची।
जनवरी 2026 में चीफ जस्टिस ने कहा — यह न्याय व्यवस्था का मज़ाक है।
अपनी लड़ाई लड़ते हुए उसने “Brave Souls Foundation” की स्थापना की।
आज दिल्ली में उसके शेल्टर होम में 50 एसिड अटैक सर्वाइवर्स रह रहे हैं।
वह अन्य पीड़ितों के लिए 3 करोड़ रुपये का मुआवजा दिलवा चुकी है।
वह कहती है —
“अगर मैं हिम्मत हार गई, तो बहुत से सर्वाइवर्स भी हार जाएंगे।”
वह आज भी लड़ रही है।